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पीड़ित महिला देवरतीया
पीड़ित महिला देवरतीया|Social media 
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प्रधानमंत्री शौचालय योजना में बड़ा गड़बड़ झाला, पात्र दर-दर भटकने को मजबूर

मोदी शासन को कुशासन में बदलने पर आमादा हैं सरकारी अधिकारी !

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

सरकार भले ही कतार के अंत में खड़े व्यक्ति तक पहुंचने का दावा करे, लेकिन जमीनी हकीकत न सिर्फ इससे इतर है बल्कि विपरीत भी है। एक ओर तो सरकार अपने तमाम दावों और योजनाओं के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन होने का दम भरती है लेकिन जैसे ही आप ग्रामीण जीवन की तरफ कदम उठाते हैं, इन तमाम योजनाओं का दम निकलता हुआ दिखाई देता है।

पीड़ित महिला देवरतीया
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बाँदा जिले के कमासिन थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम डिघोरा में दिव्यांग महिला सरकार की तमाम योजनाओं से ठीक उसी प्रकार वंचित है जैसे ये योजनाओं के बनते समय ही यह निश्चित किया गया था किसी भी पात्र को इन योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।

ग्राम डिघोरा की यह दिव्यांग महिला दोनों पैरों से न सिर्फ पूरी तरह अक्षम है बल्कि उसे चलने में भी जमीन पर घिसट कर चलना होता है। ऐसी स्थिति में बरसात के मौसम में घर से बाहर निकलना भी एक कष्टकारी कार्य माना जाएगा। लेकिन प्रधान और ग्राम सचिव की अकारण नींद की वजह से पात्र लोगों को दर-बदर घूमना पड़ रहा है।

कई बार किया है आवेदन

इस दिव्यांग महिला देवरतीया ने आवास और शौचालय के लिए न सिर्फ ग्राम प्रधान और ग्राम विकास सचिव के साथ-साथ ग्राम विकास अधिकारी के पास लिखित आवदेन दिया है बल्कि इस बाबत ऑनलाइन आवेदन भी किया है। लेकिन आवेदन के बाद जांच सम्बंधित प्रक्रिया स्थानीय अधिकारियों द्वारा ही पूरी की जाती है और ये सरकारी अधिकारी इस तरह की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को देने से पहले मोटी रिश्वत की अपेक्षा करते हैं और पैसे के आभाव में अपात्र लोगों को योजना का लाभ देकर कोटा पूरा किया जाता है , जिसका खामियाजा पात्र लोगों को भुगतना पड़ता है।