आजाद भारत मे पहली महिला कैदी को होगी फाँसी, रस्सी का हो चुका है ऑर्डर

आजाद भारत में महिला को पहली बार होगी फांसी, सलीम भी चढ़ेगा सूली
आजाद भारत मे पहली महिला कैदी को होगी फाँसी, रस्सी का हो चुका है ऑर्डर
आजाद भारत में महिला को पहली बार होगी फांसी, सलीम भी चढ़ेगा सूलीGoogle Image

देश मे आजादी के बाद से कई कैदियों को जघन्य अपराधों के लिए सजा ए मौत मुक़र्रर की गई है साथ ही उन्हें फांसी के फंदे पर भी लटकाया जा चुका है, लेकिन यह एक रिकार्ड है कि अभी तक आजाद भारत मे किसी महिला को आजतक फांसी नही दी गयी। राजीव ग़ांधी की हत्या में शामिल महिला को भी नही, लेकिन अब यह रिकॉर्ड ज्यादा दिनों तक कायम नही रहेगा, भारत मे अब एक महिला शबनम को उसके ह्रदय विदारक कृत्य के लिए फांसी की सजा देने की सारी तैयारियां पूरी की जा चुकी है। हालांकि अभी भी फांसी की डेट सुनिश्चित नही की गई है"

बहुत जघन्य है अपराध:

यह माह प्रेम का है जिसमे प्रेमी प्रेमिका सात जन्मों तक जीने मारने की कसमें खाते है लेकिन इसी माह में प्रेम को कलंकित करने वाली शबनम को उसके आखिरी अंजाम तक पहुंचाने की कवायद शुरू हो चुकी है। शबनम के अपराध को जानने के लिए हमें लगभग एक दशक पहले जाना होगा, सन 2008 का साल और इस साल की 14-15 अप्रैल की मध्य रात्रि, जो अपने काले स्वरूप के अलावा तब और भी भयावह हो गयी जब यह जानकारी मिली कि अमरोहा के हसनपुर कस्बे से सटे छोटे से गांव बावनखेड़ी में एक ही परिवार के सात सदस्य हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिये गए। इस मामले में मुख्य आरोपी शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता मास्टर शौकत, माँ हाशिमा, भाई राशिद और अनीश, भाभी अंजुम और छोटी बहन राबिया को कुल्हाड़ी की मदद से सोते वक्त ही काट दिया। यही नही शबनम ने बेहद छोटे भतीजे अर्श को भी अपना जानी दुश्मन समझ कर गला घोंट कर मार दिया

हालाँकि इन ह्रदय विदारक हत्याओं के पीछे महज एक वजह थी घर वालों का प्रेमी सलीम से ज्यादा नजदीकियां बढ़ाना, दरअसल शबनम के घर वाले सलीम की हरकतों से वाकिफ थे और उन्हें शबनम के भविष्य की चिंता थी इसलिए शबनम को बार बार टोका जाता रहा। आखिरकार शबनम ने थक हार कर घर के सभी सदस्यों को कत्ल करने का निर्णय लिया और वह अपने मकसद में कामयाब भी हुई।

दो साल से ज्यादा चली सुनवाई:

अगर मामले की सुनवाई की बात करे तो यह सुनवाई मामले के खुलासे के बाद दो साल तीन महीने तक चली। इस दौरान जिला दंडाधिकारी एस ए हुसैनी ने जुलाई माह की 15 तारीख सन 2010 में शबनम और सलीम के रेयरेस्ट ऑफ रेयर की कैटेगरी में रखते हुए महज 29 सेकेंड की समयावधि में फांसी की सजा सुना दी, इस मामले में बहसों के लिए 100 तारीखें पड़ी और 29 बयानों को सुना गया।

मथुरा जेल में चल रही है तैयारियां:

हालांकि इस वक्त तक शबनम उत्तर प्रदेश की बरेली जेल में कैद है वही सलीम आगरा की जेल में सड़ रहा है, दोनो द्वारा जिला अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चैलेंज किया जा चुका है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत के फैसले को बरकार रखा है वही राष्ट्रपति ने भी दोनो की क्षमा याचिका को खारिज कर दिया है, वही उत्तर प्रदेश में महिला फाँसीघर होने की वजह से मथुरा में फांसी की तैयारियां हो चुकी है। मथुरा जेल प्रशासन ने फांसी की रस्सी के लिए ऑर्डर भी दे दिया है प्रशासन के अनुसार जैसे ही उन्हें डेथ वारेंट प्राप्त होता है शबनम को यहाँ लाकर फांसी दी जाएगी।

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उदय बुलेटिन
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