उदय बुलेटिन
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Times of india and Viral Video Screenshot
Times of india and Viral Video Screenshot|Social Media Viral
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विरोध और विद्रोह का यह कैसा रूप, गए थे सिस्टम को डराने और खुद का हाँथ ही खो बैठे। 

बम फोड़ना कौन सा प्रोटेस्ट होता हैं?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

पूरा देश इन दिनों CAA और NRC के मिथकों से जूझ रहा है, इस दोनो बिलो और एक्ट को लेकर जिस तरह की बाते समाज में रच बस गयी है उसके परिणामस्वरूप लोग और खासकर छात्र सड़कों पर है, फिर चाहे वह दिल्ली जामिया विश्वविद्यालय का इलाका हो या दिल्ली के ही पुलिस मुख्यालय का, सब जगह लगभग एक तरह का ही माहौल है।

विरोध के अलग-अलग मायने :

जनता सदियों से सरकारों के ऐसे नियमों की खिलाफत करती आई है जो जनता को अपने हितैषी नहीं लगे, ऐसा ही कुछ सिटीजन एमेंडमेंट बिल को लेकर भारत के सत्ता के गलियारों और आम जनता में घट रहा है, एक ओर जहां राजनैतिक पार्टियां अपने अस्तित्व को लेकर मुद्दों को सिलेक्टिव तरीके से साधने में जुटी है वहीँ जनता राजनैतिक प्रेरणा और भविष्य की भययुक्त आशंकाओं को लेकर धरातल पर विरोध कर रही है।

सत्ता सीन पार्टी जहाँ अपने बिल को भारतीय नागरिकों के काम की चीज न होने की बात कहकर इसे विशुद्ध राजनैतिक स्टंट बताने से नही चूक रही,

इस मामले को लेकर पूरा भारत दो धड़ो में बंटा हुआ नजर आ रहा है , एक वह तो जो इस बिल के विरोध में है दूसरा जो इस बिल का भारतीयों के साथ कोई जुड़ाव न होने की बात कहकर समर्थन कर रहा है।

लेकिन विरोध का यह रूप दहला देता है :

सवारियों से भरी हुई बस जिसको सवारियों सहित डंडे से पीटा जाता है, पश्चिम बंगाल में तो इसी विरोध के चलते तमाम रेलगाड़ियां स्टेशन पर खड़े-खड़े जला दी गयी। और बसों में पथराव करके सवारियों की जान जोखिम में डाली गई, ताजा मामला एक वायरल वीडियो को लेकर है जिसमे एक ऐसी घटना नजर आती है जिसको देखकर आम आदमी का दिल दहल जाये।

आखिर क्या है वीडियो में :

वीडियो के शुरुआत में एक कोलाहल सुनाई देता है प्रदर्शनकारियों की एक भीड़ किसी जगह की ओर जाती हुई दिखाई देती है वीडियो के चलने के कुछ देर बाद ही एक धमाका सुनाई देता है जिसके बाद लोग प्रदर्शन स्थल से भागते हुए नजर आते है, वीडियो में आवाज को सुनकर पहले तो यह लगता है कि शायद पुलिस ने आंसू गैस के गोले का प्रयोग किया होगा, लेकिन जैसे ही वीडियो आगे बढ़ता है स्थिति साफ हो जाती है। वीडियो के आगे वाले हिस्से में एक व्यक्ति अपने कोहनी से गायब हाँथ को लेकर भागता हुआ नजर आता है। यह दृश्य मन को विचलन से भर देता है यहाँ आपको बताते चले कि उक्त व्यक्ति के ब्लास्ट में फटे हुए हाँथ से लगातार खून का बहना समझ मे आता है। हालाँकि इस ब्लास्ट को लेकर मतभेद उत्पन्न होते है कि कहीं यह पुलिस द्वारा किया गया कोई आंसू गैस के शेल का ब्लास्ट तो नही है। लेकिन चूंकि आंसू गैस के शेल में इतनी क्षमता ही नहीं होती कि किसी ब्लास्ट में किसी के हाँथ को उड़ा दे, उसको लेकर लोगों द्वारा सोशल मीडिया में यह कयास लगाया जा रहा कि प्रदर्शनकारी पुलिस के ऊपर किसी तरह के हैंडमेड विस्फोटक का उपयोग कर रहे होंगे और भूलवश यह ब्लास्ट उपयोगकर्ता के हाँथ में ही फूट गया होगा।

क्या है वीडियो की प्रमाणिकता :

