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दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और आलोक वर्मा
दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और आलोक वर्मा|IANS
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आलोक वर्मा के वो 7 काम जिसके लिए उन्हें गवानी पड़ी नौकरी 

CBI निदेशक अलोक वर्मा छुट्टी पर भेजे जाने से पहले राफेल और स्टर्लिंग बायोटेक केस की जाँच में थे, राफेल डील पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है,तो स्टर्लिंग केस पर प्रधानमंत्री के सचिव आरोपी हैं। 

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा पर लगे आरोपों की जांच की निगरानी के लिए शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए.के.पटनायक की नियुक्ति की। इस मामले की पूर्ण जांच के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को दो सप्ताह का समय दिया गया है।

अलोक वर्मा कि सीबीआई निदेशक के पद पर नियुक्ति 2017 में हुए थी, उनके दो वर्ष के कार्यकाल में उन्होने कई हाई प्रोफाइल केस सुलझाए थे जिनमें लालूयादव का चारा घोटाला मामला, भारतीय रेलवे तत्काल टिकट केस प्रमुख है इसके साथ ही राफेल डील, मेडिकल काउन्सिल ऑफ़ इंडिया रिश्वत केस, कोयला आवंटन मामला में IAS अधिकारी भास्कर कल्बे की भूमिका और स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड केस में राकेश अस्थाना की कथित भागीदारी मामलों की जाँच की जनि थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ महत्वपूर्ण मामले भी थे जिनकी जांच अलोक वर्मा के द्वारा होनी थी और चल भी रही थी। पर 23 अक्टूबर की रात को केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें अचानक छुट्टी पर भेज दिया गया। आलोक वर्मा ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और आज इसपर सुनवाई भी हुए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जाँच पूरी करने के लिए दो सप्ताह का समय माँगा है।

आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर कहा था कि वे कुछ बेहद संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे हैं और कानूनन उनके कार्यकाल की अवधी के समाप्त होने से पहले उन्हें हटाया नहीं जा सकता , यह असंवैधानिक है , अगर किसी विशेष अवस्था में अगर उन्हें हटाया भी जाये तो चयन समिति की सहमति लेना भी जरुरी है।

विपक्षी दल भी लगातार केंद्र सरकार द्वारा अलोक वर्मा को हटाए जाने का विरोध कर रहा हैं आज सीबीआई दफ्तर के सामने कांग्रेसी कार्यकताओं का प्रदर्शन भी हुआ। राहुल गाँधी लगातार प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साध रहे है कि राकेश अस्थाना को बचाने और राफेल डील की जांच से बचने के लिए मोदी सरकार ने अलोक वर्मा की छुट्टी कर दी।

कुछ बेहद संवेदनशील केस जिनकी जांच में जुटे थे आलोक वर्मा :-

- कथित राफेल सौदा घोटाला मामला , इस मामले की जाँच के लिए बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिंहा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने 12 अक्टूबर को सीबीआई के समक्ष 132 पेज की शिकायत पत्र सौंपी थी , जिसपर आलोक वर्मा जांच करने वाले थे। इस शिकायत की प्रमाणिकता की जांच चल रहे थे इसमें जल्द करवाई होनी थी। (इंडियन एक्सप्रेस से मिली जानकारी)

- मेडिकल कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया के घूसखोरी मामले में बड़े अधिकारीयों और नेताओं की जांच कर रही थी सीबीआई। इसमें हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज आईएम कुद्दुसी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है।

- नितिन संदेसरा और स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड मामले में सीबीआई जाँच पूरा कर , इस मामले में सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की कथित भागीदारी पर जांच कर रही थी।

- बीजेपी सांसद सुब्रमन्यम स्वामी द्वारा वित्त और राजस्व सचिव हसमुख अढ़िया के खिलाफ की गई शिकायत सीबीआई जांच के दायरे में है।

- प्रधानमंत्री के सचिव आईएएस (IAS) भास्कर कुल्बे द्वारा कोयला खदानों में आवंटन में कथित भागीदारी को लेकर सीबीआई जांच चल रही थी।

- मेडिकल एडमिशन भ्रष्टाचार मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज एस एन शुल्का आरोपी पाए गए थे और सीबीआई इस मामले में आगे की जांच कर रही थी , अन्य आरोपियों का खुलासा होना बाकि था।