उदय बुलेटिन
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Lack Of Beds in AIIMS Delhi 
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एम्स ने किडनी ट्रांसप्लांट की प्रणाली कर दी बंद, सरकार को कोई फर्क नही। 

सरकार की लाल फीताशाही के कारण सैकड़ो लोगों की जान दांव पर।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

देश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान जहाँ मरते हुए मरीज और उसके परिजनों को यह आशा रहती है कि भले ही वक्त कितना भी लगे लेकिन जान बच जाएगी, देश के सबसे बेहतरीन अनुभवी डॉक्टर और उत्तम चिकित्सा प्रणाली होने के बावजूद एम्स प्रशासन सरकार की उपेक्षा के कारण गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रणाली को बंद करने पर मजबूर हो गया है, पिछले 25 दिनों से दिल्ली एम्स में एक भी किडनी ट्रांसप्लांट नही हुई यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि एम्स हर हफ्ते लगभग 3 से लेकर 4 की संख्या में प्रत्यारोपण करता रहा है।

आखिर क्यों बंद किया किडनी ट्रांसप्लांट :

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जिसे देश के सबसे उम्दा चिकित्सा संस्थान के रूप में जाना जाता है उसके अंदर स्थित नेफ्रोलॉजी विभाग ने करीब 25 दिन से एक भी किडनी प्रत्यारोपित नहीं की, कारण सिर्फ एक है संस्थान में बेड की संख्या कम होना,

जानकारों के मुताबिक एम्स सरकार से बेड मुहैया कराने को लेकर जिम्मेदार लोगों से कई बार मिन्नते कर चुका है लेकिन अब तक एम्स की जरूरतों पर किसी ने गौर नहीं किया इसके बाद ही एम्स ने यह कठोर कदम उठाया है, जानकारों के अनुसार मरीजों के लिए साधन की उपलब्धता कम होने की वजह से दूसरे संस्थानों में डायलिसिस के लिए भेजना पड़ रहा है।

चार सौ मरीज़ों की है वेटिंग :

भले ही दिल्ली एम्स ने पिछले पच्चीस दिनों से कोई किडनी ट्रांसप्लांट को अंजाम नही दिया हो लेकिन अभी भी एम्स की वेटिंग लिस्ट में करीब 400 मरीज उपस्थित हैं जिनको यह आशा है कि एम्स देर सबेर उन्हें ठीक कर देगा।

बहुत लंबा हुआ इंतजार :

भले ही यह समस्या अब आकर विकट हो गयी है लेकिन इसका मामला काफी लंबे समय से लंबित है जिसको लेकर सरकार ने अभी तक कोई कारगर कदम नही उठाये हैं, नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एस के अग्रवाल ने बताया कि वह निजी और विभागीय तौर पर कई बार एम्स प्रशासन और सरकार को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं।

डॉ अग्रवाल के अनुसार वह बेहद निजी तौर पर सरकार के कई मंत्रियों यहाँ तक कि पीएमओ तक को इस बाबत जानकारी दे चुके हैं लेकिन अभी तक इस मामले में किसी ने अपनी दखल नही बढ़ाई।

एम्स में बेहद सस्ता है प्रत्यारोपण :

किडनी ट्रांसप्लांट बेहद कड़ी जटिल प्रक्रियाओं में शामिल है जिसके इलाज में काफी खर्च आता है, एक ओर जहां प्राइवेट चिकित्सा संस्थान इस तरह के इलाज के लिए 12 लाख से लेकर 40 लाख तक वसूलते है, यही ट्रांसप्लांट एम्स में मात्र 40 हजार रुपये के खर्च में हो जाता है, जिससे भारत के गरीबों को जीने का मौका मिल जाता है।