Scam in Banda Medical College
Scam in Banda Medical College|Google
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बाँदा मेडिकल कालेज के प्राचार्य की रिश्वतखोरी का नया कारनामा।

पहले स्वास्थ्यकर्मियों का वेतनमान सिर्फ रिश्वत पाने के लिए कम किया, अब नौकरी छीन कर हाँथ पैर तोडने की धमकी दे रहे है।  

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

क्या है मामला :

मामला सीधे-सीधे स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा हुआ है। दरअसल बाँदा में पिछले कुछ वर्षों से राजकीय मेडिकल कालेज संचालित है जिसमे मंडल से आने वाले तमाम रोगियों का इलाज किया जा रहा है। राजकीय मेडिकल कालेज के संचालित होने के समय से ही यहाँ नर्सिंग स्टाफ आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखा गया था जिस पर वर्तमान मेडिकल कालेज प्रचार्य की मनमानी बरती जा रही है। वर्तमान प्राचार्य के पद सम्भालते ही इसमे रिश्वतखोरी और कमीशन का खेल शुरू हो गया था। जिसको लेकर नर्सिंग स्टाफ और प्राचार्य के बीच कई बार नोंकझोंक हो चुकी है।

क्या कहते है नर्सिंग स्टाफ के लोग :

नर्सिंग स्टाफ की माने तो सबसे पहले मेडिकल कालेज में जिले में संचालित निजी हॉस्पिटल के मालिक की ही प्राइवेट कंपनी (अवनी परिधि एनर्जी एंड कमन्यूकेशन प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता कराई गई थी जिसमें सरकार द्वारा करीब 28000 रुपये प्रतिमाह कंपनी को दिए जाते थे।लेकिन कंपनी द्वारा कमीशनखोरी करके इसमें बहुत बड़ी कटौती करके कर्मचारियों को मात्र 21-22 हजार रुपये ही दिए जाते रहे है।

वर्तमान में इन रुपयों में कटौती करके इसे मात्र 8000 तक ही सीमित कर दिया गया है जिसको लेकर नर्सिंग स्टाफ की नाराजगी थी। यही नहीं नर्सिंग कर्मचारियों के अनुसार उनकी सैलरी भी पिछले चार माह से नहीं दी गयी है।

क्या हुआ है खेल :

सूत्रों की माने तो वर्तमान में मेडिकल कालेज सेवा दे रही आउट सोर्सिंग कंपनी और पुरानी अवनी परिधि कंपनी तथा प्रचार्य के बीच एक बहुत बड़ी पैसो की डील हुई है जिसके तहत साजिशन अवनी परिधि ने सभी 26 नर्सिंग स्टाफ को नौकरी से बाहर कर दिया है और जब नर्सिंग स्टाफ ने मेडिकल कालेज जाकर इस सम्बंध में बात की तो प्राचार्य ने धमकाते हुए हाँथ पैर तुड़वाने की धमकी दे डाली।

विधायक और सांसद दे चुके है दखल :

ऐसा नहीं की ये मामला बेहद नया है बल्कि इस मामले में जिले के सांसद आर के पटेल और सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी भी इस मामले में हस्तक्षेप कर चुके हैं लेकिन प्रचार्य ने रिश्वतखोरी की सीमाएं इस कदर लांघ ली कि उनपर भी पुलिस में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। हालाँकि पहले भी विधायक और सांसद इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने का निर्देश दे चुके थे लेकिन कमीशनखोरी की राशि ने प्रचार्य और आउटसोर्सिंग कंपनियों के द्वारा इस मामले को लगातार उलझाए रखा।

भर्ती करते समय ली गयी थी भारी रकम :

मामला नौकरी से जुड़ा हुआ है लेकिन जब नर्सिंग स्टाफ की नौकरी चली गयी तो उन्होंने इस बाबत बिना नाम छापने की शर्त पर जानकारी दी कि जब अवनी परिधि ने उन्हें नौकरी दी थी तो सभी नर्सिंग स्टाफ से एक साल का वेतन रिश्वत के तौर पर एकमुश्त लिया था।

स्थानीय लोगों की माने तो इस मामले में सरकार द्वारा उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए तथा अवनी परिधि, प्रचार्य और अन्य आउटसोर्सिंग कंपनी जो इस वक्त सेवाएं दे रही है उनके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए।

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उदय बुलेटिन
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