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Withdraw Babri cases’: Letter to PM comes 72 hrs within Ayodhya verdict
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बाबरी विध्वंस संबंधी मामले वापस ले सरकार : हिंदू महासभा

हिन्दू महासभा ने 1992 में मारे गए कार सेवकों को ‘शहीद’ का दर्जा दिए जाने की मांग भी की है।

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अयोध्या जमीनी विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के 72 घंटे बाद अखिल भारत हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाबरी मस्जिद को गिराने को लेकर कारसेवकों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को वापस लिए जाने की मांग की है

अखिल भारत हिंदू महासभा ने 1992 में मारे गए कार सेवकों को 'शहीद' का दर्जा दिए जाने की मांग भी की है। हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने गृहमंत्री अमित शाह व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजा है।

12 नवंबर को लिखे गए पत्र में कहा है:

"जब यह स्पष्ट हो गया है कि रामलला का मंदिर क्षेत्र (अयोध्या में) निर्विवादित है, तो यह भी स्पष्ट हो गया है कि इसके ऊपर बना गुंबद किसी मंदिर का गुंबद था, किसी काल्पनिक बाबरी मस्जिद का नहीं। इस वजह से बाबरी मस्जिद को गिराने का आपराधिक मामला राम के उपासकों द्वारा अनजाने में किया गया कार्य था, जिन्होंने अनजाने में मंदिर के शिखर को गिरा दिया। मैं सरकार से उन लोगों के खिलाफ लंबित मामलों को वापस लेने व मामलों को खत्म करने का आग्रह करता हूं।"
चक्रपाणि ने 1992 में कार सेवा के दौरान मारे गए कार सेवकों के लिए 'शहीद' के दर्जे की मांग की।

Hindu Mahasabha Letter
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लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 5000 कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद के गुंबदों को 6 दिसंबर, 1992 को गिरा दिया था। इससे पहले, 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या में विवादित स्थल के पास कार सेवा के दौरान कार सेवकों पर गोलियां चलाई गईं, इसमें कई की जान चली गई। इसको लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुआ था।

इतना ही नहीं, महासभा अयोध्या में एक पट्टिका पर मृत कार सेवकों के नाम अंकित कराना चाहती है। पत्र के अनुसार, यह मांग की गई है कि सभी जीवित व्यक्तियों, जिन्होंने राम मंदिर के निर्माण के लिए कार सेवा में भाग लिया उन्हें 'धार्मिक सेनानी' पुकारा जाए।

हिंदू महासभा ने तीन शीर्ष भाजपा नेताओं को लिखे अपने पत्र में उनके लिए मासिक स्टाइपेंड देने का आग्रह किया है।