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Chinmayanand Case
Chinmayanand Case|Google Image
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चिन्मयानंद का आश्रम और कई संदिग्ध स्थान SIT ने कब्जे में लिए, ब्लैकमेलिंग का पैसा मिलने के बाद पीड़िता का कत्ल करने की थी प्लानिंग। 

चिन्मयानंद से वायरल वीडियो को लेकर पूछताछ की गई, जिसमें वह एक लड़की से मसाज कराते दिख रहे हैं

Abhishek

Abhishek

कानून की छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोपों में एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, स्वामी चिन्मयानंद की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। एसआईटी ने पहले तो गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात जिला पुलिस लाइन में स्वामी चिन्मयानंद से घंटों पूछताछ की। इसके बाद शुक्रवार को एसआईटी ने चिन्मयानंद के मुमुक्ष आश्रम सहित उन कई संस्थानों को अपने कब्जे में ले लिए, जो संदिग्ध हैं। चिन्मयानंद के दिव्यधाम को बीती रात ही कब्जे में ले लिया गया था। यहां मात्र एक कमरा चिन्मयानंद के सोने भर के लिए छोड़ा गया है। शाहजहांपुर पुलिस सूत्रों के मुताबिक, "शुक्रवार को मुमुक्ष आश्रम से संबद्ध सभी संस्थाओं को तीन दिनों के लिए बंद कर उसे कब्जे में ले लिया गया हैं, ताकि एसआईटी जांच में कहीं कोई व्यवधान उत्पन्न न हो।"

हालांकि एसआईटी की ओर से इस कदम के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। सूत्रों ने बताया कि एसएसएमबी को खुला छोड़ा गया है, जबकि धर्मसभा इंटर कॉलेज, एसएस लॉ कॉलेज और एसएस कॉलेज को भी तीन दिनों के लिए एसआईटी ने अपने कब्जे में ले लिया है।

उल्लेखनीय है कि गुरुवार रात एसआईटी ने रिजर्व पुलिस लाइन में चिन्मयानंद से पूछताछ की। इस दौरान चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह भी मौजूद थे।

कथित तौर पर चिन्मयानंद से वायरल वीडियो को लेकर पूछताछ की गई, जिसमें वह एक लड़की से मसाज कराते दिख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हालांकि उन्होंने सभी आरोपों से इंकार किया है।

पूरा मामला ब्लैकमेलिंग और वसूली से जुड़ा हुआ हो सकता है:

चिन्मयानंद पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की अब तक हुई जांच से यह तकरीबन सामने आने लगा है कि पूरे षडयंत्र की जड़ में मुख्य वजह 'ब्लैकमेलिंग-वसूली' रही है! एसआईटी को अब सिर्फ यह सिद्ध करना है कि इनमें पीड़ित और मुलजिम कौन है? इस षडयंत्र की तह तक जाने पर ऐसा महसूस होता है कि क्या स्वामी से मोटी रकम वसूले जाने के बाद लड़की को ठिकाने लगाने का षडयंत्र भी रचा गया था? थाने में स्वामी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर ने मगर पूरे षडयंत्र को तहस-नहस कर दिया!

उत्तर प्रदेश पुलिस के एक आला-पुलिस अफसर ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर स्वीकारा, "कोई बड़ी बात नहीं कि इस मामले में किसी एक मुकाम पर दोनों ही पक्ष पीड़ित और दोनों ही पक्ष मुलजिम के रूप में सामने आकर खड़े हो जाएं। ऐसे में सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी होगी एसआईटी के सामने..उस मुश्किल घड़ी में एसआईटी के लिए मददगार साबित होगी, जांच की निगरानी के लिए गठित इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय विशेष पीठ।"

मामले की जांच एसआईटी के हवाले होने से पहले, पड़ताल से जुड़े एक महत्वपूर्ण आला-पुलिस अफसर ने नाम उजागर न करने की शर्त पर जो कुछ बताया, उसमें दम तो है मगर पहली नजर में वो सब अविश्वसनीय सा भी लगता है, मसलन, "ये पूरा मामला ब्लैकमेलिंग और वसूली से जुड़ा हुआ है। ब्लैकमेल कौन किसको कर रहा था? इसका जवाब तलाशने में ही जुटी है एसआईटी।"

हां इतना जरूर है कि स्वामी चिन्मयानंद पक्ष द्वारा 25 अगस्त को दर्ज कराई गई एफआईआर को कोरा कागज भर नहीं माना जा सकता। इसी एफआईआर में चिन्मयानंद ने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरों के बलबूते उनसे कुछ लोग 5 करोड़ की वसूली करना चाहते हैं।

