सोचो अगर कसाब मारा गया होता, तो मुंबई अटैक के बाद हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा को पक्का नाम मिल जाता

कसाब के जिन्दा बच जाने से हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा का दम घुट गया
सोचो अगर कसाब मारा गया होता, तो मुंबई अटैक के बाद हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा को पक्का नाम मिल जाता
mumbai attackGoogle Image

बीते दिन मुंबई हमले की बरसी थी, एक ऐसा हमला जिसने भारत समेत पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था, देश पाकिस्तान से भाड़े पर लाये गए कुछ आतंकी टट्टुओं द्वारा से सुलग चुका था। मुम्बई की शान कहे जाने वाला होटल ताज धू-धूकर जल रहा था। लोग आतंकियों की गोली खाकर जमीन पर गिरते जा रहे थे। स्थानीय पुलिस ऐसी स्थिति में थी कि उन्हें आतंकियों के मारने की बजाय आम लोगों को बचाने की मुहिम शुरू करनी पड़ी। आखिरकार भारत शहीदों का देश है, तुकाराम ओमले नामक कांस्टेबल ने आतकी की एके 47 की धता बताते हुए पूरी की पूरी मैगजीन अपने सीने पर पैवस्त करा ली और खुद की शहादत देकर एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा दिया। सोचिए अगर ऐसा होता कि आतंकी मारा जाता तो क्या किसी आतंकी को पाकिस्तानी मुस्लिम स्वीकार किया जाता? क्योंकि पहचान के तौर पर सभी आतंकी खुद को एक कट्टर हिन्दू की तरह साबित करने पर तुले थे।

क्या था आतंकियों का मकसद?

भारत मे बारह साल पहले एक ऐसा हमला हुआ जिसे भारत की आवाम लंबे वक्त नही भूल पाएगी, एक ऐसा हमला जिसने भारत को नए सिरे से सुरक्षा के मामले में सोचना शुरू कर दिया। भारत मे हुए इस हमले को केवल एक आतंकी हमले की तरह देखा जाना बेहद नाकाफी होगा। दरअसल पाकिस्तान से आये हुए आतंकियों ने भारत के सीने पर ऐसा हमला किया जो केवल हमले तक सीमित नही था बल्कि इस हमले में ऐसे राज निकल कर सामने आये जो यह बताने के लिए सक्षम थे कि इस हमले में भारत के अंदर ऐसी साजिश रचने का प्रयास किया गया था कि भारत के अंदर ही धार्मिक धड़े बन जाये। दरअसल आतंकियों ने इस हमले के वक्त न सिर्फ निर्दोषों का खून बहाया बल्कि देश की सुरक्षा को आईना भी दिखाया और आतंकियों द्वारा ऐसे छद्म पहचान ली हुई थी ताकि लोगों को आतंकियों के धर्म के जाल में उलझा लिया जाए और भारत के अंदर ही नए गृहयुद्ध का आगाज हो सके।

हिन्दू आतंकवाद की झूठी कहानी:

दरअसल इस हमले के दौरान आतंकियों ने मुम्बई की कही जगहों, सीएसटी, नरीमन पॉइंट, ओबेरॉय, ताज होटल समेत अन्य जगहों पर गोलियों की बारिस कर 18 सुरक्षा कर्मियों समेत 166 लोगों को बेवजह मौत के आगोश में सुला दिया, इस हमले में आतंकवादियों ने 300 से ज्यादा लोगों को गंभीर रूप से घायल भी किय। जिसमे कई लोग आजीवन अपंगता को प्राप्त हो गए, इस हमले में कुल 10 आतांकियो में से 9 को सुरक्षाकर्मियों ने मौत की नींद सुलाया, आतांकियो के छुपे प्लान की जानकारी तब हुई जब तुकाराम ओमले नामक मुम्बई पुलिस के जांबाज सिपाही ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मात्र एक डंडे के बल पर आतंकी की आटोमेटिक बंदूक से लोहा लिया, शहीद तुकाराम ओमले ने आतंकी की पूरी मैगजीन अपने सीने पर खाली कर ली लेकिन आतंकी को अपनी पकड़ से छूटने नही दिया।

