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NCP-Shiv Sena joint press conference
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गिरने वाली है बीजेपी सरकार, सेना-राकांपा-कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया

महाराष्ट्र में राजनितिक उठापटक से प्रदेश का हो रहा बुरा हाल।

Abhishek

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महाराष्ट्र में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन लगने से रोकने के लिए शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-कांग्रेस के 'महा विकास अगाड़ी' ने राज्य में सरकार बनाने के लिए सोमवार को अपना दावा पेश कर दिया। पार्टी के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक के अनुसार, "तीन दलों के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश करने राजभवन में है, क्योंकि राज्य में मौजूदा सरकार निश्चित रूप से गिरने वाली है।"

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता ने भी कहा कि राज्य में फिर से राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जाना चाहिए और महा विकास अगाड़ी को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।

राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने तीनों दलों के कुल 160 विधायकों के समर्थन पत्र राज्यपाल के कार्यालय को सौंप दिए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी तरफ से 170 विधायकों के समर्थन का दावा किया है, जिसमें राकांपा, निर्दलीय और छोटे दलों के अलावा इसके अपने 105 विधायक शामिल हैं।

अजित के समर्थन-पत्र बाद ही राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की : तुषार

Tushar Mehta
Tushar Mehta
ians

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह भाजपा को राकांपा द्वारा दिए गए समर्थन से संबंधित पत्र लेकर आए हैं। अजीत पवार द्वारा 22 नवंबर को दिए गए पत्र के बाद ही देवेंद्र फडणवीस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था। महाराष्ट्र में सरकार गठन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान राज्यपाल की तरफ से पेश हुए मेहता ने कहा कि यह पत्र मिलने के बाद ही राज्यपाल ने राष्ट्रपति को सूचना भेजी थी और इस जानकारी का हवाला देते हुए ही उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाने का अनुरोध किया था।

अजित पवार ने राकांपा के 54 विधायकों के समर्थन वाला पत्र हस्ताक्षर के साथ राज्यपाल को सौंपा था। उनके पत्र में 11 स्वतंत्र और अन्य विधायकों का समर्थन पत्र भी संलग्न था।

महाराष्ट्र राज्यपाल के निर्णय की न्यायिक समीक्षा पर महाधिवक्ता ने की आपत्ति

 Maharashtra Governor B.S. Koshyari, Devendra Fadnavis, Ajit Pawar 
Maharashtra Governor B.S. Koshyari, Devendra Fadnavis, Ajit Pawar 
ians

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के शनिवार तड़के भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजित पवार को उपमुख्यमंत्री की शपथ दिलाने के निर्णय की न्यायिक समीक्षा पर महाधिवक्ता तुषार मेहता ने सोमवार को आपत्ति जताई। मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायकों के समर्थन वाले पत्र लेकर आए हैं, जिनके आधार पर राज्यपाल ने निर्णय लिया था।

उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के अनुसार, अजित पवार ने राकांपा के 54 विधायकों के हस्ताक्षरों वाला पत्र राज्यपाल को सौंपा था।

मेहता ने कहा कि फडणवीस ने 22 नवंबर को अजित पवार के समर्थन-पत्र के अनुसार, सरकार गठन का दावा पेश किया था, जिसमें 11 निर्दलीय और अन्य विधायकों के समर्थन का भी उल्लेख था।

महाराष्ट्र मामले पर फैसला मंगलवार के लिए सुरक्षित:

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र मामले में अपना आदेश मंगलवार सुबह 10.30 बजे के लिए सोमवार को सुरक्षित कर लिया। इस तरह भाजपा-अजीत पवार को कम से कम अतिरिक्त एक दिन की राहत मिल गई है।

महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा, फडणवीस सरकार के पास 170 विधायकों का समर्थन:

महाधिवक्ता तुषार मेहता ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की सरकार के पास 170 विधायकों का समर्थन है, जिससे वे सदन में बहुमत साबित कर सकते हैं। महाराष्ट्र में शनिवार सुबह अचानक बदले घटनाक्रम के तहत भाजपा नेता फडणवीस द्वारा बनाई गई सरकार के खिलाफ शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार की राकांपा द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से मेहता पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से कहा कि वह 'भाजपा को राकांपा विधायकों द्वारा दिया गया समर्थन का पत्र लेकर आए हैं, जिसके आधार पर राज्यपाल ने फैसला लिया।'

मेहता ने कहा, "पत्र में साफ नजर आ रहा है कि अजित पवार ने राकांपा के 54 विधायकों के समर्थन वाला पत्र हस्ताक्षर के साथ राज्यपाल को सौंपा था।"

उन्होंने आगे कहा, "अजित पवार द्वारा 22 नवंबर को दिए गए पत्र के बाद ही देवेंद्र फडणवीस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था, इसके साथ ही पत्र में 11 स्वतंत्र और अन्य विधायकों का समर्थन पत्र भी संलग्न था। 288 सदस्यीय सदन में भाजपा के 105 विधायक हैं, जबकि राकांपा ने 54 सीटें जीती थीं।"

भाजपा ने दावा किया कि अन्य 11 स्वतंत्र विधायकों के समर्थन के बाद उनके पास 170 विधायकों की संख्या है। इसके साथ ही मेहता ने महाराष्ट्र के राज्यपाल बी. एस. कोश्यारी के फैसले की न्यायिक समीक्षा पर भी आपत्ति जताई।

मेहता ने आगे कहा, "इसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति को सूचना दी। जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने राष्ट्रपति से राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन हटाने का अनुरोध किया था।"