CRPF Helped Ashifa’s Family 
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भूस्खलन में फंसी आशिफ़ा के परिवार के लिए भगवान बनी सीआरपीएफ। 

सीआरपीएफ ने 12 किलोमीटर पैदल चलकर पहुँचाई मदद।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

आपको याद है वो दृश्य जब सीआरपीएफ का एक जवान ईवीएम की पेटी को मतदान कराकर ले जा रहा था और कुछ लोग उसे लात घूंसों से पीट रहे थे, या फिर कोई दूसरा दृश्य जब सीआरपीएफ की गाड़ी पर पत्थरबाजों द्वारा पत्थर बरसाए जा रहे हो या फिर कश्मीर का ताजा मामला जिसमे सीआरपीएफ के वाहन को निशाना बनाकर ग्रेनेड फेंका गया हो, ये सारे नमूने सीआरपीएफ की उन्ही जिम्मेदारियों के है जो वो अपने फर्ज में बंधे होने की वजह से निभाती चली आ रही है, सीआरपीएफ से जुड़ा ताजा मामला 5 जनवरी का है जहाँ सीआरपीएफ ने अपने मददगार होने का सुबूत दिया है।

एक पुकार पर 12 किमी चली सीआरपीएफ :

जम्मू कश्मीर का रामबन जिला जहाँ के डिंगडोल इलाके के राष्ट्रीय राजमार्ग 44 में लगभग चार दिनों से बर्फीली हवाएं अपने चरम पर थी तापमान शून्य के आसपास और स्याह घुप्प अंधेरे और भूस्खलन में फॅसे हुए राहगीर, जहाँ कोई अन्य मदद की उपलब्धता भी नहीं, रास्ते पर लैंडस्लाइड के जमावड़े ने वाहनों की लंबी कतारें खड़ी कर दी और आने-जाने के रास्ते चार दिनों से पूरी तरह बंद हो चुके थे।

इसी रास्ते मे एक सुनसान जगह पर श्रीनगर निवासी आशिफ़ा का परिवार अपने बच्चों के साथ श्रीनगर को लौट रहा था लेकिन खराब मौसम की वजह से उन्हें लम्बे समय तक रुकना पड़ा और इसके कुछ समय बाद बच्चे बिलखने लगे, तभी श्रीमती आशिफ़ा को सीआरपीएफ हेल्पलाइन का खयाल आया, बिना देरी लगाए आशिफ़ा ने मदद की गुहार लगायी। आशिफ़ा के एक फोन कॉल मात्र होने पर सीआरपीएफ ने अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए वहाँ बच्चों के लिए दूध और अन्य लोगों के लिए खाद्य समाग्री पहुंचाने का बीड़ा उठाया और कोई वाहन न चल पाने की स्थिति में सीआरपीएफ ने बारह किलोमीटर पैदल जाने का रास्ता अख्तियार किया और उसके बाद सीआरपीएफ ने मौके पर पहुँच कर ही दम लिया।

मदद मांगने वालों ने देखा तो मानो जान आ गयी :

चूकिं आशिफ़ा और उसका परिवार ऐसे मौसम में किसी मदद के इतनी जल्दी आने के बारे में सोच ही नही सकता था, जैसे ही सीआरपीएफ की 157 वीं बटालियन के इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह अपने साथियों के साथ मौके पर पहुचे और उन्हें राहत सामग्री पहुंचाई तो फंसे हुए लोगो के चेहरे खिल उठे।सीआरपीएफ की मदद टीम ने फंसे हुए लोगो को पानी, खाना और बच्चों के लिए दूध और बिस्किट उपलब्ध कराए। वहाँ बच्चो के लिए ये खतरनाक माहौल भी खुशनुमा हो गया, मददगार टीम ने आशिफ़ा के परिवार को बताया कि वो हमेशा अपने देश के हर नागरिक की रक्षा के लिए तत्पर है।

मदद के लिए तुरंत हुआ एक्शन :

सीआरपीएफ की हेल्पलाइन पर आशिफ़ा ने जैसे ही मदद मांगी, तो सीआरपीएफ हेल्पडेस्क ने सबसे पहले 84 वी बटालियन से मदद के लिए संपर्क किया और फसें हुए लोगों को जल्द से जल्द मदद पहुंचाने की बात कही। इसके तुरंत बाद ही सीआरपीएफ की 84 वी बटालियन ने घटनास्थल के सबसे नजदीकी बटालियन 157 को यह जिम्मा सौपा और इस राहत और बचाव दल की अगुवाई की सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह पीड़ित परिवार के पास बारह किलोमीटर चलकर पहुंचे। पीड़ित परिवार ने मौके पर ही सुरक्षाकर्मियों का हज़ारों बार शुक्रिया अदा किया। इस मामले को लेकर देश भर में चर्चे हो रहे है।

हालाँकि यहाँ आपको बताते चले कि ये मामला पहला नहीं है सीआरपीएफ जम्मू कश्मीर में इस तरह के ऑपरेशन चलाती रहती है और अपने आपको प्रथम जवाबदेह मानकर कार्य करती है। अभी हाल में ही हुई बस दुर्घटना में सीआरपीएफ ने हेलीकॉप्टर की मदद से लोगों को अस्पताल और सुरक्षित जगहों तक पहुँचाया था।

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उदय बुलेटिन
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