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A CRPF DIG threw hot water on his own jawan.
A CRPF DIG threw hot water on his own jawan.|Uday Bulletin
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सीआरपीएफ अधिकारी का दिल दहलाने वाला कारनामा, जवान के ऊपर गर्म पानी डाला।

CRPF के एक डीआईजी ने अपने ही जवान पर गर्म पानी फेंक दिया।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

अगर आप पिछले कुछ सालों में अर्धसैनिक बलों के अंदर हुई घटनाओं पर नजर डाले तो आपको मालूम होगा कि सबसे ज्यादा साथियों और अधिकारियों को गोली से मारने की घटनाएं सीआरपीएफ में हुई है। इसका सीधा श्रेय तानाशाही को जाता है, जहाँ सिपाहियों और छोटे ओहदेदारों को नौकर से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाता। यही कारण है कि सैनिक इस तकलीफ के दर्द में डूबकर कुछ बड़ा अंजाम कर देते है जो किसी भी स्थिति में जायज नहीं कहा जा सकता।

बिहार का राजगीर जहाँ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का प्रशिक्षण केंद्र स्थित है वहाँ डीआईजी रैंक के अधिकारी द्वारा मेस में कार्यरत सीआरपीएफ के जवान के ऊपर गर्म पानी डालने की घटना सामने आई है। घटना में सिपाही के कान से लेकर गर्दन तक जलने के निशान पाए गए है, जिसको लेकर सैन्य बलों में इस घटना को लेकर निंदा की जा रही है।

गुनगुने की जगह गर्म पानी दिया तो सिपाही पर उड़ेल दिया :

मामला साहब की खुशामदी से जुड़ा हुआ है। बिहार के राजगीर में अटैच सिपाही अमोल खरात इन दिनों केंद्र में चल रही परीक्षाओं के लेकर सीआरपीएफ के प्रशिक्षण केंद्र में बाहर से आये उच्चाधिकारियों की आवभगत में लगे हुए थे। इसी बीच डीआईजी डीके त्रिपाठी नाम के उच्चाधिकारी ने अमोल से गुनगुने या गर्म पानी को थरमस में भरने के लिए कहा। अमोल ने आदेशानुसार पानी को गर्म करके थर्मस में भर दिया लेकिन जैसे ही उन्हें अंदेशा हुआ कि पानी बेहद गर्म है तो सिपाही को बुलाकर सारा पानी सिपाही के ऊपर उड़ेल दिया, जिस वजह से सिपाही के अंगों पर फफोले हो गए।

सीआरपीएफ का बयान अलग तरीके का :

अब मामला डीआइजी रैंक से जुड़ा हुआ है तो मामले पर जमकर लीपापोती की जाएगी। सो सीआरपीएफ के अधिकारियों के घटना के सत्य होने की बात तो कही है लेकिन इसमें ट्विस्ट खड़े कर दिया है, सीआरपीएफ के अनुसार अधिकारी द्वारा गर्म पानी पिया गया, और मुँह जल जाने की वजहसे सिपाही को बुलाकर पानी की जांच करने को कहा गया, और जब सिपाही ने खुद पानी पिया तो गर्म होने की वजह से पानी उसी सिपाही पर गिर गया, जिसकी वजह से यह घटना हुई है।

अर्धसैनिक बलों के बुरे है हालात :

सूत्रों की माने तो किसी भी अर्धसैनिक बलों में छोटे कर्मियों को केवल सेवा करने की वस्तु माना जाता है, यहाँ अधिकारी तो अधिकारी इसके साथ उनके परिवारीजनों जैसे कि अधिकारी की पत्नियों द्वारा बाजार हाट कराने जैसे क्रियाकलाप नौकरों जैसे कराए जाते है। सम्भवता इन्हीं सब घटनाओं की वजह से असंतोष उतपन्न होता है और अर्धसैनिक बलों के अंतर्गत गोलीकांड जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है।

विषमता की वजह से होता है यह सब :

अगर सही मायनों में देखे तो किसी विभाग में उसी विभाग का अधिकारी अपने कर्मचारियों की सुविधा-असुविधा को ज्यादा समझ सकता है। लेकिन यहाँ अर्धसैनिक बलों में एक ओर जहां एक अर्धसैनिक बेसिक भर्ती से बल में आकर अपनी सेवाएं देता है जबकि उनके उच्चाधिकारी आईपीएस के माध्यम से सीधे एयरलिफ्ट करके उतार दिए जाते है। लोगों ने यह भी बताया कि उनका व्यवहार बल के निजी अधिकारियों के प्रति भी ठीक नहीं रहता। चूंकि ये अधिकारी एक निर्धारित समय के लिए अपनी सेवाएं देने आते है और उसके बाद प्रादेशिक पुलिस जैसी कमाई वाली जगहों पर जाना होता है, शायद इसीलिए उनका बल में कोई खास लगाव नहीं होता।