ये है गजब की पत्रकारिता, पत्रकार राजनीति से बाहर नहीं निकल पाए

सत्य हिंदी के संस्थापक आशुतोष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कमेटी गठन से अदालत की साख को धक्का लगेगा
ये है गजब की पत्रकारिता, पत्रकार राजनीति से बाहर नहीं निकल पाए
सत्य हिंदी के संस्थापक आशुतोष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कमेटी गठन से अदालत की साख को धक्का लगेगाGoogle Image

बदलाव की भयानक आदत राजनीति की होती है जिसमें कब पाला बदल दिया जाए पता नही चलता। लेकिन अब यह चलन भारतीय पत्रकारिता में भी सर चढ़कर बोल रहा है, पूर्व के पत्रकार फिर राजनेता और उसके बाद फिर बने हुए पत्रकार आशुतोष अपनी पत्रकारिता पर राजनीति की छाप छोड़ने में व्यस्त है, यही कारण है कि इस कि प्रतिकृति उनकी लेखनी पर भी नजर आती है।

दिनमान के साथ बदल जाते है भाव:

सत्य हिन्दी के कर्ताधर्ता है आशुतोष, जो कभी अन्ना आंदोलन में पत्रकारिता छोड़ कर गए थे उसके बाद उन्हें राजनीति में कैरियर नजर आया तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल के साथ सत्ता का लाभ लिया इसके बाद पता नही क्या बना बिगड़ा सो आशुतोष ने राजनीति को छोड़कर पत्रकारिता का दामन एक बार फिर थामा और इस बार वो आये डिजिटल प्लेटफार्म (सत्य हिन्दी) पर।

बीते दिनों से किसान आंदोलन लंबे वक्त से सरकार पर दबाव बनाती रही और आखिरकार यह मामला सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुँच गया। सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान केंद्र सरकार को उसकी मंशा को लेकर कड़े सवाल पूँछे और कई मामलों में फटकार भी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार के कानूनों को वापस लेने पर विचार करने के लिए भी कहा और साथ ही किसानों से इस बारे में नसीहत दी कि उन्हें बेहद सावधानी से आंदोलन करना चाहिए, उन्हें अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहिए, इस पर सत्य हिन्दी के पत्रकार आशुतोष ने इस खबर को सनसनी बनाते हुए खबर बनाई की सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लताड़ा और काफी हद तक यह सही भी है।

चूंकि कोई भी व्यक्ति जो अन्य माध्यमों से किसी के बारे में जानकारी करता है उसका निर्णय और संवाद बेहद जटिल होता है।

खैर आशुतोष इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वर्डिक्ट की वाहवाही करते और केंद्र सरकार के नियमों की आलोचना करते हुए नजर आए

अचानक से आशुतोष का मन बदल गया कहा अदालत की साख को धक्का लगेगा:

हालाँकि अभी तक जो मामला चल रहा था क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लताड़ा और कई नीतियों को लेकर सवाल खड़े किए लेकिन जैसे ही आंदोलन और कृषि कानूनों की असल पड़ताल करने कमेटी बनाने का निर्णय लिया और किसानों ने कमेटी के सामने आने पर असहमति जताई इसपर आशुतोष ने भी किसी कुशल राजनेता की तरह पलटी मार ली और देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय और उनकी नियति पर ही सवाल खड़े कर लिए। स्थितियों ने अचानक ऐसा मोड़ लिया कि महज कुछ घंटों पहले जिस सुप्रीम कोर्ट ने न्याय के आधार पर केंद्र सरकार की आलोचना की थी और किसानों की परेशानी को समझते हुए कानूनों को लागू न करने का आदेश सुनाया था वही सुप्रीम कोर्ट कमेटी बनाते ही निम्न स्तर का होने लगा।

मुआमला देखे:

क्या है कमेटी का बवाल:

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने तथाकथित विवादित कानूनों की पड़ताल और किसानों पर होने वाले प्रतिकूल प्रभाव को समझने के लिए एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया लेकिन जैसे ही इस कमेटी के गठन की घोषणा हुई उसके बाद इस मामले पर तरह तरह के वयानबाजी होने लगी। लोगों ने आरोप लगाए की जो लोग कमेटी में शामिल है जिससे देर सबेर ही सही तीनों कानूनों को या तो पूर्ववत अथवा संसाधन के बाद लागू किया जा सकेगा।

हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया है कि इस मामले में वो लोग शामिल है जो कही न कही कृषि और उससे जुड़े हुए कानूनों के जानकार है। कमेटी में कृषि शास्त्री के साथ साथ किसान संगठनों के लोग भी है, लेकिन असल पेंच यही फंस रहा है अगर कमेटी द्वारा इस आंदोलन को बेवजह करार दिया जाता है तो यह किसान आंदोलन को उसी वक्त समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशित कर दिया जाएगा,

बहरहाल जो भी हो इस मामले में पत्रकारों की दशा देखकर लोग मजे लूट रहे है।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

No stories found.
उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com