बाँदा बनेगा विदेशों में देश की बदनामी का कारण, प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के लगेंगे आरोप

यूपी के बाँदा जिले में अवैध रेत खनन अपने चरम पर है और अब तो इसका डंका विदेश तक बजेगा और प्रशासन का मुँह काला होना लगभग तय माना जा रहा है।
बाँदा बनेगा विदेशों में देश की बदनामी का कारण, प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के लगेंगे आरोप
German and French Media Making Documentary in Banda Uday Bulletin

बुंदेलखंड देश का वह पुराना सूबा, जिसने देश को अनेकानेक ख्यातियाँ दी लेकिन अब इसी बुंदेलखंड के एक जिला बाँदा विदेशों में अपने बल पर भारत की छवि को मैला करके दिखाने का मुख्य हथियार बनेगा दरअसल बाँदा में रेत खनन के नाम पर प्रकृति से जो खिलवाड़ किया जा रहा है उसे फ्रेंच-जर्मन मीडिया द्वारा एक डाक्यूमेंट्री के माध्यम से दुनिया को दिखाने के लिए तैयारी कर लिया गया है।

बाँदा पहुंची विदेशी मीडिया:

अगर आपको देखना है कि प्रकृति को कैसे नंगा किया जा सकता है तो उसके लिए भारत के बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि आप बाँदा आइये और रेत खदानों पर पहुँचिये। आपको नजर आएगा कि कैसे भारी विशालकाय मशीन बहती नदी का सीना चीर कर प्रकृति का दोहन किया जा रहा है। ताजा मामला बाँदा में बहने वाली पुरातन नदी शुक्तिमती (केन) से जुड़ा हुआ है जहाँ के कनवारा घाट खंड तीन एवं चार की विदेशी मीडिया (फ्रेंच- जर्मन) मीडिया द्वारा लगातार कवरेज ली गयी। इस दौरान मीडिया ने ड्रोन कैमरों की मदद से हाई रेजोल्यूशन फुटेज भी लिए। जिसकी मदद से प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ के बारे में व्यापक जानकारी हासिल हो सकेगी।

बात विदेश तक पहुँच गयी, लेकिन लोकल अधिकारियों को जानकारी ही नहीं:

अब ये तो एक मजाक ही है कि बाँदा में राजनीतिक और लाल फीताशाही के संरक्षण की वजह से प्रकृति और जैवविविधता के साथ जो खेल सिर्फ पैसे कमाने के लिए खेला जा रहा है उसकी खबर विदेशी मीडिया को तो है लेकिन इस मामले में जिले के जिम्मेदार अफसरों और नेताओं को कोई जानकारी ही नहीं है। पर्यावरण पर नजर रखने वाले जिले के बाशिंदों ने बताया कि पैसा कमाने के चक्कर मे खदान संचालकों द्वारा सरकार और प्रशासन को मोटी रकम मुहैया कराई जाती है जिससे वो खदानों में हो रहे इस तरह के खनन पर आंखे मूंदकर बैठे रहे और अगर ऊपर से कोई दबाव या फिर आम लोगों के भड़कने पर मामले में एकाध लोगों पर कार्यवाही करके मामले पर पानी डाल दिया जाता है जिससे न सिर्फ मामला शांत हो जाता है बल्कि अगली बार दोहरी हिम्मत से खनन शुरू होता है।

बेहद संदिग्ध है स्थानीय मीडिया की भूमिका:

अगर स्थानीय मीडिया की भूमिका की बात करें तो इस मामले में बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए है दरअसल ये मात्र एक ब्लैकमेलिंग का खेल है जिसमें खुद मीडिया पहले पहल करके मामले की बात उठाता है बाद में पुरस्कार मिलने पर मुद्दा ही गायब हो जाता है और अगर उसी मामले की पड़ताल दूसरे व्यक्ति/ पत्रकार द्वारा की जाती है तो उसे ब्लेकमेलर करार दिया जाता है।

अब उम्मीद है कि इस जानकारी के बाद बाँदा के जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सार्थक कदम उठाए जाएंगे। अन्यथा दुनिया भर में भारत की इस छवि का जाना बेहद तकलीफ देह साबित होगा।

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उदय बुलेटिन
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