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Arun Jaitley passes away
Arun Jaitley passes away|Social Media
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पीएम मोदी के सबसे भरोसेमंद थे अरुण जेटली , देश उनके योगदान को हमेशा याद करेगा !

अलविदा कह गए बीजेपी के ‘अरुण’

AKANKSHA MISHRA

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भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता, प्रखर वक्ता, विख्यात विचारक, प्रतिष्ठित अधिवक्ता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का आज निधन हो गया। 67 वर्षीय अरुण जेटली 9 अगस्त से राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती थे और आज 12 बज कर 07 मिनट में उन्होंने अंतिम साँस ली। कल सुबह 10 बजे उनके पार्थिव शरीर को भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में रखा जाएगा ताकी लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सके, जिसके बाद दोपहर 2 बजे निगमबोध घाट में उनका अंतिम संस्कार होगा।

अरुण जेटली गुरुवार से ICU में थे, 9 वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम लगातार उनके इलाज में जुटी थी। एम्स अस्पताल की मीडिया प्रभारी आरती विज ने अरुण जेटली के निधन की खबर देते हुए कहा कि 'हमें बड़े दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि अरुण जेटली जी का आज दोपहर 12 बज कर 07 मिनट में निधन हो गया।'

अरुण जेटली के निधन की खबर के बाद से ही पूरे देश भर में शोक की लहर फ़ैल गई। भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में लगे झंडे को आधा झुका दिया गया।

अरुण जेटली
अरुण जेटली
Social Media

अरुण जेटली का हाल जानने के बाद तमान पार्टी के नेता, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, कार्यकर्ता उन्हें याद कर रहे हैं। जेटली के निधन की खबर मिलते ही भारतीय जनता पार्टी के कई नेता एम्स पहुंच गए और पार्थिव शरीर का दर्शन किया। एम्स में जांच के बाद उनके पार्थिव शरीर को A-44, कैलाश कॉलोनी स्थित उनके आवास पर लाया गया। जहां गृह मंत्री अमित शाह , रेल मंत्री पियूष गोयल, सहित तमाम बीजेपी नेताओं के पहुंच कर उनके पार्थिव शरीर को नमन किया।

अरुण जेटली के निधन की खबर मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें याद करते हुए लिखा कि 'अरुण जेटली एक महान राजनीतिक योद्धा थे, और न्याय जगत के जाने-माने हस्ती थे, देश उनके योगदान को कभी नहीं भूलेगा, उनका इस तरह जाना बेहद निराशा जनक है। प्रधानमंत्री मोदी ने जेटली जी की पत्नी संगीता और उनके बेटे रोशन से बात कर दुख जताया।’

अरुण जेटली का व्यतिगत जीवन

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का जन्म दिल्ली के महाराज किशन जेटली और रतना प्रभा जेटली के घर में हुआ। उनके पिता वकील थे और वहीं से उन्हें भी वकील बनने की प्रेरणा मिली। अरुण जेटली की शुरुआती शिक्षा नई दिल्ली स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने साल 1973 में दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से स्नातक की शिक्षा ली। साल 1977 में उन्होंने दिल्ली विश्‍वविद्यालय से ही कानून की पढ़ाई पूरी की। अपने शिक्षा के दौरान जेटली पढ़ाई के साथ साथ अन्य गतिविधियों में भी आगे थे और कानून की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें 1974 में छात्र संगठन से जुड़े।

अरुण जेटली ने साल 1982 में संगीता जेटली से शादी की, उनके दो बच्चे हैं बेटी का नाम सोनाली और बेटे का नाम रोहन है। जेटली के दोनों बच्चे उनकी ही तरह वकील हैं।

ऐसे बनाई बीजेपी में पैठ

अरुण जेटली ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत साल 1980 में की थी। उस साल उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। लेकिन उन्हें पहचान 1991 में मिली जब जेटली भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने जिसके बाद उन्हें अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार के दौरान कई विभागों में मंत्री बनने का मौका मिला। 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान जेटली भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता भी रहे थे।

भारतीय जनता पार्टी ने नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने साल 1999 में लोकसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाई, अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और अरुण जेटली को सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री व विनिवेश राज्य मंत्री का कार्यभार दिया गया। इसके बाद साल 2000 में जब कानून मंत्री राम जेठमालानी ने अपने पद से इस्तीफा दिया तो जेटली को कानून, न्याय एवं कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

साल 2009 में जेटली राज्य सभा में विपक्ष के नेता भी चुने गए थे।

मोदी सरकार के संकटमोचन

26 मई 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो अरुण जेटली को वित्त मंत्री के रूप में चुना गया। अरुण जेटली अर्थव्यस्था के ऐसे पायलट बने जिसने कभी कार चलाना नहीं सीखा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वित्त मंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने देश की अर्थव्यस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किया। GST, नोटबंदी, आर्थिक आधार पर आरक्षण जेटली की ही देन है।

अरुण जेटली एक ऐसे नेता थे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ हर वक्त खड़े रहे। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब से उनकी दोस्ती जेटली से थे। साल 2005 में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और अमित शाह पर सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले का आरोप लगा था तब राम जेठमालानी अमित शाह की तरफ से सिफारिश कर रहे थे, लेकिन इस केस के लिए मालानी से ज्यादा मेहनत जेटली कर रहे थे, अमित शाह के लिए सबूतों का बंदोबस्त करना जेटली के जिम्मे था, हालांकि अमित शाह को इस मामले में साल 2010 में जेल जाना पड़ा।

आज जेटली के निधन पर पूरा देश दुखी हैं, राजनीति में आने वाले हर एक व्यक्ति के लिए अरुण जेटली एक ऐसे शिक्षक थे जिनसे हर कोई सिखना चाहता है। जेटली का कोई दुश्मन नहीं है, विपक्ष के नेता भी जेटली की तारीफ करते नहीं थकते। पत्रकारिता जगत में भी जेटली का नाम विख्यात है, शशि थरूर, कारण थापा जेटली के परम मित्र हैं और मीडिया से अपनी इसी दोस्ती की वजह से उन्हें 1999 में बीजेपी का प्रवक्ता बनाया गया था।

अरुण जेटली जैसे महान राजनेता, वक्ता और प्रशासक के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन को कुछ शब्दों में समेटा नहीं जा सकता।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे !