BCG वैक्सीन
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चर्चा में आया BCG वैक्सीन, क्या कोरोना को हरा सकता है यह टीका ?

कोरोना संकट से छुटकारा पाने के लिए लोग आए दिन कुछ न कुछ अच्छी खबर की उम्मीद पाले हुए हैं ऐसे में BCG वैक्सीन की खबर सुनते ही हर कोई खुश हो गया पर ये कितना सही है आइए जानते हैं

Puja Kumari

Puja Kumari

कोरोना संक्रमण जिस तेजी से दुनियाभर में अपनी हद बढ़ाते जा रहा है वह यक़ीनन बेहद भयावह है, ताजा आंकड़ों की बात करें तो कोरोना की वजह से अब तक 27 लाख से भी ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि तक़रीबन 2 लाख लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। अमेरिका, स्पेन, इटली, जर्मनी आदि देश अभी भी इसके प्रकोप में टॉप स्थान पर हैं और ऐसे में अगर भारत की तुलना की जाये तो हम काफी हद तक सेफ हैं।

मगर ये समझने की गलती जरा भी नहीं कीजियेगा की अमेरिका, इटली जैसे विकसित देशों की तुलना में हमारे देश में कोरोना के मरीज कम हैं तो हम इससे सेफ हैं, क्योंकि जरा सी लापरवाही पूरी तस्वीर बदल सकती है।

भारत की आबादी के अनुसार देखा जाये तो सही वक़्त पर सही फैसला लेकर ही कोरोना पर स्थिति को नियंत्रण में रखा गया है क्योंकि हमारे देश में अन्य उन्नत देशों के मुकाबले ना ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मौजूद हैं और अभी तक इसकी कोई दवा भी इजाद नहीं हो पाई है।

तमाम देश के वैज्ञानिक इसकी दवा बनाने में जुटे हुए हैं और लगातार नए नए प्रयोग कर रहे हैं मगर अभी तक किसी को भी कोई खास सफलता नहीं मिल पायी है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक खबर काफी तेजी से ट्रेंड कर रही है जिसमें BCG वैक्सीन के बारे में बात की जा रही है। कहा ये भी जा रहा है कि जिन भी देशों में इस वैक्सीन का इस्तेमाल होता रहा है वहां कोरोना संक्रमण का खतरा कम है या कम होते जा रहा है।

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क्या है BCG टीका और किस लिए किया जाता है इसका प्रयोग

BCG जिसका पूरा नाम 'बेसिलस कामेट गुएरिन' है और इसका इस्तेमाल शिशु के जन्म के बाद 6 माह के भीतर लगाया जाता है। इस वैक्सीन का प्रयोग मुख्य रूप से टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) तथा सांस संबंधी बीमारी की रोकथाम के लिए लगाया जाता है। यह भी सच है कि पहली बार इस वैक्सीन का इस्तेमाल वर्ष 1920 में किया गया था।

वैज्ञानिकों के अनुसार बताया जाता है कि इस वैक्सीन में पौटेशियम, सोडियम तथा मैग्नीशियम साल्ट, साइट्रिक एसिड और ग्लिसरॉल का समावेश होता है। जब भी इसका टीका बनाया जाता है उस दौरान वैज्ञानिक पद्यति से इसके एक्टिव बैक्टीरिया की शक्ति को कम कर दी जाती है ताकि इसका दुष्प्रभाव ना पड़े और यह स्वस्थ लोगों में बीमारी न फैला पाए।

इस तरह चर्चा में आया BCG वैक्सीन

असल में कोरोना का आतंक इस वक़्त सबसे ज्यादा अमेरिका में व्याप्त है और वहां के वैज्ञानिक लगातार कोई ना कोई प्रयोग कर रहे है और यह पाया गया कि जिन जिन क्षेत्रों में BCG का टीका दिया गया है वहां आश्चर्यजनक रूप से कोरोना वायरस का संक्रमण कम देखने को मिला है। इसी दौरान यह भी कहा जा रहा है कि जिन देशों में BCG के टीके दिए जाते हैं वहां कोरोना संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।

तो क्या भारतीयों को COVID-19 से बचा रहा BCG का टीका

ध्यान देने वाली बात तो ये है कि इटली, अमेरिका, नीदरलैंड जैसे विकसित देशों में इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर कोई यूनिवर्सल पॉलिसी लागू नहीं है और इन देशों में कोरोना का प्रकोप भी काफी ज्यादा है। वहीं दूसरी तरफ भारत उन देशों में शामिल है जहाँ करीब 70 वर्षों से भी ज्यादा समय से BCG वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाता रहा है और नतीजा सामने हैं।

हालांकि इस तरह के परिणाम के बाद भी किसी भी देश के वैज्ञानिक ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि BCG वैक्सीन ही कोरोना संक्रमण की दवा है। यहाँ तक कि इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने भी अभी तक इसके परिणाम पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।

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WHO ने भी BCG वैक्सीन पर दिए संकेत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जो कि लगातार कोरोना पर अपडेट दे रहा है और इसकी दवा बनाने के सम्बन्ध में हो रहे शोध के बारे में विश्व को अवगत करता रहता है। ऐसे में जब BCG वैक्सीन को लेकर काफी बातें चल रही है तो इस दौरान WHO ने भी यह साफ़ कर दिया है की COVID-19 के इलाज को लेकर इस वैक्सीन पर दो क्लिनिकल टेस्ट जारी हैं. जब इनपर शोध पूरा हो जायेगा तो इसके निष्कर्ष पर जांच कर फैसला लिया जायेगा।

मांग बढ़ने पर हो सकती है ये नयी समस्या

चूँकि हर देश कोरोना से ग्रस्त है और ऐसे में कहीं से भी जरा सी कोई उम्मीद की किरण दिख रही है तो हर कोई बस उसे ही पाने की कोशिश में लग जा रहा है। अभी हाल ही में HCQ दावा को लेकर माहौल काफी गरम हो गया था जबकि वो भी कोरोना की कोई सटीक दवा नहीं है। ठीक वैसा ही अब BCG वैक्सीन के साथ होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि अगर कोरोना संकट से उबरने के लिए इस वैक्सीन की डिमांड बढ़ गयी तो उस स्थिति में नवजात शिशुओं को तपोदिक से बचाव में कठिनाई आ सकती है।

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उदय बुलेटिन
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