Brahmin politics in Uttar Pradesh
Brahmin politics in Uttar Pradesh|google Image
टॉप न्यूज़

सपा-बसपा के निशाने पर ब्राह्मण, सत्ता सुख के लिए ब्राह्मणों को रिझाने की पूरी कोशिश

दरअसल उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण सदैव से किंग मेकर रहे है इसीलिए राजनैतिक पार्टियों का मुख्य उद्देश्य अब ब्राह्मणों को अपनी तरफ खींचने का है। देखना यह होगा कि ब्राह्मण समुदाय किसके पल्ले आता है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बसपा सुप्रीमो ने कहा परशुराम जी की मूर्ति हम बनवाएंगे:

अब इसे राजनीति का रोना कहा जाए या कुछ और अब उत्तर प्रदेश में 2022 में आने वाले प्रादेशिक चुनाव की आहट आने लगी है और नेताओं द्वारा वोट बैंक मजबूत करने की शुतुआत की जा चुकी है इसी क्रम में हमेशा से दलितों की राजनीति करने वाली नेता बहिन मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पार्टियों ने ब्राह्मणों को रिझाने का काम शुरु कर दिया है, जिसके ताजा रुझान आने शुरू हो गए हैं।

इस मामले में सबसे पहले सपा के नेताओं के द्वारा बयान आने शुरू हुए जिसमें सपा नेताओं द्वारा ब्राह्मण शिरोमणि भगवान परशुराम जी की 108 फिट ऊंची प्रतिमा के साथ स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम और अमर सेनानी मंगल पांडेय जी की प्रतिमाओं को बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर बसपा सुप्रीमो ने कटाक्ष करते हुए सपा की इस घोषणा को मात्र एक झांसा देने वाला झूठा बयान बताया है।

बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रेस रिलीज जिसमें ब्राह्मणों के आराध्य और ब्राह्मण कुल शिरोमणि भगवान परशुराम की प्रतिमाएं और अन्य स्थल बनाने का लक्ष्य रखा है।

मायावती ने यह भी बताया कि जो सपा भगवान परशुराम जी की प्रतिमा लगाने की बात कर रही है वह केवल पक्ष साधने की बात है।

आखिर क्यों है ब्राह्मण महत्वपूर्ण ?

सबसे पहले हमें वोट प्रतिशत पर नजर डालनी होगी दरअसल उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मणों का वोट शेयर लगभग 11 प्रतिशत (आकड़ो के अनुसार) से भी ज्यादा है और हमेशा से ब्राह्मण किसी भी पार्टी को सत्ता तक पहुँचाने का मजबूत स्तंभ रहे हो फिर चाहे कांग्रेस का लंबे वक्त तक सत्ता में बने रहना हो या फिर बसपा का सतीश मिश्रा के नेत्रत्व में चुनाव लड़कर सत्ता तक पहुँचाना हो।

हालांकि सपा इस मामले में सभी से पीछे रही है क्योंकि एक वक्त के बाद से ब्राम्हणों के साथ-साथ लगभग एक बहुत बड़े वर्ग का समर्थन भाजपा के साथ हो लिया है जिसकी वजह से के सपा को यह लगता है कि अगर वह ब्राह्मणों को साध लेती है तो काम काफी आसान होगा और इस मामले में घी का काम कानपुर के बिकरू गांव में हुए पुलिस हत्याकांड ने किया दरअसल इस मामले में ज्यादातर आरोपी ब्राम्हण समुदाय से थे और सपा ने इस मौके को भुनाना बेहतर समझा।

शायद यही वजह है कि बसपा जो हमेशा से दलित जातिगत राजनीति करती आई है उसे हर हाल में ब्राह्मणों का वोट चाहिए होगा। सनद रहे कि किसी को कोई आश्चर्य तब भी नहीं होगा जब कांग्रेस द्वारा ब्राह्मण पार्टी होने का दावा किया जाएगा। हालाँकि भाजपा इस मामले में थोड़ी आश्वस्त नजर आती है। लेकिन यह भी सच है बिकरू कांड भले ही थोड़ी मात्रा में पार्टी को चोट पहुंचाए लेकिन चोट का मिलना तय है।

उदय बुलेटिन के साथ फेसबुक और ट्विटर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com