Big Disclosure on Mumbai attack
Big Disclosure on Mumbai attack|Uday Bulletin
टॉप न्यूज़

मुंबई अटैक सिर्फ आतंकवादी हमला नहीं था, बल्कि इससे हिन्दू आतंकवाद को मूर्त रूप देना था।  

अगर आप मुंबई हमले को सिर्फ एक आतंकवादी हमले के तौर पर देख रहे थे तो ये आपका वहम ही माना जायेगा। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

उस वक्त के मुम्बई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब में ऐसे तमाम खुलासे किये हैं जिसकी वजह से आतंकियों की रणनीति का पता चलता है।

क्या होता अगर कसाब गोली से मार डाला गया होता ?

अगर आप सोच रहे है कि क्या बड़ी बात होती? एक आतंकी था और कुत्ते की मौत मारा जाता लेकिन अगर ऐसा हो जाता तो आतंकी आका अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते। दरअसल आतंकियों की चाल यह थी कि कसाब भी अन्य लोगों की तरह मुंबई में कत्लेआम मचाने के बाद मारा जाए। इसके लिए बाकायदा एक चाल चली गयी थी। लेकिन अब इसे किस्मत कहे या सच के आने का तरीका, कसाब बच गया और भेद खुल गया।

अगर मर जाता तो मरने वाला कसाब नहीं, समीर दिनेश चौधरी होता :

अगर कसाब को सुरक्षाकर्मियों द्वारा जिंदा नही पकड़ा जाता और कसाब के बारे में पूरी जानकारी नहीं जुटाई जाती तो कसाब की मौत के बाद उसे हिन्दू घोषित करने के बाद हिन्दू आतंकवाद की परिभाषा गढ़ दी जाती।

आतंकवादी अजमल कसाब की कलाई पर हिंदुओं का पवित्र धागा जिसे 'कलावा' कहा जाता है, बांधा गया और पहचान पत्र में बेंगलुरु निवासी समीर दिनेश चौधरी नाम दिया गया था।

राकेश मारिया जो उस वक्त के मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अपनी किताब ( Let me say it now ) "लेट मी से इट नाउ" में इस बारे में चर्चा की है। मारिया लिखते हैं कि ये आतंकियों के आकाओं का एक हिडन प्लान था जिससे भारत मे हमला करने आये आतंकी भी अनजान थे। आतंकी आकाओं का यह भी मकसद था कि भारत मे कत्लेआम के बाद यह जहर घोल दिया जाए कि भारत मे हिन्दू आतंकवाद नाम की कोई चीज एक्सिस्ट करती है।

कसाब के दिमाग मे घोला गया था जहर :

दरअसल कसाब के दिमाग मे आतंकी बनाते वक्त भारत के खिलाफ इस कदर का जहर भरा गया था कि भारत के मुसलमान बेहद तकलीफ में जी रहे है, भारत मे मुस्लिमों को नमाज तक पढ़ने की मनाही है और मस्जिदों में ताले लगाए जा चुके है (हालांकि जब कसाब को इस जांच के दायरे में लाया और मुंबई की मस्जिद का दर्शन कराया तो कसाब दंग रह गया)।

राकेश मारिया के हिसाब से यह मामला आतंकी हमले तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे एक तरीक़े से ये हिन्दुओं को बदनाम की कोशिश की गई थी, अब इसको लेकर राजनैतिक उथल-पथल होना लाजिमी है।

उदय बुलेटिन के साथ फेसबुक और ट्विटर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com