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क्या सच में रूपए पर माता लक्ष्मी की तस्वीर छापने से सुधर जाएगी उसकी हालत ?

ये बात तो हम सभी जान गए हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति अभी सही नहीं चल रही है ऐसे में इसे सुधारने के बजाय भाजपा नेता ने जो बयान दिया वो वाकई में चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहा है।

Puja Kumari

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आजकल केंद्र सरकार लगातार किसी न किसी मुद्दे को लेकर घिरी ही रह रही है। कभी CAA तो कभी NRC को लेकर लेकिन अभी ये मामला शांत भी नहीं हुआ था कि एक और नया बवाल खड़ा हो गया है। ऐसे में ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा भाजपा पार्टी का ग्रह-नक्षत्र सही नहीं चल रहा है तभी तो एक-एक करके सारी समस्याएं खड़ी हो रही है।

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हाल ही में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बयान दिया जिसे लेकर खूब बातें हो रही है। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा की अगर करेंसी नोट पर माता लक्ष्मी की तस्वीर छपेगी तो रुपये की स्थिति सही हो सकती है। यही नही अपनी बात को सही साबित करने के लिए उन्होंने इंडोनेशिया के करेंसी पर छपे भगवान गणेश को तस्वीर का भी तर्क दिया।

उन्होंने कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता है इसलिए मेरा मानना है कि रुपये की हालत अगर सुधारनी है तो हमें इसपर माता लक्ष्मी की तस्वीर को छापना चाहिए। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी नेता के कहने से करेंसी पर तस्वीर बदली जा सकती है? आखिर ये कौन तय करता है कि करेंसी पर किसकी तस्वीर होनी चाहिए।

भारतीय करेंसी पर किसकी तस्वीर छपेगी, कौन लेता है निर्णय ?

अब ये सबसे अहम प्रश्न है जो काफी कम लोगो के दिमाग मे ही आया होगा और अगर आया भी होगा तो हर किसी को इसका जवाब नहीं मिल पाया होगा। जैसा की हम सभी देखते आ रहे है कि पिछले कई वर्षों से भारतीय करेंसी पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपती आ रही है। खास बात तो ये है कि अन्य देशों की तरह भारत में भी करेंसी जारी करने अधिकार सिर्फ सेंट्रल बैंक यानी कि RBI को ही मिला है। लेकिन यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि 1 रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है।

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आंकड़ों से जाने करेंसी का इतिहास

पहली बार साल 1949 में भारत सरकार ने 1 रूपए का नया नोट जारी किया। आजादी मिलने (1945 ) व गणतंत्र राष्ट्र (1950) में होने बाद से ही नोटों पर तस्वीर को लेकर विचार शुरू हो चुके थे। शुरुआत में माना गया कि अब नोटों पर ब्रिटानी राजाओं की जगह महात्मा गांधी की तस्वीर लगाई जाए जिसके लिए सारी रूपरेखा भी तैयार कर ली गयी थी लेकिन अंतिम समय में सहमति इस बात पर बनी की महात्मा गांधी की जगह अशोक स्तंभ का चिन्ह लगाया जाए।

बात करें साल 1950 की यानी कि भारत के गणतंत्र राष्ट्र होने वाले साल की तो यह पहली बार था जब भारत में 2, 5, 10 और 100 रुपए के नोट जारी किए गए, इन नोटों के डिजाइन में ज्यादा अंतर नहीं था लेकिन रंगों के मामले में ये भिन्न थें।

साल 1953 की बात करें तो इस दौरान करेंसी पर हिंदी को ज्यादा प्राथमिकता दी गयी जिसके बाद साल 1954 में 1000, 5000 व 10,000 रुपए के नए नोट जारी किए गए लेकिन कुछ ही सालों बाद यानी कि साल 1978 में इन नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया यानी कि इस साल इन नोटों की नोटबन्दी हुई।

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साल 1969 में जब महात्मा गांधी का 100वां जन्मदिन आया तो उस दौरान पहली बार इनकी तस्वीर भारतीय करेंसी पर छापी गयी जिसमें गांधी जी को बैठे हुए दर्शाया गया था। इसके बाद साल 1972 में पहली बार RBI ने 20 रुपये का नोट जारी किया और फिर 1975 में 50 रुपए का नोट जारी हुआ। 1980 में नई सीरीज वाले नोट जारी किए गए जिनमें पुरानी तस्वीर वाले हटकर भिन्न-भिन्न नई तस्वीरों ने अपनी जगह बना ली।

इस बीच यह भी देखने को मिला कि देश की अर्थव्यवस्था बेहद ही तेजी से आगे बढ़ रही थी और लोगों की खरीदारी भी बढ़ने लगी थी। इसी को ध्यान में रखकर RBI ने पहली बार 500 के नोट जारी किए जिसपर महात्मा गांधी की तस्वीर थी। आगे चलकर इन नोटों में कई सारे बदलाव भी किए गए ताकि जो लोग देख नहीं सकते हैं (नेत्रहीन) वो भी इसे आसानी से समझ सकें।

इन सभी के बाद भारतीय मुद्रा में दूसरा सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला साल 2016 के नवंबर में, जब महात्मा गांधी सीरीज वाले 500 व 1000 रुपए के सभी नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया यानी एक बार फिर से नोटबन्दी हुई और इस दौरान 2000 का नया नोट जारी क्या गया जिसमें भी महात्मा गांधी की ही तस्वीर है।

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