RIP Rahat Indori
RIP Rahat Indori|Google Image
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राहत इंदौरी नहीं रहे, फिर भी उनकी शायरी हमेशा जिंदा रहेगी

भारत मे जब भी उम्दा शायरों की बात आएगी तो राहत इंदौरी अपनी उपस्थिति बड़ी मजबूती के साथ पेश करते हुए नजर आएंगे, हालांकि वो बात अलग है कि उनके कुछ शेर वाहवाही से ज्यादा विरोध लिए नजर आएंगे।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है:

मामला अख़लाक़ की हत्या से जुड़ा हुआ था। देश मे गौरक्षा को लेकर लोगों की कुछ जरूरत से ज्यादा कोशिशें होने लगी और कभी कभार तो लोग खुद को अदालत और जज के साथ जल्लाद समझ बैठे इसी दरम्यान अखलाक की मौत के बाद देश मे एक बड़ी बहस होनी शुरू हो गयी। देश के बड़े शायरों जैसे मुनव्वर राणा और राहत इंदौरी ने अपनी तल्खी दिखाई थी। शायद उसी वक्त राहत की एक पुरानी शायरी लोगों के जुबान पर चढ़ सी गयी। इसके साथ-साथ जब भारत मे सीएए और एनआरसी के विरोध शुरू हुआ तो ये चंद शेर उसका गीत बनकर उभरे।

हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.
Rahat Indori

अटल बिहारी बाजपेयी के बारे में तल्ख बातें:

आज राहत इंदौरी कोरोना की वजह से इस दुनिया मे नहीं है लेकिन राहत के जाने के बाद भी राहत के चंद शेर सोशल मीडिया पर घूम-घूम कर बाहर निकल कर आ रहे है आप खुद ही नजर करिये।

वाजपेयी जी का 2001 में उनके घुटने का ऑपरेशन हुआ था। वो अविवाहित थे, इस पर राहत इंदौरी की शायरी का स्तर देखिये.. और उसके बाद आने वाले ठहाके सुनिए। दो कौड़ी का होना समझ आएगा कौन हुआ!

Posted by Unofficial: Rubbish Kumar on Tuesday, August 11, 2020

सनद रहे ये लाइनें एक मुशायरे में उस वक्त कही गयी थी जब देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी घुटनों को लेकर परेशान थे और उनका ऑपरेशन किया गया था। हालाँकि उस वाकये के बाद अटल बिहारी कभी अपने क़दमों पर चल नहीं पाए और राहत के लिए वो शायरी उन्हें खेमो में बांट गयी। शायद यही कारण है कि आज राहत की मौत के बाद भी उन्हें अलग नजरिये से देखा जा रहा है। लेकिन लब्बोलुआब यह है कि भारत ने एक बेहतरीन शायर खो दिया।

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उदय बुलेटिन
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