कोरोना और भारत, जंग लंबी जरूर है लेकिन दुष्कर नहीं
कोरोना लोगों मे ख़ौफ़ की तरह बैठ रहा है लेकिन इसको दूसरे तरीके से देखना चाहिए क्योंकि भारत मे कोरोना का प्रसारण भले ही तेजी से फैल रहा हो लेकिन भारतीयों के सामने कोरोना कमजोर जरूर हुआ है।
कोरोना और भारत, जंग लंबी जरूर है लेकिन दुष्कर नहीं
coronavirus in indiaGoogle Image

क्या ये कमजोर कोरोना है?

हालांकि इस बारे में भारत सरकार ने कोई सत्यापित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है लेकिन अगर डॉक्टरों के द्वारा कही गयी बात का अनुसरण करें तो उनके हिसाब से भले ही संक्रमण भारत मे बड़ी तेजी से कम्यूनिटी में फैल रहा हो लेकिन इससे मृत्यु दर बेहद तेजी से कम हुई है और संक्रमित लोगों के ठीक होने का प्रतिशत बेहद तेजी से बढ़ा है। हालांकि इस बात से भी आंखे नहीं मूंदी जा सकती कि इस दौरान भारत मे कोरोना उन लोगों के लिए बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है जो पहले से ही किसी बीमारी जैसे उच्च रक्त चाप, मधुमेह, हार्ट डिजीज, हाइपरटेंशन, लिवर और अन्य किसी आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है। यह कोरोना उस वक्त एक बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आ जाता है।

क्या होगा भविष्य?

हालांकि इस मामले में दुनिया बेहद खुशनसीब है कि कोरोना की वैक्सीन और इसकी काट बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने काफी हद तक सफलता प्राप्त कर ली है या कहे कि वैक्सीन विकसित कर ली गयी है बस उन दवाओं के लगातार परीक्षण चल रहे है, इस दौरान दवाओं के साइडइफेक्ट इत्यादि का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि इसके फायदे और नुकसान का आंकलन हो सके।

भारत मे होते कोरोना प्रसार को लेकर वैज्ञानिकों का एक समूह बेहद पुरानी थ्योरी को लेकर आगे बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार अगर हालात यही रहे और बीमारी का संचरण लगातार बढ़ता रहा तो एक वक्त ऐसा आइये जब यह बीमारी अपना स्वरूप और आक्रमकता छोड़ सकती है। इसे हर्ड इम्यूनिटी शब्द से परिभाषित किया जाता है। आपको बताते चले कि हर्ड इम्यूनिटी वह टर्म है जिसमे किसी बीमारी के अत्यधिक प्रसार के बाद लोगो के अंतर्गत स्वतः इम्यूनिटी बिल्ड होने लगती है कहने का मतलब फिर स्थिति यह हो सकती है कि कोरोना बिल्कुल खांसी जुकाम की तरह आएगा और जाएगा।

हालाँकि इस बारे में सिर्फ संभावना ही लगाई जा सकती है, क्योंकि कोरोना या कोविड 19 की एक सबसे बड़ी खासियत है इसका लगातार रूप और लक्षण बदलना शायद वायरस इतिहास में यही पहला वायरस नजर आता है जो इतनी जल्दी लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है इसे म्यूटेशन कहा जाता है और हर्ड इम्यूनिटी में यही लक्षण सबसे खतरनाक और बाधक बन सकता है।

भारत मे कमजोर क्यों है कोरोना?

भारत मे कोरोना के कमजोर होने का मुख्य कारण है खान पान और जीवनशैली चूंकि भारत के लोगो मे जीवटता बेहद उच्चस्तरीय पाई जाती है खान-पान की बात करे तो भारत के निवासियों में से एक भारी संख्या शाकाहारी लोगों की है जिनमे इम्यूनिटी का स्तर अपने आप बढ़ा हुआ पाया जाता है। साथ ही मसाले जैसे काली मिर्च, दालचीनी, अदरक, सौफ, सोंठ जैसे मसाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को ऊंचा बनाते है वही दूध को सभी उम्र वर्ग के लोगों द्वारा इस्तेमाल करने पर लगभग सभी पोषक तत्वों को मिलने पर कोरोना के दौरान होने वाली परेशानी से बचाता है। साथ भी भारतीय लोगो मे योग करने की आदत जिसमे प्राणायाम इत्यादि शामिल है यह कोरोना से लड़ने के में मजबूत फेफड़ो की वजह से कारगर हथियार बनता है।

कोरोना को हराने के लिए आधारभूत चीजे ही काफी है इस बारे में चिरायु मेडिकल कालेज के अधीक्षक ने जानकारी उपलब्ध कराई।

भारत और दुनिया?

अगर दुनिया के अन्य देशों की तुलना भारत के साथ करते है तो आपको चौकाने वाले आंकड़े मिल सकते है। अगर कोरोना से संक्रमित इटली की बात करें तो यहाँ मरने वालों की संख्या आसमान को छू रही है इसकी कुछ वजह है। अगर इटली के उदाहरण को ले तो यहां पर शराब पीने वालों का प्रतिशत काफी ऊंचा है इटली में औसतन 80 प्रतिशत आबादी शराब का सेवन करती है वह भी 15 वर्ष की उम्र के बाद ही जबकि भारत मे यह औसत 21 प्रतिशत तक ही पहुच पाता है वह भी 21 वर्ष की आयु के बाद वही इटली में औसतन शराब पीने की मात्रा करीब 7 लीटर तक पहुच जाती है जबकि भारत मे यह मात्र 4.5 लीटर तक ही सीमित है। वही अगर उम्र के आंकड़े को देखे तो इटली में बुजुर्गों (60 साल से ऊपर) की संख्या 23 प्रतिशत है जबकि भारत को युवाओं का देश कहा जाता है यहाँ कुलमिलाकर बुजुर्गों की आबादी 8 प्रतिशत तक ही सीमित है।

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उदय बुलेटिन
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