सकारात्मक खबर: गीता प्रेस गोरखपुर की गीता दैनंदिनी का स्टॉक खत्म
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सकारात्मक खबर: गीता प्रेस गोरखपुर की गीता दैनंदिनी का स्टॉक खत्म

गीता प्रेस गोरखपुर एक लंबे वक्त करीब 90 वर्ष से भी ज्यादा वक्त से आध्यात्मिक पुस्तकों को प्रकाशित करने का काम कर रही है

अगर आपको भारत भर में कही भी सनातनी साहित्य और धार्मिक प्रणाली को पढ़ना है तो इसके लिए गीता प्रेस गोरखपुर से बेहतर कुछ नही होगा, लेकिन बीते कुछ वक्त से गीता प्रेस गोरखपुर की माली हालत पब्लिक डोमेन में आई और लोगों ने संस्कृति के रक्षण के लिए गीता प्रेस को बचाने की मुहिम चलाई, नतीजन खुद गीता प्रेस को सामने आकर शुभचिंतकों का धन्यवाद करना पड़ा, यह मामला सोशल मीडिया के सही उद्देश्य को दर्शाता है।

लोगों ने चलाई मुहिम:

सोशल मीडिया का सदुपयोग और दुरुपयोग भारत मे आये दिन देखा जा सकता है, फिर चाहे दिल्ली के रोड साइड ढाबे वाले बाबा कान्ता प्रसाद को फर्श से अर्श तक पहुँचाने का मामला हो या फिर दिल्ली दंगे में भड़काऊ भाषणों और तथ्यों का दुरुपयोग दोनो तरह के प्रचार प्रसार सोशल मीडिया में आग की तरह फैलते है, ताजा मामला दुनिया भर में सनातन धर्म से जुड़ी हुई किताबें छापने वाले प्रेस गीता प्रेस गोरखपुर से जुड़ा हुआ है, दरअसल गीता प्रेस गोरखपुर एक लंबे वक्त करीब 90 वर्ष से भी ज्यादा वक्त से आध्यात्मिक पुस्तकों को प्रकाशित करने का काम कर रही है, लेकिन चूंकि अब वक्त बेहद भौतिकतावादी होता चला जा रहा है और जो लोग धार्मिक साहित्य पढ़ना भी चाहते है वह इसे डिजिटल माध्यम से पढ़ते है तो इस वजह से गीता प्रेस गोरखपुर का घाटे में जाना बेहद लाजिमी है, इस प्रकार से यह कह सकते है कि यह प्रेस लगातार आर्थिक स्तर पर पिछड़ रहा है।

लेकिन सोशल मीडिया पर युवाओं समेत सभी धर्मावलंबियों ने इस मामले पर भारी मुहिम चलाई, अकेले ट्विटर पर गीता प्रेस गोरखपुर को लेकर हज़ारों लाखों ट्वीट किए गए जिसमें लोगों से यह अपील की गई कि आप गीता प्रेस गोरखपुर की पुस्तकों को खरीदे, इसी क्रम में नव वर्ष के उपलक्ष्य पर लोगों द्वारा गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा मुद्रित "गीता दैनंदिनी" खरीदने का आवाहन किया गया।

इस तरह के लाखों हज़ारों ट्वीट ट्विटर पर लगातार किये गए।

काम आयी मुहिम, गीता प्रेस ने खुद आकर बताया स्टॉक खत्म हो चुका है।

लोगों द्वारा की गई इस अपील का आम जनमानस पर खासा असर हुआ, मुहिम की वजह से लोगों ने गीता प्रेस गोरखपुर की डायरी समेत अन्य आध्यात्मिक किताबों को ऑनलाइन/ऑफलाइन दोनो तरीके से जमकर खरीदा। बिक्री इस कदर हुई कि जिस गीता प्रेस की दैनंदिनी हर साल हजारों की संख्या में बेकार चली जाती थी अब खुद गीता प्रेस ने शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि उनके पास अब दैनंदिनी का स्टॉक ही नही है।

क्यों खास है गीता प्रेस:

लागत मूल्य से 40 से 90 प्रतिशत कम मूल्य पर पुस्तकें बेचने वाला दुनिया मे पहला संस्थान। यही नही दुनिया भर में रोजाना करीब 50,000 से ज्यादा पुस्तकें बेचते है। पुस्तकों में किसी प्रकार का प्रोमोशन/प्रचार प्रसार नही होता, प्रेस किसी भी व्यक्ति, संस्था और सरकार से किसी प्रकार का अनुदान नही लेता, यही नही जिस महंगाई के दौर में कोई टॉफी भी एक रुपये में मिलना मुश्किल है उस वक्त में आप गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा बेहद अच्छे कागज पर मुद्रित मात्र एक रुपये में खरीद सकते है।

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उदय बुलेटिन
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