इस मामले में सनसनीखेज जानकारी तब सामने आयी जब पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को पकड़ कर जांच पड़ताल की गई और जानकरी मिली कि आतंकी ने अपनी पहचान एक भारतीय हिन्दू के रूप में की थी, कसाब समेत अन्य आतंकियों ने अपने हांथो पर कलावा और ऐसे धार्मिक चिन्ह पहन रखे थे ताकि भारतीयों को यह लगे कि ये व्यक्ति कोई विदेशी नही बल्कि बेंगलुरु के आम हिन्दू थे।

मामले पर तत्कालीन मुम्बई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया भी कर चुके है खुलासा

राकेश मारिया ने अपनी किताब में किया उल्लेख:

दरअसल इस हमले के बाद तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने राजनीतिक तुष्टिकरण और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से हिन्दू अवधारणा को पेश किया। कतिपय पाकिस्तान ने भारत मे चल रही राजनीतिक उठापटक का लाभ लेने के लिए सभी दस आतंकियों को हिन्दू चिन्हों को धारण करके भारत मे हमला किया, ताकि आतंकियों के मारे जाने के बाद भारत मे यह असन्तोष हो कि ये सब भारतीय संगठन आरएसएस का किया धरा हो, हालांकि कसाब के पकड़े जाने के बाद मौके पर उपस्थित पुलिसकर्मियों ने कसाब को जान से मारने की कोशिश की लेकिन सब्र और दूरदर्शिता की वजह से इतना गंभीर और संगीन मुद्दा लोगों के सामने आ पाया।

राम माधव ने भी इस मामले पर राकेश मारिया की किताब के ऊपर अपने विचार साझा किए थे

सुरक्षा मामलों में भारत ने कई सुधार किए:

अगर सुरक्षा बलों की स्थिति पर गौर करें तो भारत मे सुरक्षा के मामले पर बड़ी-बड़ी खामियां नजर आयी हालांकि यह भी सच है कि भारत मे हुए सभी आतंकी हमलों में यह पहली बार था कि एनएसजी कमांडोज ने सीधे ऑपरेशन की जगह पर एयर ड्रॉप करके कार्यवाही को अंजाम दिया। लेकिन इसमें एक शर्मिंदगी वाली बात यह भी थी कि एनएसजी कमांडोज की इस टीम को महज एक एयरक्राफ्ट के लिए दिल्ली में करीब 8 घंटे तक इंतजार करना पड़ा था। उस वक्त एनएसजी के डीजी जेके दत्त ने यह खुलासा किया कि उस वक्त एनएसजी के पास यह अधिकार भी नही थे कि उन्हें एक विमान मिल सके। हालाँकि इस हमले के बाद ही सरकार ने आनन-फानन में एनएसजी को अधिकार दिए जिसके चलते वह भारत मे कार्यरत किसी भी विमानन कंपनी से विमान ले सकती है।

पाकिस्तान का सच हुआ बेनकाब:

शायद यह दुनिया का पहला मामला था जब कोई आत्मघाती आतंकी जिंदा पकड़ा गया हो, इस आतंकी के पकड़े जाने के बाद दुनियाभर में पाकिस्तान की किरकिरी शुरू हो गयी और पूरी दुनिया ने पाकिस्तान की भूमिका पर न सिर्फ सवाल उठाये बल्कि कई देशों ने तो भारत को अपना समर्थन दिया और इसके बाद शुरू हुआ भारत का देश की सुरक्षा के लिए आक्रामक होना।

हालांकि इस वक्त को बारह साल बीत चुके है लेकिन दुश्मन की मौजूदगी को नकार नहीं सकते, हमें भारत के विकाश के साथ खुद को इतना सक्षम बनाना है ताकि शत्रु हमारे देश की अस्मिता के साथ खेलने से पहले हजार बार सोचे।

उदय बुलेटिन 26/11 में शहीद हुए सभी सुरक्षा कर्मियों की शहादत को नमन करता है और इस हमले में मारे गए निर्दोष नागरिकों की आत्माओं को शांति मिलने की कामना करता है।

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उदय बुलेटिन
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