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मोहम्मद सनाउल्लाह
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पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह का नाम NRC से बाहर, अब हो रही राजनीति  

असदुद्दीन ओवैसी ने लगाया भेद-भाव का आरोप !  

AKANKSHA MISHRA

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आज असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) की अंतिम सूची जारी की गई। इस सूची से 19 लाख से अधिक लोगों का नाम बाहर रखा गया, जिसमें भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह का नाम शामिल है। बताया जा रहा है कि उन्हें इसी साल विदेशी न्यायाधिकरण के तहत विदेशी नागरिक घोषित किया गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने असम हाई कोर्ट में फरियाद लगाई है। हालांकि यह मामला अभी हाई कोर्ट में लंबित है। मोहम्मद सनाउल्लाह के अनुसार इस लिस्ट में ना तो उनका नाम है और ना ही उनके तीनों बच्चों का नाम है, लेकिन उनकी पत्नी का नाम इस लिस्ट में रखा गया है।

लिस्ट में नाम शामिल नहीं किये जाने पर मोहम्मद सनाउल्लाह ने कहा कि " मुझे सूची में अपने नाम के होने की उम्मीद पहले से नहीं थी क्योंकि मेरा मामला अभी भी उच्च न्यायालय में लंबित है, मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और मुझे विश्वास है कि मुझे न्याय मिलेगा, लेकिन लिस्ट में मेरे तीनों बच्चों का नाम भी नहीं है। अब उनको भी कोर्ट के चक्कर काटने को मजबूर होना होगा।"

मोहम्मद सनाउल्लाह का नाम NRC सूची में शामिल नहीं किये जाने के बाद अब इसपर राजनीति शुरू हो गई है, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर हमला किया। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि "भारतीय जनता पार्टी NRC को संप्रदयिक रंग देना चाहती है। बीजेपी ने हिन्दू-मुस्लिम को अलग करने के लिए NRC बनाया है। भारतीय जनता पार्टी ने जो असम में किया, उससे सबक सीखना चाहिए।”

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि "मुझे संदेह है कि नागरिक संशोधन विधेयक के माध्यम से भाजपा सिर्फ गैर-मुसलमानों को नागरिकता देना चाहती है, जो की समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा। मुझे असम के कई लोगों ने बताया है कि उनके माता-पिता का नाम तो लिस्ट में शामिल हैं, लेकिन उनके बच्चों के नाम लिस्ट से गायब है। उदाहरण के लिए, मोहम्मद सनाउल्लाह, उन्होंने भारतीय सेना में अपनी सेवा दी है। उनका मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। मुझे यकीन है कि उन्हें कोर्ट से न्याय मिलेगा।”

आपको बता दें कि, भारतीय सेना से जूनियर कमीशंड अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए मोहम्मद सनाउल्लाह को सरकार ने साल 2008 में उनकी नागरिकता ख़ारिज कर उन्हें दोबारा अपनी नागरिक साबित करने का आदेश दिया था। लेकिन मोहम्मद सनाउल्लाह साल 2018 में विदेशी न्यायाधिकरण के सामने उपस्थित हुए। जिसके बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा गया। 52 वर्षीय मोहम्मद सनाउल्लाह साल 1987 में भारतीय सेना से जुड़े थे