BCG vaccine against coronavirus
BCG vaccine against coronavirus|Google
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क्या टीबी का टीका कोरोना में रामबाण साबित होगा ? 

BCG का टीका हो सकता है कोरोना में कारगर, हो रही है रिसर्च

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

इन दिनों कोरोना के अंत के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने जी जान लगा रखा है, ऐसे में अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक नई थ्योरी सामने आयी है। वैज्ञानिकों के अनुसार टीबी का 100 साल पुराना टीका कोरोना की जंग में मददगार साबित होगा

क्या कहती है रिसर्च :

अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम की माने तो कोरोना के इलाज के लिए करीब एक सदी पुरानी वैक्सीन बहुत हद तक प्रभावी होगी। शायद यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने बच्चों को जन्म के बाद दिये जाने वाले टीबी के बेहद प्रभावी टीके "बीसीजी" पर भरोसा जताया है। वैज्ञानिको की माने तो बीसीजी का टीका उन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता अन्य दूसरे लोगों की क्षमता से ज्यादा मजबूत कर देता है जिन्होंने इस टीके को नहीं लगवाया है।

आखिर है क्या ये बीसीजी :

बीसीजी बोले तो बैसिलस कैलमेट-गुएरिन। मतलब में मत पड़िये नाम काफी है ये वैक्सीन या टीका बच्चों में जन्म के बाद से ही लगाया जाता है ताकि बच्चे टीबी जैसी गंभीर बीमारी के साथ लड़ सके और यह सिर्फ लड़ सकने तक सीमित नहीं है बल्कि यह टीका अपनी खोज के बाद से पूरी दुनिया मे प्रचलित हुआ और लगभग हर देश मे लगाया जाने लगा।

इस टीके के लगाने के बारे में यह नियमावली है कि इस टीके को शिशु के जन्म के 6 माह बाद लगाया जाता है। इस टीके में और कुछ नहीं बल्कि एक प्रकार का बैक्टेरिया ( मायकोबैक्टेरियम बोविस) काफी हद तक निष्क्रिय करके डाल दिया जाता है।

रिश्ते में यह बैक्टीरिया टीबी फैलाने वाले बैक्टेरिया का छोटा भाई ही साबित होता है। मने टीबी के बैक्टीरिया से थोड़ा कम खतरनाक। टीके को बनाते वक्त ही टीके के बैक्टेरिया को इस तरह से निष्क्रिय किया जाता है ताकि उससे सही स्वास्थ्य वाला शिशु बीमार न हो। लेकिन इस बैक्टेरिया के शरीर मे जाते ही शरीर बैक्टेरिया की पहचान करके खुद रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है।जिससे उसे भविष्य में टीबी के बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता प्राप्त हो जाती है। और वह टीबी से बचाव कर सकता है। आपको यहां बताते चले कि टीबी के बचाव में प्रयुक्त बीसीजी का टीका अपने भारत मे भी बनता है जिसकी कीमत एक सौ रुपये से भी कम है।

कौन है रिसर्चर :

अमेरिका में एक संस्थान है नाम है न्यूयार्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी। इस संस्थान के बायोलॉजी की उप शाखा बायोमेडिकल के सहायक प्रोफेसर गोंजालो ओटाजू ने अपनी टीम के साथ इस विषय पर रिसर्च की और पाया कि बीसीजी का टीका इम्युनिटी बढ़ाने में बेहद कारगर है। उन्होंने यह भी कहा कि बीसीजी सांस से जुड़ी हुई अन्य समस्याओं में भी काफी कारगर पाया गया है। और यह कोरोना से भी लड़ने में काफी हद तक मददगार होगा। हालाँकि प्रोफेसर ने यह भी कहा कि इस प्रकार से यह नहीं कहा जा सकता कि यह कोरोना का पूर्ण रूप से इलाज है। इसका व्यापक अध्य्यन अभी भी चल रहा है।

रिसर्च के अपने दावे :

रिसर्च में यह कहा गया कि जिन देशों में बच्चों को बचपन मे बीसीजी के टीके दिए गए थे वहाँ म्रुत्यु दर बेहद कम है लेकिन जहां बीसीजी के टीकाकरण को बंद कर दिया गया वहाँ मृत्युदर अपने उफान पर है।

टीकाकरण वाले देश : ब्राजील, चीन और जापान

बिना टीकाकरण वाले देश : अमेरिका , इटली और नीदरलैंड

रिसर्च में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अमेरिका में पहले तो बीसीजी के टीके लगाए गए थे लेकिन बाद में इन्हें लगाने पर कोई विशेष गौर नहीं किया गया और आखिर में इन्हें बंद ही कर दिया गया। शायद यही कारण है कि इन देशों में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या में भारी इजाफा होता जा रहा है और मृत्यु दर लगातार बढ़ रही है।

भारत का क्या है सीन :

भारत मे बीसीजी के टीके लगने तो 1948 में ही शुरू हो गए थे लेकिन 1962 की शुरुआत से शिशु के 6 माह का होने पर यह अनिवार्य कर दिया गया था। तो इस प्रकार से भारत इस मामले में अभी भी अव्वल है। हालांकि इस पर यूरोप के तमाम देश हज़ारों की संख्या में लोगों पर टेस्टिंग कर रहे हैं। देखते है इसके नतीजे कैसे आते है संभव है इसके सकारात्मक टेस्ट रिजल्ट आने पर भारत इसे तुरंत प्रयोग में लाना शुरू करेगा।

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उदय बुलेटिन
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