Drinking Water Crisis in Banda Lohara
Drinking Water Crisis in Banda Lohara|Uday Bulletin
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ग्राउंड रिपोर्ट: बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है गांव के लोग, जेई लोगों को नियम कायदे समझा रहे।

बाँदा ग्रामीण क्षेत्र लोहरा में पेयजल के लिए नहीं पर्याप्त व्यवस्था, पानी के लिए इकट्ठी हो रही भीड़ से फ़ैल सकता है कोरोना संक्रमण।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

कोरोना काल मे सबसे बड़ा बचाव यह है कि लोग इकट्ठे न हो पाएं, लेकिन लोगों को पानी के लिए लोगों के साथ खड़े होकर जान की बाजी लगानी पड़ रही है। नलकूप ऑपरेटर द्वारा सप्लाई खराब बताई जा रही है। मामला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अंतर्गत मटौध थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम लोहरा से जुड़ा हुआ है।

लोहरा गांव में जलापूर्ति बाधित:

बांदा जिले के थाना मटौन्ध क्षेत्र के गांव लोहरा में पिछले कई दिनों से जलापूर्ति का संकट गहराया हुआ है। पूरे गांव में काफी वक्त से पेयजल आपूर्ति बाधित है। ज्ञात हो कि गांव में जलापूर्ति के लिए टंकी से पानी सप्लाई किया जाता है लेकिन जैसे ही गर्मियां आयी और टेम्प्रेचर बढ़ने को है पूरे गांव में सप्लाई बाधित हो चुकी है। ग्रामीणों (जिसमे महिला पुरुष दोनों शामिल है) को मजबूरी वश एक जगह इकट्ठा होकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। असल समस्या यहीं से शुरू हो रही है कि अगर इनमें से किसी भी व्यक्ति को संक्रमण हुआ तो यह रेवड़ियों की तरह बंट जाएग। क्योंकि पानी लेने के चक्कर में लोगों द्वारा सोशल डिस्टन्सिंग का ख्याल नहीं रखा जा पा रहा।

जल संस्थान के द्वारा स्पेयर में कोई सुविधा नहीं:

यहाँ आपको बताते चले कि ऑपरेटर द्वारा यह जानकारी दी गयी कि नलकूप का स्टार्टर और समरसेबल में तकनीकी खराबी आयी हुई है। जल संस्थान के द्वारा भेजे गए तकनीशियन द्वारा इस समरसेबल और स्टार्टर को खोलकर बांदा ले जाया जाएगा और जांच के बाद ही इसे सुधारा जाएगा। चूंकि इससे साफ होता है कि जलापूर्ति जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था के लिए विभाग के पास कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है भले ही समूचा गांव पानी की कमी के कारण मर जाये उससे जल संस्थान के जेई साहब को कोई फर्क नहीं पड़ता। जबकि यह वक्त कोरोना जैसी महामारी का है जहां सोशल डिस्टेंसिंग एक बहुत बड़ा हथियार है लेकिन इस संबंध में न तो बांदा जिलाधिकारी को कोई चिंता है न ही स्थानीय लेवल पर किसी जिम्मेदार को।

फैल सकता है संक्रमण:

चूंकि गांव में कई लोग प्रदेश के बाहर से आये हुए है और उस इलाके से आये है जहाँ संक्रमण की स्थिति बेहद खतरनाक है और उस स्थिति में भी उन्हें मजबूरी वश जान बचाने के लिए पानी के लिए भीड़ में इकट्ठा होना पड़ रहा है। लोगों को शंका है कि अगर कोई व्यक्ति संक्रमित हुआ तो कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों द्वारा कोई सार्थक कदम नहीं उठाये गए है।

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उदय बुलेटिन
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