एनसीआरटी भी सस्ता नशा करके इतिहास लिखता है, कहा हमको कुछ पता नही

NCERT के पाठयक्रम में क्या है उसे खुद नहीं पता, RTI में जानकारी मांगने पर कहा हमें नहीं मालूम
एनसीआरटी भी सस्ता नशा करके इतिहास लिखता है, कहा हमको कुछ पता नही
NCERT की इतिहास की 12वीं की किताब में लिखा गया कि शाहजहां और औरंगजेब ने मंदिरों की मरम्मत के लिए पैसे दिए थे Google Image

एनसीआरटी मतलब किताबी बैंक जो देश के अलावा दुनियाभर के कई देशों के शिक्षा पाठ्क्रम तैयार करती है। एनसीआरटी के पाठ्यक्रम की मजबूती का आंकड़ा इससे लगा सकते है कि भारत मे कोई भी कंपटीशन एग्जाम हो सभी लोग हर विषय के लिए एनसीआरटी की किताबें पढ़ने की सलाह देते है। लेकिन अब इसी एनसीआरटी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सारा विवाद इतिहास के एक विषय को लेकर खड़ा हुआ है।

इतिहास के झूठे तथ्य कितने जायज है?

एक कहावत है अगर किसी देश के लोगों को महत्वहीन और गरिमामुक्त बनाना है तो उसके इतिहास को गायब कर दो। भविष्य की पीढियां भी इतिहास को भूल जायेगी और उनका गौरवशाली अतीत हमेशा के लिए गड्ढे में चला जायेगा। कुछ ऐसा ही मामला भारत मे विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने वाली सरकारी संस्था एनसीआरटी की एक किताब को लेकर है जिसमे ऐतिहासिक तथ्य छुपा कर इतिहास के व्यक्ति विशेष को महिमामंडित करने का प्रयास किया गया है लेकिन जब जनता ने इस फैक्ट में बारे में सुबूत मांगे तो एनसीआरटी ने इस मामले पर कुछ भी जानकारी होने से मना कर दिया इस मामले में एनसीआरटी ने बड़े भोलेपन के साथ जवाब दिया कि "हमारी विभागीय फाइलों में इस तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नही है"

आरटीआई में मांगी गई जानकारी:

सारा बवाल एनसीआरटी की बारहवीं की एक इतिहास की किताब को लेकर खड़ा हुआ है दरअसल एनसीआरटी की किताब में यह दावा किया गया था कि "भारत मे युद्धों की स्थिति से जो मंदिर नष्ट हो गए थे उनके जीर्णोद्धार और पुनःनिर्माण के लिए शाहजहां और औरंगजेब के द्वारा ग्रांट (धनराशि) जारी की गई थी" इस वाकये को एनसीआरटी ने अपनी बारहवीं की इतिहास की किताब {भारतीय इतिहास भाग 2} के पेज 234 के दूसरे पैराग्राफ में वर्णित किया है। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए शिवांक वर्मा नाम के व्यक्ति ने सूचना के अधिकार के तहत एनसीआरटी से जवाब मांग लिया, शिवांक ने आरटीआई में सीधे सादे जवाब मांगे की क्या इस किताब में जो भी लिखा हुआ है उसके कुछ पुख्ता प्रमाण है? और अगर शाहजहां और औरंगजेब ने ऐसे किसी मंदिर का पुनः निर्माण कराया तो उनकी सूची प्रदान कराई जा। सवालों में फेर में न पड़ते हुए एनसीआरटी ने बड़े मासूमियत से जवाब दिया कि उनके पास न तो ऐसे कोई सुबूत है न ही कोई साक्ष्य।

आखिर अब बवाल क्यों?

यहां आपको बताते चले कि यह आरटीआई बीते साल 2020 के नवंबर से जुड़ा हुआ है, लेकिन अचानक इस पर बवाल क्यों होने लगा। दरअसल इस आरटीआई विवाद पर बीते दिनों में राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में एक मीटिंग आयोजित की गई थी। उसमे एनसीआरटी ने सभी किताबी ऐतिहासिक भूले सुधारने की बात कही गयी है और इसी चक्कर मे पुरानी आरटीआई को लेकर बवाल खड़ा होने लगा।

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उदय बुलेटिन
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