ARTO Mahoba Ajay Yadav Beaten to Autorickshaw Driver  
ARTO Mahoba Ajay Yadav Beaten to Autorickshaw Driver  |Uday Bulletin
टॉप न्यूज़

मासिक रिश्वत न मिलने पर एआरटीओ ने ऑटो चालक को सड़क पर कूटा, पुलिस मूक दर्शक बनी देखती रही !

सैलरी से पेट नहीं भरता इन अधिकारियों का !

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

करप्शन और हनक हमारे भारतीय सिस्टम में इस कदर काबिज है कि हमारे अफसरान आम आदमी को इंसान समझने से गुरेज करते है, यही कारण है कि आम आदमी का सिस्टम से भरोसा उठने लगा है। इसका ताजा उदाहरण महोबा से जुड़ा हुआ है।

महोबा का बजरिया चौकी इलाका जहाँ से महोबा के रेलवे स्टेशन पहुंचने का रास्ता है यह ऑटो और रिक्शे के लिहाज से बेहद व्यस्त रुट है आमतौर पर दिन के साथ-साथ रात में भी ऑटो ही लोगों को स्टेशन और स्टेशन से घर तक पहुंचाने का काम करते है लेकिन आज का नजारा यहाँ बिल्कुल बदला हुआ था।

एआरटीओ प्रवर्तन अजय यादव अपने सिपहसालारों के साथ रास्ते पर मुस्तैदी से डटे हुए थे और आने-जाने वाले वाहनों खासकर ऑटो इत्यादि की चेकिंग कर रहे थे तभी एक ऑटो उनके नजदीक से गुजरा और एआरटीओ अजय यादव ने उन्हें उतार कर पीटना शुरू कर दिया सनद रहे उस वक्त पर बजरिया पुलिस चौकी के सिपाही मौके पर खड़े रहे और बुजुर्ग ऑटो चालक को बेइज्जत होने दिया।

मामला सुविधा शुल्क का है :

जानकारों की माने तो ये पिटाई का पूरा मामला रिश्वत से जुड़ा है जिसे स्थानीय भाषा मे इंट्री फीस कहा जाता है। ऑटो चालकों ने बताया कि यहाँ ऑटो चलाना केवल तभी मुमकिन है जब स्थानीय पुलिस और परिवहन विभाग को हफ्ते या महीने के तौर पर रिश्वत देंगे अन्यथा किसी भी हालत में आपका ऑटो सड़क पर चल ही नही सकता। और अगर आप इन सरकारी मुलाजिमों को बिना रिश्वत सुंघाए कोई यात्री वाहन चलाते है तो यकीनी तौर पर आपको कानून की किसी धारा में फसाकर चालान किया जाएगा और विरोध करने पर मारपीट भी की जा सकती है।

एआरटीओ कानून से ऊपर कैसे ? :

जैसा कि प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अजय यादव जो कि महोबा में एआरटीओ प्रवर्तन के पद पर पोस्टेड है उन्होंने बुजुर्ग ऑटो चालक की न सिर्फ पिटाई की बल्कि साथ ही पीड़ित ऑटो चालक पर महोबा कोतवाली में एफआईआर दर्ज करा दी। जबकि सारा मामला स्थानीय पुलिस चौकी के सामने हुआ।

कानून के अनुसार किसी भी एआरटीओ और आरटीओ को यह अधिकार नहीं है कि किसी व्यक्ति के साथ सड़क पर मारपीट करे। किसी भी एआरटीओ को कानून से ऊपर नही माना जा सकता।

उदय बुलेटिन के साथ फेसबुक और ट्विटर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com