उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप|IANS
टॉप न्यूज़

डोनाल्ड ट्रंप ने ठुकराया मोदी का निमंत्रण, नहीं बनना चाहते गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि

गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत द्वारा दिया गया निमंत्रण अस्वीकार कर दिए जाने को कांग्रेस ने मंगलवार को एक ‘कूटनीतिक नासमझी’ करार दिया |

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

नई दिल्ली | गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत द्वारा दिया गया निमंत्रण अस्वीकार कर दिए जाने को कांग्रेस ने मंगलवार को एक 'कूटनीतिक नासमझी' करार दिया और कहा कि देश को इस शर्मिदगी से बचाया जा सकता था।

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, "इस बात को याद करना महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार ने जब भी अपने प्रधानमंत्री के माध्यम से किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष को गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है, उसे कभी ठुकराया नहीं गया है और सरकार तभी निमंत्रण भेजती है, जब वह सुनिश्चित हो जाती है कि उसे स्वीकार किया जाएगा। कूटनीतिक माध्यम इसी तरीके से काम करते हैं।"

शर्मा ने कहा, "यह एक कूटनीतिक नासमझी हुई है।" उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किए बगैर निमंत्रण नहीं भेजा जाना चाहिए था कि वाशिंगटन पहुंचने पर इसे स्वीकार कर लिया जाएगा।

कांग्रेस नेता ने कहा, "दिल्ली में घोषणा की गई, वाशिंगटन से घोषणा की गई और व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी राष्ट्रपति को निमंत्रण मिल गया है। मैं कहूंगा कि भारतीय गणराज्य को इस शर्मिदगी से बचाया जा सकता था।"

शर्मा ने नरेंद्र मोदी सरकार की निंदा करते हुए कहा, "इस सरकार की विदेश नीति बेतुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद रखना चाहिए कि प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ आदान-प्रदान व्यावहारिक नहीं हो सकती, बल्कि इसे निरंतरता, सुसंगतता और शुद्धता के एक चक्र की तरह होना चाहिए।"

आपको बता दें कि, भारत सरकार की ओर से अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने का प्रधानमंत्री की ओर से निमंत्रण भेजा गया था, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अस्वीकार किया है। विपक्षी पार्टी कोंग्रस इसे मोदी सरकार की सबसे बड़ी नासमझी करार दे रही है और इसे एक कूटनीतिक नासमझी बता रही है।