काशी महाकाल एक्सप्रेस
काशी महाकाल एक्सप्रेस|Google
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सफर शुरू करने से पहले ही विवादों में घिरी ‘काशी महाकाल एक्सप्रेस’

एक तरफ जहां शिवभक्तों के लिए कल पीएम मोदी ने काशी महाकाल एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई वहीं दूसरी ओर यह ट्रेन अपना सफर शुरू करने से पहले ही विवादों में आ गई।

Puja Kumari

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कल का दिन दिल्लीवासियों के लिए ही नहीं बल्कि वाराणसी वासियों के लिए भी खास साबित हुआ। एक तरफ जहां दिल्ली में केजरीवाल तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर शपथ ले रहे थें वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पधार रहे थें।

वैसे एक बात और बता दें कि पीएम मोदी का वाराणसी में ये 22 वां दौरा था। हालांकि पीएम मोदी यहां जब भी आते हैं करोड़ों की सौगात लेकर आए हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ कई योजनाओं का शिलान्यास हुआ तो कई अद्भुत चीजों का उद्घाटन भी पीएम मोदी ने किया। हालाँकि इन सबमें अगर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है तो वो है 'काशी महाकाल एक्सप्रेस'

धार्मिक नगरी वाराणसी के लिए ये बहुत बड़ी सौगात है जो पीएम मोदी ने यहां के लोगों को कल दिया। अब तक तो आप सभी जाने गए होंगे की काशी महाकाल एक्सप्रेस तीसरी प्राइवेट ट्रेन है जो की वाराणसी से इंदौर की ओर जाएगी और 3 मुख्य ज्योतिर्लिंगों का दर्शन कराएगी।

पीएम मोदी ने कल इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई लेकिन यात्रियों के लिए 20 तारीख से इसकी सेवा उपलब्ध होगी। लेकिन क्या आपको पता है कि यह ट्रेन अपनी पहली सफर पर निकलने से पहले ही विवादों में छा गई।

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विवादों में क्यों घिरा 'काशी महाकाल एक्सप्रेस'

आपको भी लग रहा होगा कि आखिर अभी तक यह ट्रेन अपने पहले सफर पर भी नहीं निकली और इससे पहले हैं इसे लेकर क्यों विवाद हो गया। दरअसल धार्मिक दृष्टि से शुरू किये गए इस ट्रेन को आईआरसीटीसी ने भरपूर प्रयास किया है कि इसमें सफर करने वाले लोगों को धार्मिक यात्रा का आनंद मिल पाए।

इसके लिए भजन कीर्तन से लेकर इस ट्रेन में मौजूद कर्मचारियों की वेशभूषा भी उसी आधार पर निर्धारित किया गया है लेकिन बवाल इस बात में नहीं हुआ बल्कि तब हुआ जब पता चला कि इस ट्रेन के B5 बोगी की सीट नंबर 64 को भगवान शिव के लिए रिजर्व किया गया है।

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क्या हो रही है आपत्ति

दरअसल इस ट्रेन में जो शिव जी के लिए बर्थ रिजर्व किया गया है वो को लोगों को खटक रहां है। जी हां क्योंकि इसे लेकर काफी सारी बातें होने लगी हैं सबसे पहले तो इस सवाल को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने खड़ा किया कि ट्रेन एक पब्लिक प्रोपर्टी है इसमें किसी विशेष जाति या धर्म को स्थान नही दिया जा सकता। काशी महाकाल एक्सप्रेस में सीट नंबर 64 को भगवान शिव के लिए रिजर्व करना हमारे संविधान की प्रस्तावना के भी खिलाफ है।

संविधान में निहित (भारतीय संविधान में सन 1976 में जो 42वां संशोधन हुआ था उसमें संविधान की प्रस्तावना में संशोधन किया गया था जिसमें तीन नए शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया था) जिसके अनुसार ओवैसी का कहना है कि ट्रेन में मंदिर का निर्माण करना सही नहीं है।

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हालांकि इस ट्रेन में जो भगवान शिव का बर्थ रिजर्व किया गया है, उसे लेकर रेलवे ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि यह एक धार्मिक ट्रेन है जो कि विशेष रुप से भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को दर्शन कराएगा। ऐसे में लोगों को सफर के दौरान श्रद्धा व आस्था जैसी भावनाएं बनी रहे इसलिए ऐसा किया गया है। इसका मकसद किसी भी धर्म को चोट पहुंचाना व बढ़ावा देना नहीं है।

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उदय बुलेटिन
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