Worst Private hospitals in Lucknow
Worst Private hospitals in Lucknow|Uday Bulletin
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कोरोना काल मे कत्लगाह बने निजी अस्पताल, जो भर्ती हुआ समझो मरा

यूपी के निजी अस्पतालों में कोरोना का इलाज कराने गए तो घर बिकने के साथ-साथ मरने की गारंटी है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

भारत मे निजी चिकित्सा संस्थानों को मरते हुए मरीजो को बचाने वाला माना जाता रहा है लेकिन पिछले वक्त से ऐसे अस्पतालों पर मनमाना पैसा वसूलने और मरीजों की मौत का कारण बताया जा रहा है। लखनऊ में हुए एक वाकये ने इसपर अपनी मुहर भी लगा दी है। सरकार ने चार निजी अस्पतालों को नोटिस भी जारी कर दिया है।

जो आया वो जिंदा नही लौटा:

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दर जिस हिसाब से बढ़ रही है उसी हिसाब से निजी अस्पतालों की संपत्ति में इजाफा हो रहा है। खासकर जो मरीज क्रिटिकल कंडीशन में सो काल्ड उच्च चिकित्सा संस्थान (निजी) में भर्ती हो रहे है उनके साथ पैसा खींची कार्यक्रम बराबर चल रहा है लेकिन मरीज़ों की जान नहीं बच पा रही है।

अब ये चार निजी अस्पताल सरकार के रडार पर आ चुके है जिनको भारी संख्या में मरीज़ों के मृत घोषित किये जाने की वजह से नोटिस जारी किया गया है। दरअसल बीते दिनों में कुछ सरकारी चिकित्सा संस्थानों ने 48 मरीज निजी अस्पतालों को रिफर किये और आश्चर्य तो तब हुआ जब सारे के सारे मरीज अस्पाताल में दम तोड़ दिए। परिजनों ने इन सभी अस्पतालों पर पैसे लेकर भी इलाज में कोताही बरतने के आरोप लगाए हैं।

बड़े-बड़े अस्पतालों के नाम:

  • अगर अस्पतालों की बात करें तो बीते दिनों में लखनऊ के प्रशिद्ध निजी अस्पताल (Worst Private hospitals in Lucknow) अपोलो में 17 कोविड संक्रमितों को भर्ती कराया गया था जिनमे सभी 17 की मृत्यु हो गयी।

  • वहीँ लखनऊ के पुराने निजी चिकित्सा संस्थान मेयो हॉस्पिटल और चरक हॉस्पिटल में 10-10 मरीज भर्ती कराए गए थे जिनमें सभी व्यक्ति मृत घोषित किये गए।

  • चंदन हॉस्पिटल में बीते समय में 11 कोविड पॉजिटिव मरीज भर्ती (रिफर्ड) किये गए थे जिनमें सभी मरीज कोरोना की वजह से मारे गए।

क्या है आरोप?

लखनऊ के जिलाधिकारी ने परिजनों की शिकायत पर इन सभी चारोँ अस्पतालों को नोटिस जारी किया है और साथ ही इनमे से एक निजी अस्पताल मेयो हॉस्पिटल का निरीक्षण मंडलायुक्त के साथ किया जिसमे अस्पताल में तमाम खामियां नजर आयी। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने मीडिया को अवगत कराया कि निरीक्षण और आरोपों के हिसाब से यह पाया गया है कि इलाज में कोताही बरती गई है और प्रथम दृष्टया यह मामला लापरवाही से जुड़ा हुआ है। इसलिए अगले दिन सुबह 10 बजे तक नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है और अगर प्रशासन जवाब से संतुष्ट नहीं होता तो महामारी एक्ट के तहत इन सभी अस्पतालों पर कार्यवाही भी होनी सुनिश्चित है।

फाइव स्टार होटल से महंगे है ये निजी अस्पताल:

इन सभी अस्पतालों में इलाज कराने की फीस इत्यादि पर नजर डाली जाए तो ये अस्पताल किसी फाइव स्टार होटल से भी महंगे नजर आते हैं इन्ही अस्पतालों में मृत हुए संक्रमितों के परिजनों ने उदय बुलेटिन को यह जानाकरी दी कि इन अस्पतालों में इलाज कराना बेहद महंगा है जबकि सुविधाओं के नाम पर महज चाय ब्रेड और दो टाइम का खाना, गर्म पानी, दो बार का फीवर टेस्ट, ऑक्सीजन लेवल टेस्ट और सबसे सस्ता बेड 10,000 से लेकर 20,000 तक दिया जा रहा है। जबकि कई बार तो यह 30,000-80000 रुपये प्रति दिन तक पहुँच जाता है। मृतक के परिजनों ने निजी अस्पतालों को पैसे लूटने बालों का गिरोह और लोगों को मारने वाला कांट्रेक्ट किलर बताया है।

हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव ने भी अपनी कला के जरिये लखनऊ के निजी अस्पतालों पर तंज कसा है:

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उदय बुलेटिन
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