चूँकि किसी भी वीडियो को आमजन के सामने रखने से पहले यह देखना आवश्यक होता है कि यह वास्तविक है अथवा नहीं, सो हमने सबसे पहले उस वीडियो की प्रमाणिकता के जानने के प्रयास किये। किंतु तमाम टूल्स के उपयोग के बाद भी इस वीडियो के जुड़े अन्य साक्ष्य मूल के साथ उपलब्ध नही हुए।लेकिन इससे जुड़े हुए छायाचित्र इसको प्रमाणित करने के लिए काफी है।

वीडियो में कोई कट और फ्रेम हटाने जोड़ने का सुबूत नही मिलता। इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि वीडियो में कोई छेड़छाड़ नही हुई है इसका मतलब इसे जैसे शूट किया गया है वैसे ही सोशल मीडिया में डाला गया है। वीडियो के शुरुआत में ही इस वीडियो में हिंदी भाषा का समुचित प्रयोग होता नजर आता है, इस प्रकार से हम यह कह सकते है कि यह वीडियो पश्चिम बंगाल या किसी अन्य गैर हिंदीभाषी क्षेत्र से तो कतई सम्बंध नही रखता, यह वीडियो मूल रूप से हिंदी भाषी क्षेत्रो का है।

वीडियो में मेट्रो के पिलर बराबर दिखाई देते है इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि यह वीडियो उन महानगरों का है जहाँ मेट्रो उपलब्ध है मेट्रो के पिलरों पर लगे हुए पोस्टर इसे साफ-साफ दिल्ली के होने का प्रमाण देते है और खुद वीडियो में इसके सलेमपुर जाफराबाद के होने के बारे में कहा गया है वीडियो और प्राप्त चित्र (गूगल रिवर्स इमेज सर्च) में एक दिल्ली की ही राजनैतिक पार्टी के पोस्टर नजर आते है जो इसे पहली नजर में ही दिल्ली के होने का सुबूत देते है।

इस विस्फोटक से क्या हो सकता था :

अगर यह किसी विस्फोटक (हालाँकि इस संबंध में न तो स्थानीय पुलिस द्वारा कोई जानकारी उपलब्ध कराई गई है न ही किसी अस्पताल में इस तरह का कोई पेशेंट भर्ती हुआ है) का कारनामा है तो यह निम्न क्षमता वाला विस्फोटक ही होगा, तो यकीनन यह कई लोगों की जान खतरे में डाल सकता था। अगर इसको पुलिसकर्मियों के ऊपर प्रयोग किया जाता तो निश्चित ही इसमे कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो जाते और मामला और बिगड़ सकता था और अगर इसे किसी आम जनता वाहन या बस के ऊपर प्रयोग किया जाता तो मामला कहीं बदतर होता।विरोध के तरीके को लेकर कोयना मित्रा जो अपने ट्वीट्स को लेकर चर्चा में रहती है उन्होंने ट्वीट में बीएचयू और जामिया के प्रोटेस्ट की तुलना की है।

क्या गलत क्या सही :

सरकार की नीतियों का विरोध करके सरकार पर दबाव बनाना लोकतंत्र की ताकत है लेकिन अगर उसी ताकत का दुरुपयोग हो तो ऐसे घटनाक्रम होते ही है। अगर आने वाले समय मे यह साबित हो जाता है कि यह विष्फोट किसी बम का था तो इस विरोध की दिशा क्या हो सकती थी ये तो ईश्वर ही जाने,

वीडियो के प्रमाणीकरण के बारे में अभी तक कोई ऐसे प्रमाणिक सरकारी दस्तखत नही मिले है जिसपर दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा इस पर कोई कदम उठाया गया हो, हो सकता है भविष्य में इन विषयों पर भी चर्चा की जाए, और अगर आने वाले समय मे यह साबित हो जाता है कि यह विस्फोटक ही था तो निश्चित रूप से प्रयोगकर्ता पर आपराधिक मुकदमा पंजीकृत किया जा सकता है।

  • डिस्क्लेमर : हम  आपको यह पूरी तरह से आश्वस्त कराना चाहते है कि लेखक और उदय बुलेटिन द्वारा किसी व्यक्ति विशेष को विष्फोटकर्ता घोषित नही किया जा रहा है, बल्कि वीडियो के आधार पर यह शंका व्यक्त की जाती है, देश का प्रत्येक नागरिक देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है ,भले ही वह किसी भी जाति, समुदाय और धर्म से  ताल्लुक रखता हो, लेख में लिखे गए शब्द पूरी तरह से लेखक के निजी विचार है।