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पुलवामा हमले से पहले ही बदलने वाली थी कश्मीर की तक़दीर, लेकिन रणनीति बदलनी पड़ी, जानें क्यों ?

मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले ही अनुच्छेद 370 को हटाना चाहती थी। 

AKANKSHA MISHRA

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भारतीय जनता पार्टी जम्मू एवं कश्मीर पर लागू अनुच्छेद 370 का हमेशा से विरोध करती रही है और इसे हटाने को लेकर लंबे समय से काम कर रही डोभाल। लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी यह अस्थाई अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर से चिपका हुआ था और राज्य के विकास में बाधक बन रहा था। पिछली सरकारों ने अपना वोट बैंक बचाये रखने के लिए इसे हटाने की कभी हिम्मत नहीं की लेकिन अमित शाह ने गृह मंत्री की कुर्सी संभालने के बाद से ही इस अनुच्छेद पर काम करना शुरू कर दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार जब अमित शाह देश के गृहमंत्री नियुक्त हुए उसके बाद से ही उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए पीएमओ कार्यालय के शीर्ष अधिकारी, NSA अजित दोभाल और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से इस मामले में सलाह लेना शुरू कर दिया था। गृह मंत्री बनते ही अमित शाह ने सबसे पहले जम्मू एवं कश्मीर का दो दिवसीय दौरा किया और वहां के हालातों को समझा। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मालिक को मोदी सरकार की इस योजना की जानकारी तब हुई जब NSA अजित दोभाल जुलाई महीने में कश्मीर के गुप्त दौरे पर थे।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदल जाएगी कश्मीर की तक़दीर 
अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदल जाएगी कश्मीर की तक़दीर 
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2014 का चुनाव जीतने के बाद ही अनुच्छेद 370 हटाना चाहती थी बीजेपी

जानकारों के मुताबिक जब 2019 में प्रधानमंत्री मोदी बड़े बहुमत के साथ दोबारा देश के प्रधानमंत्री बने तो उनकी पहली योजना जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर थी। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन में ही कश्मीर को लेकर एक नई रणनीति बनाई और विचारों का आदान-प्रदान किया ।

सूत्र बताते हैं कि, मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में ही कश्मीर के मसले को हल कर लेना चाहती थी, लेकिन सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं था। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी को अपने दूसरे कार्यकाल का इंतज़ार करना पड़ा। हालांकि मोदी सरकार 2019 के फ़रवरी महीने में अनुच्छेद 370 में फेरबदल को लेकर बिल लाने वाली थी , लेकिन 14 फ़रवरी को हुए पुलवामा हमले के बाद इसे टाल दिया गया।

अनुच्छेद 370 हटना अमित शाह की प्राथमिकता

जब 2019 के लोकसभा चुनाव को जीत कर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई और अमित शाह गृह मंत्री बने तो उनकी पहली प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर थी, उन्होंने इस मसले से निपटने के लिए सबसे पहले क़ानूनी और राजनीतिक पहलुओं का खाका बनाया। इस दौरान उन्होंने कई बार जम्मू-कश्मीर का गुप्त दौरा भी किया। क़ानूनी विकल्पों की जानकारी ली और राज्यसभा में इस बिल के समर्थन में फ्लोर प्रबंधन का काम किया।

अमित शाह कई दलों के नेताओं से मिले और उन्हें बताया की देश हित के लिए यह बिल जरुरी है और यही वजह ही कि आज बीजेपी की धुरविरोधी पार्टी बसपा, आप जैसे दल सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। आख़िरकार कैबिनेट ने हिम्मत दिखाकर और जम्मू कश्मीर के लोगों के हित के लिए यह फैसला ले ही लिया है। मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक काम कर ही गया।