अदालत से अर्नब गोस्वामी को नहीं मिली जमानत, अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा

अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और अभी तक अदालत ने उन्हें जमानत नहीं दी है।
अदालत से अर्नब गोस्वामी को नहीं मिली जमानत, अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा
Arnab Goswami did not get bail Uday Bulletin

बीते दिनों महाराष्ट्र पुलिस द्वारा रिपब्लिक भारत के मुखिया अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करने के बाद इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में चल रही है दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्नब के वकील के द्वारा जमानत की अर्जी दी गयी थी मगर सुनवाई के दौरान जमानत याचिका अपूर्ण होने की वजह से इस सुनवाई को अगले दिन अर्थात शनिवार के लिए टाल दिया हालांकि अर्नब की गिरफ्तारी को लेकर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी ले जाया गया। जहाँ महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को मामले की टाइमिंग और तरीके पर सवाल उठाए गए।

जमानत नहीं मिली, सुनवाई टली:

दरअसल अर्नब की गिरफ़्तारी एक बंद केस को री-ओपन करने के बाद हुई। जानकारी के मुताबित अर्नब को रायगढ़ पुलिस द्वारा उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब एक 52 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक के परिजनों द्वारा इस मामले को दोबारा ओपन करने की मांग की गई, मामले में कथित तौर पर मृतक को अर्नब के द्वारा मरने के लिए उकसाया गया था। इस मामले में अर्नब के साथ अन्य दो आरोपियों को भी गिरफ्तार करके रायगढ़ जिले के अलीबाग में ले जाया गया।

मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही है। इस सुनवाई में अर्नब के वकील द्वारा अंतरिम जमानत के लिए अपील की गई। इस पर हाईकोर्ट द्वारा इस जमानत अपील को अपूर्ण बताकर अगली सुनवाई के लिए टाला गया। हाईकोर्ट के अनुसार वह बिना दूसरे पक्ष को सुने आपको अंतरिम राहत नहीं उपलब्ध करा सकते। मामले की अगली सुनवाई शनिवार को चलेगी। जिसमे सभी पक्षो को सुनकर इस मामले पर कोई निर्णय किया जा सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की फजीहत, पुलिस को लगाई फटकार:

हालांकि इसके इतर सुप्रीम कोर्ट में अर्नब पक्ष के द्वारा मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया गया और मामले में अर्नब की गिरफ्तारी और साथ मे हुए बर्ताव पर सवाल खड़े किए गए। इस मामले में अर्नब के वकील के द्वारा सत्ता नियोजित गिरफ्तारी और साजिशन बंद केस को खोलने की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए गए।

मामला अब केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि अर्नब मामले को विदेशो में भी उछाला जा रहा है। लोग भारत से बाहर भी उद्धव ठाकरे और कांग्रेस पार्टी की वर्तमान महाराष्ट्र सरकार पर निशाने लगा रहे है।

मामले में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सभी पहलुओं पर नजर डालते हुए महाराष्ट्र सरकार को तीखे शब्दो से लताड़ा यहीं नहीं सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के विधानसभा सचिव से यह सवाल पूंछा गया कि क्यो न आप पर अवमानना का मामला चलाया जाए। मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने नियमावली को याद दिलाते हुए यह कहा कि अगर केस दर्ज करने की बात है तो किसी भी व्यक्ति पर कोई भी केस दर्ज करा सकता है इसका मतलब यह तो नहीं की आप मामला दर्ज होते ही उक्त व्यक्ति को उठा ले। आपको मामले की संगीनता, आरोपो और दशा इत्यादि को देखकर कदम उठाने होते है।

हालांकि मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अर्नब पर दर्ज केस में मुम्बई हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है इस पर सारा मामला जल्द ही सबके सामने होगा लेकिन पुलिस का किसी भी व्यक्ति को धक्के मार कर घर से उठा लेना एक दबंगई का परिचय है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा सचिव को समन जारी कर 2 हफ्ते के अंदर सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होने के आदेश जारी किया है।

सोशल मीडिया में अर्नब मामले को एक लहर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

अर्नब के पक्ष के वकील द्वारा हथियारबंद पुलिस द्वारा घर से परिवार के सामने जबरन उठाने, हाथापाई करने इत्यादि को लेकर विरोध दर्ज कराया साथ ही वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

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उदय बुलेटिन
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