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लोकसभा में पास हुआ ‘आर्थिक आधार पर आरक्षण बिल'
लोकसभा में पास हुआ ‘आर्थिक आधार पर आरक्षण बिल'
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लोकसभा में पास हुआ ‘आर्थिक आधार पर आरक्षण बिल’ आज राज्यसभा में होगी अग्निपरीक्षा 

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान को प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक बताया। 

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को मंगलवार को 3 के मुकाबले 323 मतों से लोकसभा की मंजूरी मिल गयी। आज इसे राज्यसभा में पेश किया जायेगा , जिसके बाद सरकार ने उच्च सदन की बैठक एक दिन और बढ़ा दी गयी है।

लोकसभा में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने ‘‘संविधान (124 वां संशोधन) , 2019’’ विधेयक का समर्थन किया। साथ ही सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिये लाया गया है।

लोकसभा में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सरकार बनने के बाद ही गरीबों की सरकार होने की बात कही थी और इसे अपने हर कदम से उन्होंने साबित भी किया। उनके जवाब के बाद सदन ने 3 के मुकाबले 323 मतों से विधेयक को पारित कर दिया।

लोकसभा में आर्थिक आधार पर आरक्षण बिल पास होने पर लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि इस विधेयक के पास होने पर मुझे अच्छा लगा क्योंकि मेरे बच्चे मुझसे पूछते थे कि 'हमारे लिए क्या है, आर्थिक रूप से कमजोर के बारे में क्या, केवल जातिगत मामला होगा?' आज कई सवालों के जवाब दिए गए हैं। यह लंबे समय में बहुत फायदेमंद होगा।

पीएम नरेंद्र मोदी ने संविधान (124 वां संशोधन) विधेयक पास होने पर कहा , ये विधेयक 2019 लोकसभा में पारित होना हमारे देश के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है। यह एक प्रभावी उपाय को प्राप्त करने की प्रक्रिया को गति देता है जो समाज के सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को धन्यवाद देते हुए कहा कि, मैं सभी दलों के सांसदों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने इसका समर्थन किया। हम पूरी तरह से 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा प्रयास है कि हर गरीब व्यक्ति, जाति या पंथ के बावजूद गरिमा के जीवन बिता सके।

वहीं लालू यादव की पार्टी आरजेडी ने बिल का विरोध किया। आरजेडी ने इसे धोखा बताते हुए पिछड़े-दलितों के लिए 85 फ़ीसदी आरक्षण की मांग की... उन्होंने कहा आरक्षण देने से पहले जातियों की जनगणना की जानी चाहिए। जिस जाति की संख्या जितनी है, उसे उतना ही आरक्षण देना चाहिए।