आयुर्वेद से कोरोना का इलाज
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कोरोना के आधिकारिक इलाज में मिली आयुर्वेद को जगह, आयुष मंत्रालय ने जारी किया निर्देश

आयुर्वेद से हो सकता है कोरोना का इलाज, आयुष मंत्रालय ने दी जानकारी

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

सरकार बीते लंबे समय से चिकित्सा एजेंसियों के माध्यम से दवाओं के नतीजे पर नजर रख रही थी, अब जाकर आयुष मंत्रालय ने देश भर में आयुष के लिए निर्धारित दवाओं की जानकारी साझा की है, यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि ये दवाएं अब बेहद संवेदनशील संक्रमितों के लिए भी निर्देशित की गई है।

अब कोरोना में आयुर्वेद करेगा रामबाण इलाज:

इससे पहले इस खबर को आप पढ़े आपको जानना चाहिए कि इस जानकारी का मतलब यह नहीं है कि आप स्वयं डाक्टर बनकर कोरोना का इलाज करने के लिए बैठ जाये, सरकार ने आयुष मंत्रालय के जरिये कोरोना में प्रयोग की जाने वाली औषधियों का रिसर्च करके यह पाया है कि कोरोना संक्रमितों में यह दवाएं अपना बेहतरीन क्षमता को दर्शा रही है।

कोरोना काल मे सबसे बडी समस्या यह है कि जिस कोरोना का कोई पुख्ता इलाज नही है उस वक्त तक वैकल्पिक दवाओं के सहारे रहना पड़ेगा हालांकि अब आयुष मंत्रालय ने इस बारे में एक बड़ी घोषणा की है जिसके चलते अब कोरोना संक्रमित लोग निर्धारित मात्रा में आयुर्वेदिक दवाओं को लेकर कोरोना से लड़ सकते हैं।

कौन सी दवाएं होगी कारगर?

आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एसओपी में कोरोना संक्रमितों को तीन प्रकार की कैटेगरी में बांटा गया है जिसके तहत अलग-अलग दवाओं और खुराक का विवरण दिया गया है:

संक्रमण के तीन प्रकार:

हाई रिस्क मरीज जिन्हें क्रिटिकल कंडीशन अथवा डायरेक्ट संपर्क में आये हुए लोग कहा जा सकता है उनके लिए अश्वगंधा दवा निर्देशित की गयी है जो 500 एमजी की टेबलेट अथवा 1-3 ग्राम चूर्ण की अवस्था में दिन में दो बार अथवा आयुर्वेदिक फिजिशियन के निर्देशानुसार दी जानी चाहिए साथ मे गुडूची घन वटी अथवा गिलोय घनवटी अश्वगंधा की समान मात्रा में दिन में दो बार दिए जाने का निर्देशन दिया गया है साथ मे 10 ग्राम च्यवनप्राश गर्म दूध के साथ दोनो बार दिए जाने का निर्देश दिया गया है (उक्त दवाओं के लगातार 5 दिनों तक प्रयोग की बात की गई है)

माइल्ड कोविड अथवा लक्षणों वाला हल्का कोरोना:

इस अवस्था मे लोगों को बुखार आने, सर दर्द होने के साथ साथ थकावट के लक्षणों के साथ सूखी खांसी और गले बैठने संबंधित समस्याएं आती है लेकिन ब्रेथलेसन्स ( सांस लेने में असुविधा) जैसी स्थिति नहीं होती है ऐसे लक्षणों वाले मरीजों के लिए भी गुडुची के साथ पिप्पली सेवन की सलाह दी गयी है लेकिन यहां मात्रा में कटौती की गई है इस स्थिति में 375 एमजी मात्रा अथवा आयुर्वेद फिजिशियन के अनुसार सेवन की स्वीकार्यता दी गयी है इन दवाओं के साथ आयुष 64 500 एमजी की सेवन मात्रा लगातार पंद्रह दिनों तक जारी रखी जायेगी।

बिना लक्षण वाले कोविड संक्रमित:

आयुष मंत्रालय ने बिना लक्षण वाले कोविड संक्रमितों को दूसरी कैटेगरी में रखा है जिसके तहत लोगों मे रिकवरी रेट बढ़ाने और अन्य बिमारियों को रोकने के लिए गुड़चि घनवटी के साथ पिप्पली अथवा आयुष 64 नामक दवा के प्रयोग की अनुशंषा की गई है दोनो दवाएं 500 एमजी अथवा एक से तीन ग्राम की चूर्ण मात्रा में लिए जाने की जानकारी दी जाती है। इन दवाओं के उपयोग के लिए 15 दिन का समय तय किया जाता है।

आखिर क्यों आयुर्वेद बना वरदान:

आज जहां फार्मास्युटिकल जगत लगातार वैक्सीन की जद्दोजहद में लगा हुआ है वहाँ कोरोना भी लगातार अपनी संक्रमण दर उससे ज्यादा तेजी से बढ़ा रहा है। उस स्थिति में भारत मे एक सुखद खबर नजर आती है कि यहां पर भले ही संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही हो लेकिन यहाँ रिकवरी रेट भी काफी ज्यादा नजर में आता है और इसका मुख्य कारण है आयुर्वेद, भारत मे आयुर्वेद आम जनमानस के खान पान में सैकड़ो वर्षों से चला आ रहा है फिर चाहे वह दालचीनी हो या अदरख हो या अन्य कोई हर्ब्स। इसी लाइफस्टाइल के चलते भारत मे कोरोना अपने उस रूप में कहर नहीं मचा पा रहा जितना कि उसने पश्चिम के देशों में मचाया है।

स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन ने बताया कि ये काढ़ा आपको कोरोना के कहर से बचाएगा:

रामदेव भी कर चुके है इन दवाओं की वकालत:

हालांकि अब सरकार और आयुष मंत्रालय के दावे के बाद बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद का पक्ष मजबूत हो जाता है, ज्ञात हो कि जब भारत मे कोरोना अपनी भयावह स्थिति में था तब पतंजलि आयुर्वेद ने कोरोनिल और अश्वगंधा वटी, तुलसी घनवटी, गिलोय घनवटी के साथ अनु तैल को लेने की सलाह दी थी जो अब जाकर सरकार के द्वारा दी गयी जानकारी में प्रमाणित की जाती है।

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उदय बुलेटिन
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