दिल्ली का एक ऐसा अस्पताल जहां कोरोना की वजह से एक भी मृत्यु नहीं हुई

क्या आयुर्वेद में छिपा हुआ है कोरोना का इलाज़? एक ऐसा अस्पताल जिसने न सिर्फ कोरोना संक्रमितों को इलाज़ किया बल्कि उनकी इम्युनिटी इतनी मजबूत कर दी है कि उनको अब कोई बीमारी छू भी नहीं सकती है।
दिल्ली का एक ऐसा अस्पताल जहां कोरोना की वजह से एक भी मृत्यु नहीं हुई
आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेदGoogle Image

अगर कोरोना की बात करे तो सबसे पहले इससे होने वाली मौतों के बारे में खयाल आता है। लेकिन इस कोरोना के ख़ौफ़ को तोड़ने का काम एक अस्पताल ने किया है जिसने पुरानी चिकित्सा प्रणाली के बारे में लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

एआईआईए (AIIA) ने किया कारनामा :

जबतक भारत मे कोरोना की वैक्सीन प्रयोग में नहीं लायी जाती तब तक लोगों के दिमाग से कोरोना के संक्रमण का ख़ौफ़ गायब नहीं होने वाला, लेकिन अगर दिल्ली के एक आयुर्वेद अस्पताल जिसे आयुर्वेदिक एम्स (आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद) कहा जाता है ने चमत्कार कर दिखाया है। यहाँ कोरोना काल की शुरुआत से भर्ती होने वाले सभी संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ्य होकर अपने घर लौट रहे है और अभी तक एक भी संक्रमित व्यक्ति की मौत कोरोना की वजह से नहीं हुई है। सनद रहे कि अब तक इस अस्पताल में करीब 275 कोविड संक्रमित व्यक्तियों का सफल इलाज़ किया गया है वह भी बिना किसी एलोपैथी दवा की मदद से, संस्थान की निदेशक तनुजा मनोज ने मीडिया को बताया कि इस अस्पताल में भर्ती होने वाले सभी लोग कोरोना संक्रमण को हराकर अपने घर जा रहे है, और इस युद्ध मे लोगों ने आयुर्वेद और योग के मेल से कोरोना को मात दी जा रही है।

और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि कोविड संक्रमण की देखभाल करने वाले परिचायको में अभी तक किसी भी व्यक्ति को संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई।

उपयोग में लायी गयी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली:

संस्थान की निदेशक तनुजा मनोज ने बताया कि हमारे अस्पताल में भर्ती सभी संक्रमितों को आयुर्वेद दवाओं के अलावा वैदिक जीवन प्रणांली को आजमाया गया है जो कि बेहद कारगर साबित हुई है। उन्होंने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इलाज में शुरुआत से ही दालचीनी, लौंग, अदरख/सोंठ, पंच तुलसी (पंचांग) और मुनक्का से बना हुआ काढ़ा पिलाया गया है। साथ ही सुबह की शुरुआत योग से जुड़े क्रीड़ा इत्यादि को शामिल किया। इस दौरान संगीत और ध्यान इत्यादि को दिनचर्या में शामिल किया गया।

लोग आयुर्वेदिक पर भरोसा नहीं कर पाते:

संस्थान की डायरेक्टर ने बताया कि हमारे इंस्टिट्यूट में वर्तमान समय मे पचास बेड का कोविड वार्ड संचालित है लेकिन इसके बावजूद भी वार्ड में काफी मात्रा में बेड खाली रह जाते है और इसका मुख्य कारण है लोगो का अस्पताल तक न पहुंचना। लोगो को आयुर्वेद में वर्तमान की बीमारियों को शंकाएं है जबकि ज्यादातर लोगों यह पता ही नही की आयुर्वेद किसी बीमारी की रोकथाम ही नही करता बल्कि शरीर को ही इतना मजबूत बना देता है कि बीमारियां उसके आसपास ही नही फटकती। लेकिन सबसे पहले समझने योग्य यह बात है कि आयुर्वेद सिर्फ एक दवा प्रणाली ही नहीं है यह एक योग्य जीवन शैली है जिसको जीकर लोग लंबे वक्त तक स्वस्थ्य और निरोग रह सकते हैं।

इस संस्थान में कोविड मरीज अपनी कलाकृतियों से लोगो का मनोरंजन भी करते है।

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उदय बुलेटिन
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