महोबा का सरकारी तंत्र एक बार फिर हुआ दागदार, अबकी बार अधिवक्ता की गई जान

महोबा जिले का सरकारी तंत्र आम जनता की नहीं सुनता, कभी पुलिस तो कभी गुंडों की बजह से व्यापारी और आम लोग अपनी जान गवां रहे हैं
महोबा का सरकारी तंत्र एक बार फिर हुआ दागदार, अबकी बार अधिवक्ता की गई जान
महोबा के समदनगर में रहने वाले अधिवक्ता मुकेश पाठक ने महोबा के दबंग नेताओं और पुलिस अधिकारियों की धमकी के साथ-साथ अन्य दबावों के चलते खुद को गोली से उड़ा लियाGoogle Image

महोबा के समदनगर में रहने वाले अधिवक्ता मुकेश पाठक ने महोबा के दबंग नेताओं और पुलिस अधिकारियों की धमकी के साथ-साथ अन्य दबावों के चलते खुद को गोली से उड़ा लिया। मामले की जानकारी के बाद जिले के अधिकारियों के होश फाख्ता है"

अबकी बार अधिवक्ता की गई जान:

हालाँकि यह पहला मामला नही है जब गुंडों और दबंगो के चलते किसी ने जान दी हो, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि अबकी बार जान उस व्यक्ति की गई है जो खुद कानून का बेहद जानकार था। महोबा के समदनगर के निवासी मुकेश पाठक ने सिस्टम से परेशान होकर खुद को गोली से उड़ा लिया। यहां आपको बताते चले कि अधिवक्ता मुकेश पाठक लंबे वक्त से महोबा के कुछेक राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों की साठ-गांठ से परेशान थे। मृतक मुकेश पाठक ने बीते दिन अपने आवास में खुद को गोली।मार ली, मुकेश ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा है। जिसमें उन्होंने जिले के प्रसपा नेता चौधरी छत्रपाल सिंह समेत पांच लोगों पर हत्या के लिए विवश करने पर आरोप लगाए है।

क्या है मामला?

मृतक मुकेश पाठक जिले के वरिष्ठतम अधिवक्ताओं में गिने जाते थे लेकिन बीते कुछ वक्त से जिले के बाहुबली नेता चौधरी छत्रपाल सिंह यादव के साथ विवाद चल रहा था। मृतक अधिवक्ता ने अपने सुसाइड नोट में इस बात का उल्लेख किया है कि आरोपी छत्रपाल और उसके साथियों और गुर्गों द्वारा उसके बेटे से मारपीट करके करीब 60 लाख की भारी भरकम रकम जबरन वसूली गयी है। इसके बाद जब अधिवक्ता ने इस मामले पर जिला पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगाई तो सीओ सिटी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों ने अधिवक्ता को दुष्कर्म की धाराओं में जेल भेजने और नाम बदनाम कराने की धमकी दी।

हालाँकि अधिवक्ता ने इस मामले में पैरवी करके पुलिस उप महानिरीक्षक ( चित्रकूट धाम) के पास तक जानकारी पहुंचाई लेकिन आदेशों के बाद भी स्थानीय स्तर पर कोई कार्यवाही नही हुई। उल्टा अधिवक्ता पर अन्य दबाव और धमकियां मिलने लगी अंत मे अधिवक्ता ने थक हार कर मौत को गले लगा लिया।

पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत:

इस मामले पर मृतक अधिवक्ता ने अपने सुसाइड नोट में छत्रपाल यादव, विक्रम यादव, रवि सोनी आनंद मोहन के साथ अंकित सोनी के ऊपर गंभीर आरोप लगाए है। मृतक अधिवक्ता पाठक ने सुसाइड नोट में अपने बेटे शुभम पाठक पर मारपीट करने के आरोप भी लगाए है।

कौन है छत्रपाल यादव?

छत्रपाल यादव जिले में चौधरी छत्रपाल यादव के नाम से जाने जाते है। जिले में सैकड़ों बेनामी संपत्ति के मालिक है। खुद ब्लाक प्रमुख है और प्रसपा के नेता है। छत्रपाल यादव पर तमाम ऐसे केस दर्ज है जिनपर अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई है।

सनद रहे कि इससे पहले भी महोबा जिले की पुलिस का दामन दागदार हो चुका है। कबरई के विस्फोटक व्यापारी इन्द्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड में महोबा एसपी मणिलाल पाटीदार के ऊपर सुनियोजित हत्या कराने के आरोप लगे थे। इस मामले में एसपी पर इनाम भी घोषित किया गया था।

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उदय बुलेटिन
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