उदय बुलेटिन
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chandrayaan 2 vikram lander
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चंद्रयान 2: विक्रम के लैंडिंग के दौरान अंतिम समय में यहां हो गई समस्या

चंद्रयान 2 भारत का एक ऐसा मिशन है जिसपर सिर्फ देश के लोगों की ही नहीं बल्कि दुनिया भर की नजर टिकी हुई थी लेकिन कल की रात लैंडर विक्रम से संपर्क टूट जाने के कारण पूरा देश निराश हो गया।

Puja Kumari

Puja Kumari

जैसा कि आप सभी जानते हैं कल रात भारत का सबसे खास मिशन चंद्रयान 2 सफल होने वाला था लेकिन लास्ट मिनट में कुछ ऐसा हुआ की सभी के चेहरे पर निराशा आ गयी। 48 दिन का सफर पूरा करते हुए चंद्रयान 2 का विक्रम चाँद के साउथ पोल पर लैंडिंग करने वाला था पर अपनी मंजिल पर पहुंचने के बस कुछ मिनट की दूरी पर जाकर विक्रम का सम्पर्क टूट गया। सबकुछ सही चल रहा था लेकिन अंतिम समय में ऐसी अनहोनी हो गई। अब जैसा कि इस मिशन में हर किसी की दिलचस्पी इतनी ज्यादा बढ़ गयी थी कि लोग इस मिशन के एक एक दिन का फॉलोअप जाना करते थें। हालांकि कल जो हुआ उसके बाद इसरो का कहना है कि ये मिशन पूरी तरह से फेल नहीं हुआ बल्कि सिर्फ 5% ही त्रुटि आई है।

chandrayaan 2 vikram lander
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आखिर लास्ट मोमेंट में कहांं हुई गड़बड़

अब कई लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि आखिर अंतिम क्षण में जब चंद्रयान 2 का विक्रम लैंडर अपनी मंजिल से 35 किलोमीटर दूर एक ऑर्बिट में चाँद के सतह पर पहुंचने के लिए चक्कर काट रहा था ताकि वो सही समय देखते हुए अपने लैंडिंग स्पॉट जो की पहले से तय था वहां पहुंच सके। पर इसी बीच इसरो सेंटर बैंगलोर जहां से इस पूरे मिशन पर नजर रखी जा रही थी वह निराशा छा गयी। तो आइए जानते है कि कब, क्या और कैसे हुआ ....

ये पूरी घटना रात के 1 बजे से 2:30 बजे के बीच की है।

1:04 मिनट पर इसरो को चांद के दृश्य नजर आते हैं जहाँ विक्रम अपनी एंट्री के लिए चाँद के चक्कर काट रहा होता है।

1:22 मिनट पर पीएम मोदी इसरो सेंटर पहुंचते हैं सबकी नजरों में वो खुशी व उल्लास नजर आता है।

1:37 पर विक्रम चाँद की सतह पर आगे बढ़ता है, ये सबसे मुश्किल समय था क्योंकि यहां से सारी प्रक्रिया आटोमेटिक ही होनी थी।

जब विक्रम की यात्रा शुरू हुई तो वह 21,600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा होता है लेकिन यहाँ अब उसके रफ्तार को कम किया जाता है यानी कि ब्रेक लगाया जाता है, इसके रफ्तार को कम कर करीब 7 किलोमीटर प्रति घंटे पर लाना था ताकी वो चांद की सतह पर 15 मिनट में सुरक्षित लैंडिंग कर सके। सबकुछ सही चल रहा था विक्रम ने ये स्पीड का भी पड़ाव सही रूप से पर कर लिया था।

1:48 मिनट विक्रम चांद की सतह से महज 5 किलोमीटर ऊपर था 90 सेकेंड में वह लैंड करने वाला था। अब एक बार फिर से स्पीड ब्रेक का दूसरा पार्ट स्टार्ट होता है पर विक्रम को पहले चरण पार किए हुए अभी 30 से 40 सेकंड ही बिते थें कि तभी एकाएक एकदम से सन्नाटा से छा गया।

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समझ नहीं आ रहा था क्या हुआ? 1:54 पर दृश्य दिखना भी बंद हो गया अब हर कोई संसय में था।

काफी गहमागहमी के बाद 2:19 पर एक अनाउंसमेंट होती है जो की इसरो के चेयरपर्सन करते हैं, जिसमे वो कहते हैं कि विक्रम का संपर्क 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाकर टूट गया है अभी आंकङों के विश्लेषण के लिए इंतजार करना होगा। ये अनाउंसमेंट सुनते ही सभी देशवाशियों के चेहरे पर एकाएक मायूसी छा गई।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दूसरे पार्ट में ब्रेक लगाने के दौरान लैंडर विक्रम अपने निर्धारित सतह से हट गया जिसकी वजह से इसरो से उसका संपर्क टूट गया।

वहीं इसरो की माने तो मायूस होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सिर्फ संपर्क टूटा है ऑर्बिटर अभी भी अपना काम कर रहा है, जिसके जरिये वो चाँद से कई सारी जानकारी इकट्ठी करेगा और धरती पर भजेगा। कुल मिलाकर आप ये समझ सकते हैं कि इस मिशन में खतरा अगर हुआ भी है तो विक्रम और प्रज्ञान पर हुआ है वो भी अभी कंफर्म नहीं है, क्योंकि सिर्फ संपर्क ही टूटा है।