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जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बहाल 
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जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों में 2G मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल, लेकिन घाटी में अब भी पाबंदी 

श्रीनगर में लैंडलाइन सेवा शुरू 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब राज्य के हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। बीते 12 दिनों से जम्मू-कश्मीर के लोग सुरक्षाबलों के कड़े पहरे में जी रहे थे, लेकिन अब उन्हें राहत दी जा रही है और राज्य के पांच जिले में अब 2G इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है। जिसमें जम्मू, रियासी, सांबा, उधमपुर और कठुवा शामिल हैं, वहीँ कश्मीर घाटी में अब भी पाबंदी जारी है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने कहा कि 'जम्मू-कश्मीर के हालात अब सामान्य हो रहे हैं, लोग अपने काम पर लौट रहे हैं। सरकारी संस्थान भी पूरी तरह खुल चुके है, स्कूल-कॉलेज 15 अगस्त के पहले ही खोल दिए गए थे। अब हम कश्मीर घाटी के स्कूलों को खोलने की तैयारी में हैं, जल्दी ही वहां इंटरनेट सेवा भी बहाल कर दी जाएगी। बीते 12 दिनों से लॉकडाउन के दौरान कश्मीर घाटी में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई है और ना कोई अनहोनी, और ना पत्थरबाजी की खबर आई है। इसलिए हमने फैसला लिया है कि सारे प्रतिबंध अब घाटी से भी हटा दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि अब कुछ ही दिनों में पूरे जम्मू-कश्मीर के हालात में सुधार होने के साथ 'वहां के लोगों का जीवन पूरी तरह सामान्य हो जायेगा।'

अब भी जेल में हैं नेता

जम्मू-कश्मीर के नेता अब भी हिरासत में हैं। बीते दिन जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ़्ती की बेटी ने गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने गृह मंत्री ने मांग करते हुए कहा था कि ‘जम्मू-कश्मीर के नेताओं को रिहा किया जाये।'

लेकिन जब राज्य के मुख्य सचिव बी.वी.आर. सुब्रमण्यम से नेताओं की रिहाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि -

विपक्षी पार्टी के नेताओं को ऐहतियात के तौर पर निगरानी में रखा गया है। उन्हें अगर छोड़ दिया गया तो राज्य की कानून-व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी।

राम माधव बोले- जब अनुच्छेद 370 लगाते समय नहीं पूछा गया था, जो इसे हटाने से पहले क्यों पूछते

जम्मू-कश्मीर के हालात पर भारतीय जनता पार्टी के नेता राम माधव का कहना है कि 'मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा कर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सच्ची श्रद्धांजलि दी है, यह अटल का अधूरा सपना था , जिसे मोदी जी ने पूरा किया। कुछ विपक्षी दल इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोई उनसे पहले पूछे कि क्या जम्मू-कश्मीर में यह अनुच्छेद लागू करते समय उनसे पूछा गया था, जो हम हटाते समय उनसे पूछते ?

उन्होंने कहा कि, अपने देश में, अपने ही घर में कश्मीरी पंडित प्रवासी बन का रह गए हैं, कुछ पाकिस्तानी लोग भी यहां आकर बसे हैं। हम कश्मीरी पंडितों को उनके अधिकार देना चाहते हैं। राज्य में अब कश्मीरी पंडितों की वापसी होगी।

बीजेपी नेता राम माधव ने बताया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सीटों का परिसीमन फिर से करना होगा। यहां 114 सीटें होंगी - उनमें से 24 पीओके के लिए हैं, वे खाली रहेंगे और जम्मू-कश्मीर की शेष 90 सीटों के लिए मतदान होंगी।

आपको बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया था और प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बांट दिया गया था । जिसके बाद से ही राज्य में पाबंदी लगा दी गई थी।