भारती एयरटेल ने की चोरी, बिजली विभाग ने वसूला दंड

एयरटेल ने की बिजली चोरी लगा तगड़ा जुर्माना
भारती एयरटेल ने की चोरी, बिजली विभाग ने वसूला दंड
बिजली चोरीGoogle image

बिजली चोरी में अब केवल उत्तर प्रदेश का आम आदमी ही नही बल्कि देश की जानी मानी टेलीकॉम कंपनी भी शामिल हो चुकी है, ताजा मामला भारती एयरटेल से जुड़ा हुआ है जिसमें टेलीकॉम कंपनी के टॉवर में अवैध तरीके से बिजली का उपयोग किया जा रहा था, विभाग ने चोरी को पकड़ कर दंड शुल्क वसूला है।

भारती सेल्युलर लिमिटेड ने की बिजली चोरी:

मामला उत्तर प्रदेश के आगरा अंतर्गत रुणाकता से जुड़ा हुआ है जहां पर भारती एयरटेल लिमिटेड की सहगामी कंपनी भारती सेल्युलर लिमिटेड के टावर द्वारा मीटर को बाईपास करके बिजली चोरी करने का मामला प्रकाश में आया है, आगरा में बिजली चोरी रोकने के लिए बनाई गई विजिलेंस टीम के द्वारा यह खुलासा किया गया है कि रुणाकता में चंद्रशील कोल्ड स्टोरेज के पास लगे हुए भारती सेल्युलर लिमिटेड के टावर द्वारा बिजली विभाग को चकमा देकर बिजली को अवैध तरीके से उपयोग किया जा रहा था। विभाग के अधिकारियों को संदेह होने पर मीटर की जांच की गयी और पाया गया कि मौके पर लगे हुए मीटर को बाईपास करके बिजली उपयोग की जा रही थी।

ठोका गया भारी भरकम जुर्माना:

मामले पर जांच दल ने मौके पर उपलब्ध कंपनी के प्रतिनिधि भोला को बिजली चोरी करने का दोषी पाया गया और कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा इस अपराध को स्वीकार भी किया गया, विभाग ने इस अपराध के लिए तीन लाख पचास हजार ( 3,50,000) शमन शुल्क और 114000 ( एक लाख चौदह हजार ) रुपये राजस्व निर्धारण जमा कराया गया है, तथा भविष्य में ऐसे अपराध न करने की नसीहत भी दी गयी है। विभाग के अनुसार बिचली चोरी चाहे किसी सामान्य उपभोक्ता द्वारा की जाए अथवा किसी बिजनेस घराने से कानून और नियम सभी के लिए बराबर कार्य करते है।

लोगों ने बताया किस्सा:

जब हमने इस बारे में टेलीकॉम सेक्टर में काम करने वाले लोगों से बिजली के उपयोग करने की बात कही तो उन्होंने नाम न लिखने की शर्त पर बड़े खुलासे किए, उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग सभी टावर्स पर बिजली चोरी को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया जाता है, इस मामले में विभाग के लाइनमैन, जेई से लेकर एसडीओ तक शामिल होते है। एक ओर जहां लाइनमैन और जेई को खर्चा पानी देकर शांत कराया जाता है वहीँ जिले में एसडीओ जैसे अधिकारियों को मासिक तौर पर मोटी रकम पहुंचाई जाती है और यह सब गड़बड़झाला तब तक चलता रहता है जब कोई विशेष टीम द्वारा इसका खुलासा नहीं किया जाता। लोगों ने बताया कि अगर किसी एक डिस्कॉम में ही इस मामले की जांच की जाए तो बहुत बड़ा सिंडिकेट टूट सकता है।

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उदय बुलेटिन
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