पतंजलि की कोरोनिल किट, मायने और भविष्य, बदल सकता है चिकित्सा जगत का नजरिया
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पतंजलि की कोरोनिल किट, मायने और भविष्य, बदल सकता है चिकित्सा जगत का नजरिया

काढ़ा पीने के लिए लोगों से अपील करने वाले आयुष मंत्रालय को बाबा रामदेव की "करोनिल" पर विश्वास नहीं?

आयुर्वेद विश्व की प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों में से सबसे पुरानी है इस पद्यति के नुकसान बिल्कुल नहीं है अगर इसका समुचित प्रयोग और देखरेख में किया जाये तो असाध्य रोगों में आयुर्वेद और योग का समिश्रण सबसे ज्यादा कारगर है और इस वक्त कोरोना जैसी महामारी में "कोरोनिल" किट का आना किसी चमत्कार से कम नहीं है। अगर यह दवा किये गए दावों को पूरा कर पाती है तो पूरी दुनिया भारत के ज्ञान का लोहा मानेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लांच की थी करोनिल:

दरअसल पतंजलि समूह द्वारा लंबे वक्त से अश्वगंधा जैसी दवा को कोरोना से लड़ने में सहायक बताया जा रहा था लेकिन इसके बाद बिना रिसर्च के दावा करने की वजह से पतंजलि समूह को बैकफुट पर आना पड़ा था लेकिन अब पतंजलि समूह वैज्ञानिक सुबूतों के साथ वापस आया है और इस बार पतंजलि समूह के साथ खड़ा था निम्स जयपुर। पतंजलि योगपीठ के साथ दिव्य फार्मासूटिकल ने आयुर्वेदिक समिश्रण से बनी हुई दवा "कोरोनिल" का रहस्योद्घाटन किया जिसकी मदद से कोरोना को 3 से 7 दिन में हराने के दावा किया गया। हालांकि इसमें कोई एक दवा ही शामिल नहीं है बल्कि एक दवाओं का सेट है। "कोरोनिल" नामक दवा जिसमे अश्वगंधा, तुलसी स्वरस और गिलोय के स्वरस के साथ अन्य अवयव शामिल है। इसके साथ ही एक और दवा है जिसका नाम श्वासारी प्रवाही और तीसरे क्रम में आती है अणु तैल नाम की दवा जिसके नाक के द्वारा डाला जाना बताया जा रहा है।

तीनो दवाओं के कार्य और क्षमता:

  • कोरिनिल: पतंजलि और दिव्य फार्मेसी के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार कोरिनिल दवा अपने अंदर समाहित की गयी अश्वगंधा और गिलोय कोरोना वायरस के प्रभाव को न सिर्फ कम करती है बल्कि इसे प्रबल तरीके से रोकती है साथ ही कोरोना के ताज से उत्पन्न होने वाले प्रोटीन को मानव शरीर मे पाए जाने वाले प्रोटीन से मिलने में रुकावट बन जाती है। जिससे मनुष्य को कोरोना जनित समस्याओं में उलझना नहीं पड़ता और इस दवा के प्रभाव से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता अचानक से बूस्ट होती है।

  • श्वासारि: यह दवा भी कोरोनिल की तरह वटी अर्थात गोलियों में है इसका मुख्य कार्य रेस्पेटरी सिस्टम अर्थात श्वसन प्रणाली को चुस्त दुरुस्त करना होता है। यह दवा कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंग फेफड़ो में कोरोना के संक्रमण से लड़ती है। सांस लेने और कफ बाहर रखने में कार्यकुशलता बनाये रखती है। कफ को सूखा नहीं होने देती जिससे फेफड़ो में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में बनी रहे।

  • अणु तेल: इस तेल को नासिका (नाक के द्वारा) लेने की वजह से श्वसन तंत्र में स्नेहकता बनी रहती है और सांस लेने में श्वास नली आपस मे चिपक कर उलझन नही पैदा करती।

  • मूल्य: अगर इस दवा के मूल्य की बात करे तो योगगुरु बाबा रामदेव और बाल कृष्ण ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरी कोरोना किट जिसमे तीनोँ दवाएं शामिल है इसका मूल्य करीब 535 रुपये के आस-पास होगा। बाबा रामदेव ने यह भी आश्वासन दिया है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को यह दवा मुफ्त मुहैया कराई जाएगी।

इस दवा के आने के बाद चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। लेकिन भारत के लोग एक आशा और उम्मीद के साथ पतंजलि की तरफ देख रहे है वहीँ भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा इसमे एक बयान देकर दवा के प्रचार प्रसार पर कानून के आधार पर रोक लगा दी है। इस बारे में आयुष मंत्रालय ने कहा है कि हमे इस दवा के क्लिनिकल ट्रायल के बारे में कोई जानकारी नहीं है अतः बिना साक्ष्यों के इस दवा के प्रचार पर रोक लगनी चाहिए। इस पर बाबा रामदेव भी निम्स जयपुर के साथ किये गए क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल के साथ पूरी जांच और संतुष्टि देने को तैयार है। बाबा रामदेव के अनुसार उन्होंने एलोपैथी चिकित्सा के मानकों के आधार पर इस दवा का निर्माण किया है। हम सरकार के हर निर्देश पर परीक्षण कराने के लिए तैयार है।

आयुष मंत्रालय द्वारा कोरोनिल की खबरों पर संज्ञान लेते हुए प्रचार-प्रसार पर अपना रुख दर्शाया:

बाबा की दवाई पर लोगों की ये राय है:

क्या होगा भविष्य?

जानकारों की माने तो भारत सरकार भले ही इस दवा को लेकर अपनी अनिभिज्ञता दर्शाए। लेकिन देश मे जो हालात है उसका असर सरकार के ऊपर पड़ना तय है हालांकि सरकार के इस गतिरोध को समाज का एक वर्ग अंतरराष्ट्रीय मेडिकल लाबी का दबाव बता रहा है। लोगों के अनुसार जब बाबा रामदेव के द्वारा दावा किया जा रहा है कि अधिकतम सात दिनों में संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो रहा है तो सरकार को बेहद तेजी से इसका मास परीक्षण करा के रिजल्ट देखने चाहिए।

जानकारों की माने तो अगर बाबा रामदेव का यह दावा सच हुआ तो दुनिया भर में आयुर्वेद का झंडा बुलंद हो सकता है और दुनियाभर में भारत के यश का भंडार और भरेगा।

देखना यह है कि देश वासियों को काढा पिलाकर इम्यून बनाने वाली सरकार उन्ही अवयवों से बनी दवा को हरी या लाल झंडी कब तक दिखाता है।

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उदय बुलेटिन
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