महोबा जिले में 4 साल का मासूम बोरवेल में गिरा, NDRF की कोशिशों के बाबजूद बच्चे को नहीं बचाया जा सका

बोरवेल न ढकने की लापरवाही की वजह से 4 साल के मासूम की जान चली गयी।
महोबा जिले में 4 साल का मासूम बोरवेल में गिरा, NDRF की कोशिशों के बाबजूद बच्चे को नहीं बचाया जा सका
महोबा जिले में 4 साल का मासूम बोरवेल में गिराGoogle Image

महोबा जिले में बीते दिन बड़े हादसे की खबर आई, महोबा जिले के कुलपहाड़ ब्लाक अंतर्गत ग्राम बुधौरा (बुधवारा) में चार साल के मासूम के खुले बोरवेल में गिरने की घटना सामने आई, खबर के फैलने के बाद राहत एवं बचाव कार्य किया गया लेकिन बच्चे को नहीं बचाया जा सका।

खुले बोरवेल में गिरा मासूम:

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले अंतर्गत क्षेत्र कुलपहाड़ (बेलाताल एरिया) के गांव बुधौरा में किसान भगीरथ कुशवाहा का चार वर्षीय एकलौता बेटा धनेंद्र खेलते खेलते 30 फिट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। दरअसल बच्चे के परिजन खेती के कार्य मे लगे हुए थे और बच्चा घटनास्थल पर खेल रहा था तभी अचानक से धनेंद्र खुले हुए बोरवेल की तरफ निकल गया और गिर गया। परिजनों के द्वारा काफी देर तलाश करने के बाद भी बेटे का कुछ अता पता नहीं चला।

परिजनों ने बताया की तलाश करने पर खुले हुए बोरवेल से लगातार से रोने की आवाजें आ रही थी, इस पर ग्रामीणों और परिजनों द्वारा टार्च लगाकर बोर में तलाश की गई, मामले में स्थानीय पुलिस विभाग को भी राहत और बचाव के लिए अवगत कराया गया।

तीस फुट गहरा है बोरवेल:

मामले पर परिजनों ने मीडिया को बताया कि यह बोर सफल न होने के कारण इसे पूरा नहीं कराया गया था। स्थानीय पुलिस ने बताया कि बच्चा बोरवेल में करीब 8-10 फिट गहरे में फंस गया था। प्रशासन ने बच्चे को रोशनी इत्यादि पहुँचाने के इंतजाम किए थे लेकिन बच्चे के द्वारा रोने के अलावा बातचीत नहीं की जा रही थी।

एनडीआरएफ की टीम मौके के लिए हुई रवाना:

मामले पर महोबा पुलिस ने सूचना दी है कि घटना में बचाव कार्य को उच्चतम स्तर पर किये जाने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन बल की 20 सदस्यीय टीम लखनऊ से महोबा के उक्त गांव पहुंची थी चार वर्षीय बच्चे को बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर भी पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा NDRF के निर्देशन पर जेसीबी मशीन द्वारा बोर वेल के समानांतर एक गड्ढा खोदकर तैयार किया गया लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका।

परिजनों का बुरा हाल:

मामले में चार वर्षीय बच्चे के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है, प्रशासन द्वारा बचाव कार्य करने की वजह से परिजनों और ग्रामीणों में उम्मीद तो बंधी थी लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका।

नही बच सका धनेंद्र:

NDRF की टीम ने देर रात तक धनेंद्र को निकालने के लिए व्यापक अभियान चलाया लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी धनेंद्र को बचाया नही जा सका, दरअसल बीती शाम से ही धनेंद्र के रोने की आवाजें नही सुनाई दे रही थी। हालांकि बचाव दल को यह उम्मीद थी कि धनेंद्र या तो बेहोश हो गया होगा या फिर सो गया होगा। हालांकि बचाव दल द्वारा बच्चे के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन देने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन शायद ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। किसान की बोरवेल को खुला छोड़ने की एक गलती ने उसके बच्चे की जान ले ली।

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उदय बुलेटिन
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