इंसाफ के लिए 3 महीने से भटक रहा एक पिता, गलत इलाज के कारण हुयी थी 2 वर्ष के मासूम की मौत

पिछले दिनों बच्चे के ऊपर दाल गिरने की वजह से बच्चे को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहाँ पर गलत इलाज करने की वजह से बच्चे की जान चली गयी, इसके बाद शुरू हुआ लीपापोती का खेल।
इंसाफ के लिए 3 महीने से भटक रहा एक पिता, गलत इलाज के कारण हुयी थी 2 वर्ष के मासूम की मौत
Civil Hospital Lucknow Wrongful TreatmentUday Bulletin

19 मार्च 2020 का दिन, बिंद्रा पाल अपने पुत्र बानू पाल उम्र लगभग 2 वर्ष के ऊपर गरम दाल गिर जाने से मामूली रूप से जल जाने की वजह से सिविल हॉस्पिटल (श्यामा प्रसाद मुखर्जी हॉस्पिटल) हजरतगंज लखनऊ शाम करीब 7:30 तक लेकर पहुँचे। पहुचने के बाद अस्पताल में बच्चे के इलाज में बेहद लापरवाही बरती गई, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ द्वारा बच्चे को देखकर यह बोला गया कि बच्चा मामूली सा जला है। इसका इलाज सुबह ही शुरू किया जाएगा, रात के करीब 10 :30 के आस पास बर्न स्पेशलिस्ट डॉक्टर के असिस्टेंट के आने के बाद ही इलाज तब शुरू हुआ जब परिवारी जनों ने डॉक्टरों के सामने मिन्नते की।

मामूली सा जले होने पर भी इलाज में लापरवाही और मौत:

इलाज शुरू होते ही बच्चे की तबियत में अचानक से गिरावट होने लगी और बच्चा सुध-बुध खोने लगा, बच्चे की तबियत खराब होने पर जब परिवारीजनों ने अस्पताल प्रशासन से यह कहा कि इलाज से बच्चे की तबियत बिगड़ रही है इस पर अस्पताल के स्टाफ ने कहा कि डॉक्टर साहब सुबह ही आ पाएंगे और अगर तुम ज्यादा हो हल्ला मचाओगे तो हम बच्चे को ट्रामा सेंटर रिफर कर देंगे, इस पर परिवारीजनों के पास कोई विकल्प न होने की वजह से चुप रहे और आखिरकार अस्पताल की लापरवाही और संवेदनहीनता की वजह से 2 वर्ष के मासूम बानू पाल ने दम तोड़ दिया।

घटना की जानकारी होते ही अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में अस्पताल के कर्मियों ने बच्चे को लगी हुई ड्रिप और बोतल इत्यादि निकाल कर छुपा दी और सारे कर्मचारी वहाँ से भाग गए। बार-बार मांगने पर बमुश्किल बच्चे की फाइल दी गयी और उसमें अस्पताल की लापरवाही का मामला सामने आया। जिसमे बच्चे के जलने की स्थिति को 10 प्रतिशत से काटकर उसे 50 प्रतिशत किया गया ताकि डॉक्टरों पर कोई आरोप न लग सके।

रही सही कसर पोस्टमार्टम में पूरी हुई:

चूंकि इस मामले पर पुलिस की स्थिति पहले से ही संदिग्ध रही, इस मामले को लेकर जब पीड़ित स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुँचे और लिखित में शिकायत तो उसमें भी टालमटोल किया गया लेकिन जब परिजन अपनी बात पर अड़े रहे तो मामले की जांच करने की बात कहकर वापस भेज दिया गया और शव का पोस्टमार्टम करने के लिए भेजा गया।

मृतक बच्चे के पिता के अनुसार जब शुरुआत में ही बच्चे की बर्न इंजरी को 10 प्रतिशत बताया और लिखा गया तो बाद में उसे काटकर 50 कैसे और क्यों किया गया? इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी वही लिखा गया जो सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बाद में लीपापोती की थी। इस मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा भी उन्हीं डॉक्टरों का पक्ष लिया गया।

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जनसुनवाई पोर्टल पर भी नहीं मिली मदद:

इस मामले को लेकर मृतक के पिता बिंद्रा पाल द्वारा आरोपियों के खिलाफ साजिशन जान से मारने, लापरवाही बरतने के मामले को लेकर मुकदमा पंजीकृत कराने और जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के जनसुनवाई पोर्टल पर भी गुहार लगाई गई लेकिन हर बार बातों को तोड़मरोड़ कर एक दूसरे के कंधे पर डालकर शिकायत को लूप में डाल दिया ताकि असल बात सामने न आ पाए।

Civil Hospital Lucknow Wrongful Treatment
लखनऊ में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही, मात्र 10 प्रतिशत जले हुए बच्चे का गलत इलाज करके ले ली जान। 

पीड़ित लेगा कोर्ट की मदद:

पीड़ित बिंद्रा पाल ने उदय बुलेटिन के साथ हुई बातचीत में कहा कि अगर उसे और उसके अबोध मृतक बच्चे को इंसाफ नहीं मिला और दोषी डाक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को सजा नहीं मिली तो वह इसके लिए कोर्ट की मदद लेगा और अस्पताल प्रशासन को इसमें जवाब देना पड़ेगा। स्थानीय लखनऊ पुलिस को भी इसमे अपना पक्ष निर्धारित करना पड़ेगा क्योंकि जो बच्चे की बर्न रिपोर्ट कहती है और उसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भारी अंतर समझ मे आता है। पीड़ित के अनुसार वह आरोपियों को सलाखों के पीछे हर हाल में देखना चाहता है।

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