कानपुर की घटना बहुत कुछ कह जाती है, आखिर ये सब हुआ कैसे ?

कानपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के गांव में फायरिंग के दौरान शहीद हुए आठ पुलिसकर्मियों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
कानपुर की घटना बहुत कुछ कह जाती है, आखिर ये सब हुआ कैसे ?
vikas dubey kanpur criminalUday Bulletin

कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव बिकरू में बिल्हौर क्षेत्राधिकारी के निर्देशन में पुलिस की तीन टीमें कुख्यात बदमाश और हिस्ट्रीसीटर विकाश दुबे के यहां दबिश देने गयी थी, लेकिन यह दांव पुलिस के ऊपर ही भारी पड़ गया, विकाश और उसके गुर्गों ने बेहद तगड़ी प्लानिंग के साथ पुलिस पर घात लगाकर हमला किया जिसमें क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए वहीँ अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए जिनका इलाज रीजेंसी हॉस्पिटल में चल रहा है।

पुलिस पहुंची और फायरिंग शुरू:

दरअसल गुरुवार की रात क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र को यह जानकारी मिली कि विकास दुबे अपने कुछ गुर्गों के साथ अपने घर पर आया हुआ है। क्षेत्राधिकारी ने दबिश देने के लिए पुलिस की तीन टीम बनाई और गांव की ओर कूच किया। लेकिन पुलिस जैसे ही गांव में पहुंची गांव का माहौल सामान्य नहीं था, गांव में सड़के खोदी गयी थी और रास्ते को जाम करके जेसीबी को खड़ा किया गया था ताकि पुलिस का वाहन मौके पर न पहुँच सके। पुलिस दुबे के घर में घुस पाती उससे पहले ही विकाश दुबे की छत से असलहा धारियों ने पुलिस की टीमों पर अंधाधुंध फायर खोल दिये जिसमे क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र समेत उप निरीक्षक महेश चंद्र यादव, उपनिरीक्षक अनूप कुमार सिंह उपनिरीक्षक नेबू लाल, आरक्षी जीतेन्द्र पाल, आरक्षी सुल्तान सिंह, आरक्षी बबलू कुमार और आरक्षी राहुल कुमार शहीद हो गए।

सबसे बड़ा सवाल अपराधी भागा क्यों नही ?

अगर किसी अपराधी की मनोदशा का विश्लेषण किया जाये और हर दिन होने वाली घटनाओं का रिकार्ड देखा जाए तो सबसे अहम एक बात सामने आती है कि अपराधी और आरोपी इस फिराक में रहता है कि वह पुलिस के हत्थे न चढ़ पाए और किसी तरह वह पुलिस के सामने न आये। इस प्रकार के मामलों में स्थानीय बदमाश, हत्यारोपी, डकैत इत्यादि अपराधी हवाई फायर करके भागने की जुगत में रहते हैं लेकिन इस घटना में मामला उल्टा हो गया। यहां देखने मे आता है कि पुलिस की इतनी टीमों और तमाम दरोगा के होने के बावजूद आरोपी ने जगह नहीं छोड़ी बल्कि पुलिस के आने का इंतजार किया ताकि पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया जा सके और कमोबेश ऐसा हुआ भी, पुलिस टीम के ऊपर विकाश के साथियों ने धावा बोलकर पुलिस टीम को लगभग खत्म सा कर दिया, घायल पुलिसकर्मियों ने बैकअप के लिए विभाग को सूचित किया इसके बाद पुलिस ने गांव को ही नहीं बल्कि आस-पास के गांवों और पूरे जिले को घेर लिया। यही नहीं पुलिस ने जाल बिछाते हुए आस-पास के जिलों को भी अपने रडार पर लिया और पुलिस लगातार काम्बिंग कर रही है।

खुद पुलिस पर उठ रहे है सवाल:

