बाँदा में रही नट बली के मेले की रौनक, राहगीर रहे परेशान

उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में लगा मेला, झांसी मिर्ज़ापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा जबरदस्त जाम।
बाँदा में रही नट बली के मेले की रौनक, राहगीर रहे परेशान
बांदा जिले में लगा मेलाउदय बुलेटिन

मकर संक्रांति के अवसर पर बाँदा में केन नदी के किनारे भूरागढ़ के किले पर सदियों पुराने नट बली के मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान नदी के दोनो किनारे पर हजारों की तादाद में लोग जुटे। इस मेले की वजह से झांसी मिर्ज़ापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी भरकम जाम लग गया। पुलिस प्रशासन ने नदी के दोनो तरफ जाम तो लगाया लेकिन सही डायवर्जन के न होने की वजह से राहगीरों में उहापोह की स्थिति बनी रही।

जमकर रही भीड़:

भले ही कोरोना काल के लिए केंद्र और राज्य सरकार तरह-तरह की गाइडलाइंस बनाती रहे लेकिन लोगों के हुजूम ने न सिर्फ सरकारी गाइड लाइंस को तोड़ा बल्कि इस दौरान शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नजर आए। इस दौरान इंदिरापुरवा, भूरागढ़, कनवारा, दरदा, दुरेन्डी इत्यादि गांवों के अलावा शहर की जनता मेले में पहुचीं। मेले में बच्चो के लिए झूले इत्यादि मनोरंजन का केंद्र बने रहे। लोग दुकानदारों ने कोविड नियमों को धता बताकर खरीदारी करते हुए नजर आए।

नट के मेले का आनंद लेते लोग
नट के मेले का आनंद लेते लोगउदय बुलेटिन

मेले का है ऐतिहासिक महत्व:

मेले का इतिहास करीब 600 साल पुराना है। लोक कथाओं के अनुसार भूरागढ़ का किला जब महोबा राज्य के आधीन था और इस किले पर किलेदार तैनात था उस वक्त बारीगढ़ जैसी बेहद छोटी रियासत के निवासी एक नट (करतब दिखाने वाली घुमंतू जाति) किले पर पहुंची। किले के आसपास लंबे वक्त तक खेल होने की वजह से नट और किलेदार की बेटी के बीच आकर्षण और प्रेम उत्पन्न हो गया। जब इसकी जानकारी किलेदार तक पहुचीं तो वह गुस्से से आग बबूला हो गया लेकिन अगर किलेदार सीधे इस मामले में अपनी हनक दिखाता तो उसके सामरिक सम्बंध खराब हो सकते थे ( दरअसल बारीगढ़ का नट कुनबा किलेदार के एक समझौते में शामिल थे। जिसकी वजह से किलेदार की सेना में अधिकतर योद्धा नट समुदाय से ही थे) इसलिए किलेदार ने एक साजिश से युक्त चाल खेली।

किलेदार ने नट के प्रेम की परीक्षा लेने हेतु एक शर्त रखी कि अगर नट एक रस्सी पर केन नदी के पाट पर चलकर किले तक पहुँचेगा तो किलेदार की बेटी उसकी होगी, बीरन नट ने इस परीक्षा को एक चुनौती की तरह लिया और तय कार्यक्रम में नट ने भारी भीड़ के सामने केन नदी का पाट केवल एक रस्सी पर चलकर पार कर लिया लेकिन किले के पास पहुँचने से पहले ही किसी ने किले से बंधी हुई रस्सी काट दी। जिससे बीरन नट की पत्थर पर गिरकर मौत हो गयी। हादसे को देखकर किलेदार की बेटी ने भी प्रेमी के शव के ऊपर किले से कूदकर अपनी जान दे दी। तभी से प्रेमियों की याद में यह मेला अनवरत तरीके से लगता आ रहा है।

बेहद बुरा रहा ट्रैफिक का हाल:

अगर मेले में गणमान्य लोगों के पहुँचने की बात करे तो मेले मे सदर भाजपा विधायक प्रकाश द्विवेदी के साथ-साथ पूर्व सैनिक मेले में पहुँचे। जहां पर उन्हें सम्मान कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। मेले में सुरक्षा व्यवस्था इत्यादि की देखरेख के लिए जिला अपर पुलिस अधीक्षक भी पहुँचे लेकिन सही डायवर्जन न होने की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले लोगों को बेहद परेशान होना पड़ा दरअसल जिला पुलिस ने बाँदा की तरफ से केन नदी के पुल के बिल्कुल पहले ही रास्ते को बैरीकेट लगाकर बंद कर दिया और महोबा तरफ की ओर से भूरागढ़ गांव के बाहर बंद कर दिया।

इस दौरान बाँदा की तरफ से आने वाले लोगों को पहले से कही भी डायवर्जन की जानकारी नहीं दी गयी नतीजन लोग पुल के पास जमा होने लगे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब इस मामले पर उदय बुलेटिन के क्षेत्रीय प्रमुख ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से इस मामले में रास्ते की जानकारी लेनी चाही तो पुलिसकर्मियों द्वारा रास्ता बताने की बजाय पत्रकारिता की पहचान मांगी। देर शाम तक लोग जानकारी के आभाव में रास्ते मे खड़े रहे। आस पास के गांव से जुड़े ग्रामीण पुलिस की हनक के सामने गिड़गिड़ाते नजर आए।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

AD
No stories found.
उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com