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Aam Admi Party delhi Election Victory
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दिल्ली में रिकार्ड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई आप, जीत के कितने मायने?

जो भाजपा रिजल्ट आने के पहले तक अपनी सीटो की संख्या बताते नही छक रही थी, उसको शुरुआत से मूल्यांकन करने की जरूरत है, और दिल्ली में कांग्रेस मुक्त नारा सार्थक हो ही गया।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

तो लगभग सारी लोकसभा सीटों के रिजल्ट चुनाव आयोग ने जारी कर दिए है और दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी एक मजबूत आधार के साथ दिल्ली की कुर्सी की दावेदार साबित हुई है। पार्टी ने भारी बहुमत के साथ दिल्ली भाजपा को घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया है, यहाँ आपको बताते चले कि एक लंबे समय तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहने वाली पार्टी कांग्रेस को एक सीट भी मयस्सर न हुई। अगर इसको साख की तरह देखे तो कांग्रेस के समय के किये गए कार्य अभी भी लोगों के जेहन में जिंदा है, खैर जनता ने भाजपा को दहाई के अंक से भी नीचे धकेल दिया और कांग्रेस पूरी दिल्ली से खाता भी नही खोल पायी। लेकिन इस तरह की जीत और हार के लिए कोई एक कारक सामने नही आता, बल्कि इसमे वो तमाम फैक्टर हैं जिन्होंने इन चुनावों की दशा और दिशा बदल कर रख दी, शायद यही कारण था कि राजनेता मुगालते में रहकर प्रचार करते रहे और जनता ने गच्चा देकर दूसरे को दोबारा राजगद्दी पर बैठा दिया।

भाजपा की बयानबाजी :

वैसे जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र में सत्ता पर काबिज है और दिल्ली में काबिज आम आदमी पार्टी के सत्ता में रहने की वजह से भाजपा को तगड़ा फायदा हो सकता था, लेकिन जमीनी तौर पर ऐसा हो नहीं हो पाया, बल्कि जो कसर बची थी उसे भाजपा के प्रवक्ताओं और फायरब्रांड नेताओ ने पूरी कर दी। "गोली मारो सालो को, बिरयानी और 500 रुपये, पाकिस्तान चले जाओ जैसे नारो ने भाजपा के कोर वोटर को कुंद करने का काम किया, चूँकि भाजपा इस वक्त इस उधेड़बुन में थी कि उसे रक्षात्मक तरीके से खेलना चाहिए या आक्रामक तरीके से हमला बोलना चाहिए, सीधे शब्दों में कहे तो भाजपा अपने बचाव और हमले के साथ तालमेल इस चुनाव में कभी नहीं बना सकी, नतीजा आप के सामने है, विपक्षी दलों ने भाजपा के बोल वचन को वेदसूक्त की तरह पढ़कर लोगों को सुनाया और यही चीज भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हुई।

मजबूत चेहरे की कमी खली:

एक ओर जहां आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल के चेहरे को दिल्ली के मुखिया की तरह रखकर चुनाव लड़ रही थी वही भाजपा और कांग्रेस ऐसे किसी नेतृत्व की कमी से जूझती रही, खासकर भाजपा मनोज तिवारी जैसे नए-नए नेता बने भोजपुरी सिनेमा के कलाकार को लेकर दिल्ली फतेह करना चाहती थी जिसका प्रयोग बेहद असफल रहा, इसका मुख्य कारण प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष के द्वारा कही गयी बातों को लोगों ने बड़ी गहराई से सुना, लेकिन लोगों ने अरविंद केजरीवाल को ज्यादा तवज्जो दी। यही कारण है कि मनोज तिवारी भले ही पूर्वांचल और बिहार के प्रतिनिधि बनकर जनता से वोट खींचना चाहते थे लेकिन केवल बिहार और पूर्वांचल भर दिल्ली की सत्ता पाने के लिए काफी नहीं था।

शाहीन बाग और जामिया:

अगर आप इस फैक्टर को अलग रखकर चुनाव का मूल्यांकन करते है तो आपके सभी पैमानों का फेल होना तय है। अब इसे विपक्ष की तगड़ी प्लानिंग कहें या भाजपा द्वारा इस मुद्दे को बेहद हल्के में लेना। एक ओर जहां खुद आम आदमी पार्टी के मटियामहल इलाके से चुनाव जीतने वाले नेता शोएब इकबाल ने अपने वक्तव्य में लोगों को बताया कि ये जीत शाहीन बाग की है और उसी को समर्पित की जाती है। भले ही इस मामले का दिखावटी रूप से जनता का आंदोलन करार दिया गया हो लेकिन इसका असल मुद्दा कुछ और ही था। जिसका परिणाम लोगों के सामने भी आया, हालांकि इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के अंदर खुद तमाम अलग-अलग बाते सुनाई दे रही है। एक ओर इस जीत को शाहीन बाग की जीत बताया जा रहा है तो दूसरी ओर इसे हिंदुस्तान की जीत घोषित किया गया है।

इस तर्क के बाद लोगों के सवाल यह हो सकते है कि अगर यह शाहीन बाग की जीत है तो लोगों को इससे क्या परेशानी हो सकती है, लेकिन जानकारों की माने तो उनके अनुसार अगर चुनाव के बाद इस तरह के प्रोटेस्ट में नरमी आती है तो इसे एक प्लांट मामला माना जाना चाहिए।

मुफ्त मुफ्त मुफ्त :

जरूरी नहीं कि आप केवल घोषणाएं करे, मैनिफेस्टो में अपनी इच्छा उजागर कर, अगर तथ्यों की माने तो भाजपा और कांग्रेस अपने घोषणापत्रों में मुफ्त की घोषणाएं करती रह गयी जबकि अरविंद केजरीवाल ने पानी, बिजली, और महिला बस यात्रा जैसी चीजों को मुफ्त करके जनता के मन मे भरोसा दिलाया कि वह अगर दोबारा सत्ता में आते है तो यकीनी तौर पर कुछ अन्य चीजों को मुफ्त करेंगे।

सत्ता हमेशा परिवर्तन मांगती है, लेकिन अगर कोई एक मुख्यमंत्री अपनी खामियों के चलते भी लगातार तीन बार चुनाव जीतता है तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर उस पार्टी ने ऐसा क्या किया कि जनता ने हर बार सत्ता पर बिठाने की कसम खा रखी है।

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