अगर इस पूरे मामले को देखा जाए और पुलिस की कार्यशैली पर नजर डाली जाए तो खुद पुलिस के आलाधिकारी इस बात पर जोर देते हुए नजर आ रहे है कि इस मामले में पुलिस ने जल्दबाजी की और मुखबिरी का ठीक उपयोग नहीं किया। हालांकि इस बारे में भी जांच होनी चाहिए कि क्या मुखबिर ने डबल एजेंट की तरह काम तो नहीं किया? चूंकि आरोपी दुबे राजनीतिक वर्चस्व वाला व्यक्ति रहा है, पूर्व में प्रधान पद से लेकर जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष तक के पदों तक काबिज रहा है। कुछ मामलों में उक्त आरोपी के बारे में यह भी बताया जा रहा है कि आरोपी विकास दुबे समाजवादी पार्टी का नेता भी रहा है (हालांकि उदय बुलेटिन इस दावे के बारे में सत्यता की पुष्टि नहीं करता) तो राजनैतिक वर्चस्व वाले अपराधी के बचाव के साधन बहुत होते है और हो सकता है इसी राजनीति लिंक की वजह से पुलिस के क्रियाकलापों की जानकारी पुलिस के अंदर वाले व्यक्ति ने हीआरोपी तक पहुंचाई हो। हो सकता है कि इस घटना में किसी पार्टी के नेताओं द्वारा आरोपी को पहले से ही सशंकित कर दिया गया हो, जिसके बाद ही विकास ने पुलिस टीम का मुकाबला करने का सोचा। हालांकि इस मामले पर पुलिस अपनी जांच बेहद संवेदनशील तरीके से बढ़ा रही है ताकि इस मामले में कोई भी आरोपी किसी भी तरह से बच न पाए।

बांदा ने खोया अपना लाल:

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में इस घटना के बाद कोहराम छा गया, दरअसल इस घटनाक्रम में अपनी जान गंवाने वाले डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी (सीओ देवेंद्र मिश्र पुत्र श्री महेंद्र चंद्र मिश्र क्षेत्राधिकारी बिल्हौर) ग्राम पोस्ट सहेवा थाना गिरवा के निवासी थे। इस घटना में पुलिस टीम का नेतृत्व देवेंद्र मिश्र ही कर रहे थे और सबसे पहले पुलिस टीम पर चली गोलियों को देवेंद्र मिश्र ने ही झेला था। घटना के बाद से ही जिले के लोग इस मामले पर नजर गड़ाए हुए हैं।

कौन है विकास दुबे ?

विकास दुबे राजनेता कम गुंडा कैटेगरी का व्यक्ति है कानपुर से लेकर गोरखपुर और इधर पूर्व में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) तक इसका सिक्का चलता है। आपराधिक इतिहास में राज्य के दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री की हत्या से लेकर लूट, डकैती, अपहरण के कई मामले दर्ज हैं। इससे पहले विकास पर पुलिस थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों पर हमला करने के भी मामले सामने आए हैं। इन्ही कारगुजारियों की वजह से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकास पर 25 हजार रुपये का इनाम रखा गया था।

पुलिस ने दो बदमाश बाद में मार गिराए:

मामले को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश पुलिस का माथा बेहद गर्म है पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान दो बदमाशों के साथ दोबारा हुई मुठभेड़ में मार गिराया दोनो बदमाशों के पास शहीद पुलिसकर्मियों के छीने गए असलहे बरामद किए गए है। मामले को लेकर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ कानपुर पुलिस लाइन पहुंचे और शहीदों को पुष्प अर्पित करने के बाद घायल पुलिसकर्मियों से मिलने सर्वोदय नगर रीजेंसी हॉस्पिटल पहुंचे वहां पर योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि अब जिले में दूसरे जिलों से आई हुई पुलिस तभी अपने गृह जनपद जाएगी जब या तो आरोपी पकड़ा जाए या फिर मार दिया जाएगा। पुलिस के तेवर और योगी आदित्यनाथ की तल्खी को देखते हुए ऐसा लगता है कि आरोपी विकास और मौत की दूरियां बेहद कम बची है। किसी भी समय विकास के एनकाउंटर में मारे जाने की खबर लोगों तक पहुँच सकती है।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

Related Stories

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com