अतीत में झांक कर देखा जाए तो, स्वामी की इस एफआईआर से पहले कहीं कोई बवाल नहीं शुरू होता है। इसके दो दिन बाद ही यानी 27 अगस्त को लड़की का पिता एक और एफआईआर दर्ज करवाता है। इस एफआईआर में लड़की के गायब हो जाने की और स्वामी चिन्मयानंद से जान के खतरे का मजमून दर्ज करवाया जाता है।

रहस्यमय तरीके से गायब लड़की, बाद में जिस नाटकीय तरीके से एक वीडियो (फेसबुक पर अपलोड) के जरिए खुद के सुरक्षित होने का सबूत पेश करती है, वह पूरे मामले को पलट देता है। इस एपिसोड से तय हो जाता है कि लड़की स्वामी के चंगुल में नहीं थी। न ही स्वामी चिन्मयानंद ने उसे कहीं छिपाया या फिर कथित रूप से 'ठिकाने' लगवा दिया था।

पूरे घटनाक्रम में हैरतंगेज मोड़ तब आता है जब, गायब लड़की संजय नाम के किसी अपने भाई के साथ दौसा (राजस्थान) में, शाहजहांपुर की पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अपर्णा गौतम के हाथ सकुशल लग जाती है। मतलब साफ हो जाता है कि लड़की स्वामी की गिरफ्त से कोसों दूर थी, जबकि उसकी बरामदगी से पहले तक हर किसी की नजर में चिन्मयानंद खटक रहे थे।

सवाल यह है कि चिन्मयानंद ने जैसे ही पांच करोड़ की वसूली की एफआईआर दर्ज कराई वैसे ही आखिर, लड़की और उसका कथित भाई संजय क्यों और कैसे अचानक गायब हो गए? पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब तक जो कुछ एसआईटी के सामने आया है, उसके नजरिये से ब्लैकमेलिंग-वसूली के इस मामले में कौन किस पर भारी पड़ रहा था? यह सवाल बाद का है। यह तय है कि, जिस तरीके से अब तक की जांच की कड़ियां जुड़-निकल कर सामने आ रही हैं। उससे संदेह पैदा होता है कि ब्लैकमेलिंग और वसूली के इस घिनौने खेल में, कहीं लड़की महज 'मोहरा' भर तो नहीं थी।

कहीं ऐसा तो नहीं था कि आपत्तिजनक वीडियो के बलबूते एक तरफ स्वामी से मोटी रकम वसूल ली जाती और उसके बाद मोहरा बनी (फिलहाल पीड़िता) कानून की छात्रा को खतरनाक षडयंत्र के तहत यूपी से दूर राजस्थान के दौसा या उसके आसपास (जहां छात्रा यूपी पुलिस को एक लड़के के साथ होटल में मिली) इलाके में कथित रूप से 'ठिकाने' लगा दिया जाता।

जब स्वामी चिन्मयानंद से मोटी रकम मिल ही जाती तो फिर, लड़की को आखिर नुकसान क्यों पहुंचाया जाता? जैसे सवाल के जवाब में यूपी पुलिस में उप-महानिरीक्षक स्तर के एक आला-अफसर का तर्क है, "करोड़ों रुपये की वसूली से बौखलाये स्वामी चिन्मयानंद कहीं लड़की के करीब पहुंचकर पूरे मामले का भंडाफोड़ न कर दें। पहली तो यह शंका रही होगी। दूसरी वजह, स्वामी से रुपये झटकने के बाद, लड़की ही कहीं कोई तमाशा या बवाल न खड़ा कर दे।"

ऐसे में रुपये वसूलने के बाद लड़की को ठिकाने लगा देना ही सबसे कारगर रास्ता अपराधियों-ब्लैकमेलरों को नजर आ रहा हो! इसी योजना के तहत युवती को बहला-फुसलाकर यूपी से दूर राजस्थान ले जाया गया हो। ताकि दूर-दराज इलाके में लड़की के साथ अनहोनी घटने पर उसका ठीकरा भी स्वामी के सिर पर ही फूटता! और स्वामी से वसूली करने वालों के रास्ते का कांटा (पीड़ित लड़की) भी हमेशा-हमेशा के लिए साफ हो जाता। फंसते तो किसी न किसी कांड को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले स्वामी चिन्मयानंद!

एक आला-पुलिस अधिकारी के मुताबिक, "अच्छा यह हुआ कि रुपये वसूलने की कोशिश में जुटा गैंग स्वामी से रकम ऐंठते ही लड़की को कोई नुकसान पहुंचा पाता, उससे पहले ही 25 अगस्त को स्वामी चिन्मयानंद ने थाने में ब्लैकमेल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी। मामला हाईप्रोफाइल था। सो पुलिस भी आनन-फानन में उसके खुलासे में लग गई। अचानक शाहजहांपुर पुलिस के मामले में उतर जाने से, हड़बड़ाये षडयंत्रकारियों की पूरी स्क्रिप्ट का ही मटियामेट हो गया।"