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समान नागरिक संहिता
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देश में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ लागू करने के मूड में हैं सरकार, होंगे ये फायदे 

पिछले कुछ दिनों से देश के कई सारे कानूनों में बदलाव किए गए है, जिससे जनता को राहत भी मिली है, लेकिन तीन तलाक व धारा 370 के बाद अब सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने के मूड में है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

हम भारत देश के नागरिक हैं और इस देश में रहने वाले हर नागरिक को यहां के संविधान के बारे में पता है। यहां अक्सर ही समानता, धर्मनिरपेक्षता व आजादी जैसी बातें होती रहती है। इतना ही नहीं ये बातें तो हमारे देश के संविधान में भी निहित है, पर यह बस लिखित ही है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस देश में रहने वाले हर नागरिक को समानता की बातें सुनने को तो मिल जाती है लेकिन जब भी बात उसके धर्म व आजादी पर आती है तो यह सारे कानून फेल हो जाते हैं।

जी हां धर्म और आजादी को लेकर हर किसी का अपना एक अलग ही मंतव्य होता है चाहे वो किसी भी तरह का मुद्दा हो शादी, तलाक या फिर जायदाद हर विषय में धर्म के ठेकेदारों ने अपने हिसाब से नियम कानून बनाकर रखे हुए है जिसे उस समुदाय के लोगों को मजबूरन मानना पड़ता है क्योंकि हर धर्म व जाति के लोग शादी-विवाह, प्रॉपर्टी, जैसे मुद्दे को लेकर अपना पर्सनल लॉ बनाते हैं और यह अधिकार उन्हें पर्सनल लॉ के कारण मिला हुआ है जिसका दुरुपयोग होते हुए नजर आ रहा है।

इसका सबसे अच्छा उदाहरण आपको ‘तीन तलाक’ से मिल सकता है जिसे लेकर पिछले माह मोदी सरकार ने कड़ा फैसला भी लिया। इसके अलावा भारत के ही अपने हिस्से जम्मू कश्मीर से धारा 370 को सरकार ने हटाकर एक मुद्दे को फिर से जीवंत कर दिया है और वो है 'एक देश एक कानून' का जिसे ‘समान नागरिक संहिता के नाम से भी जानते हैं।

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सरकार जोरों-शोरों से इस विषय पर लगी हुई है कि जो भारतीय संविधान में लिखित है उसे अब असलियत में मानने का वक्त आ चुका है और यही कारण है कि जल्द से जल्द मोदी सरकार समान नागरिक संहिता जैसे कानून को लागू करने के प्रयास में है। पर बाकी मुद्दों की तरह विपक्ष को इस मुद्दे से भी काफी समस्या है और धारा 370 व तीन तलाक जैसी कानूनों को खत्म करने पर विपक्ष ने जैसे तहलका मचाया था कुछ ऐसा ही समान नागरिक संहिता को लेकर भी कर रहा है। अब आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर ये ‘समान नागरिक संहिता’ (uniform civil code) है क्या ? और इसके देश में लागू होने से क्या-क्या फायदा होगा ?

क्या है समान नागरिक संहिता (uniform civil code)

सबसे पहले तो यह जान लें कि समान नागरिक संहिता के जरिए एक देश में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक ही कानून होगा जिसका निर्माण केंद्र सरकार करेगी और यह नियम सभी को मानना पड़ेगा चाहे वो किसी भी धर्म,समुदाय या फिर जाति का हो। इसके अलावा शादी विवाह, तलाक या फिर प्रॉपर्टी से संबंधित सभी मामलों में केंद्र सरकार द्वारा निहित कानून का ही पालन करना होगा। हालांकि यह भी सच है कि इस समय हमारे देश में सभी धर्म के लिए अपने अपने पर्सनल लॉ बने हुए हैं लेकिन ‘समान नागरिक संहिता यानि की यूनिफॉर्म सिविल कोड (uniform civil code) के लागू होने से हर किसी के लिए एक और सिर्फ एक कानून होगा।

समान नागरिक संहिता के लागू होने से होंगे ये बदलाव

* अगर हमारे देश में यह कानून लागू हो जाता है तो इससे सबसे पहले तो न्यायपालिकाओं पर से प्रेशर कम होगा, जो कि अलग-अलग कानून के होने से बढ़ा हुआ है।

* इतना ही नहीं इस नियम के लागू होने से कोर्ट में पड़े सालों पुराने मामलों का निपटारा जल्द से जल्द होगा।

* इसके अलावा सभी के लिए जब देश में एक कानून बन जाएंगे तो लोगों पर अत्याचार होना बंद होगा और एकता में बढ़ोत्तरी होगी व धर्म के ठेकेदारों की मनमानी नहीं चलेगी।

* जैसा कि हमने पहले भी कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की छवि को प्रदर्शित करता है ऐसे में देश में हर धर्म व नागरिक के लिए एक कानून का होना बेहद जरूरी है।

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क्यों हो रहा है इसका विरोध

जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं उन्हें डर है कि इस कानून के जरिए सभी धर्मों पर हिंदू धर्म के कानून को जबरन लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। समझ तो यह नहीं आता है कि भारत के नागरिक जो इस कानून का विरोध कर रहे हैं उन्हें ऐसा क्यो लगता है, जबकि उनको धर्मनिरपेक्ष राज्य में रहने व खुली आजादी देने की सरकार पूरी कोशिश कर रही है। वैसे इस कानून को लागू करने वाला भारत पहला देश नहीं है बल्कि इससे पहले भी कई पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे अन्य देशों में लागू हैं।