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लोकसभा में अमित शाह ने दिखाए तेवर कहा, जम्मू कश्मीर के लिए जान भी दे देंगे 

दिल दिया है, जान भी देंगे..... ये कश्मीर तेरे लिए !

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

जम्मू एवं कश्मीर के पुनर्गठन का बिल संसद में पेश हो चुका है, सरकार तथा विपक्षी दलों के बिच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है। कांग्रेस ने अनुच्छेद 370 का विरोध करते हुए कहा कि आज तक ऐसा नहीं हुआ था कि किसी राज्य को रातों-रात केंद्र शासित प्रदेश में बदला दिया जाए, यह संविधान के नियमों का उल्लंघन है। इसपर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा आप बोलिए कौन सा नियम तोड़ा गया ? जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है, अगर जरूरत पड़ी तो हम इसके लिए अपनी जान भी दे देंगे।

कांग्रेस ने पूछा कश्मीर आंतरिक मसला कैसे ?

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस बिल पर चर्चा करते हुए गृहमंत्री अमित शाह से सवाल किया और कहा कि "आपने कहा कि कश्मीर हमारा आंतरिक मसाला है, लेकिन 1948 से कश्मीर मसला UN की निगरानी में हैं, फिर यह हमारा आंतरिक मसला कैसे हो गया ? हमने पाकिस्तान के साथ लौहार घोषणा और शिमला समझौता किया है, फिर यह आंतरिक मसला है या द्विपक्षीय मसला? जब डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मसले पर वार्ता की पेशकश की थी तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि यह हमारा द्विपक्षीय मसला है , इसमें हस्तक्षेप ना करें फिर यह आंतरिक मसला कैसे हो गया ?

कश्मीर के लिए जान भी दे देंगे

इस बिल पर जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि "कश्मीर को लेकर नियम-कानून और संविधान में बदलाव से अब हमें कोई नहीं रोक सकता। कश्मीर भारत का अंग है और इस पर संसद ही सर्वोच्च है। इस बिल के पास होने के बाद जम्मू-कश्मीर में दो केंद्र शासित प्रदेश होंगे। जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख है। जम्मू-कश्मीर में अपनी विधानसभा होगी और चुने हुए जन प्रतिनिधि मुख्यमंत्री बनेगें।

अमित शाह ने कहा कि सदन के पास जम्मू-कश्मीर पर फैसला लेने का अधिकार है, कानून बनाने का अधिकार है और जब मैं जम्मू कश्मीर बोलता हूं तो वो अखंड कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन दोनों इसका हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है। कश्मीर की सीमा में POK भी आता है और है, इसके लिए जान दे देंगे।

संविधान का उल्लंघन है यह आदेश

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि "भारतीय संविधान में केवल अनुच्छेद 370 ही नहीं है। इसमें अनुच्छेद 371 A से I तक है। जो नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्रप्रदेश , सिक्किम आदि राज्यों को विशेष अधिकार प्रदान करते है। आज अगर अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया जाएगा तो इन राज्यों को क्या संदेश मिलेगा ? आप कल उत्तर पूर्वी राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करके अनुच्छेद 371 को भी निरस्त कर सकते हैं? लेकिन ऐसा कर के आप किस तरह का संवैधानिक सन्देश दे रहे हैं। ?

कुछ कांग्रेस नेताओं की अपनी पार्टी से अलग राय

कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भले ही संसद में सरकार के इस फैसले का विरोध किया हो लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। रायबरेली सदर की विधायक अदित सिंह ने मोदी सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि "मैं सरकार के इस फैसले के साथ हूं, यह कश्मीर के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगा। यह यह ऐतिहासिक फैसला है, इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। मैं एक विधायक के तौर पर इस फैसले का स्वागत करती हूं।”

पहले कांग्रेस का इतिहास जान लें फिर पार्टी में रहे

कांग्रेस नेता गुलाम नवी आजाद से जब सवाल किया गया कि 'कांग्रेस के कुछ नेता आर्टिकल 370 को हटाए जाने का समर्थन कर रहे हैं, इसपर उन्होंने कहा कि 'अरे जिन लोगों को कांग्रेस के इतिहास और जम्मू-कश्मीर के इतिहास का पता नहीं उनसे मुझे कुछ लेना देना नहीं है। वो पहले जम्मू-कश्मीर और कांग्रेस का इतिहास पढ़ ले फिर पार्टी में रहे।