उदय बुलेटिन
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unlawful activities prevention amendment act 2019
unlawful activities prevention amendment act 2019|Google
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राज्यसभा में पास हुआ UAPA Bill, ये हैं आतंकी घोषित करने के नए नियम

अब आतंकी घोषित होने के लिए संगठनों से जुड़ना ही आवश्यक नहीं बल्कि किसी भी आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने के शक के आधार पर भी आप पर ये टैग लगाया जा सकता है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

एक बार फिर से राज्यसभा में UAPA Bill 2019 (unlawful activities prevention amendment act) को पास कराकर मोदी सरकार ने बाजी मार ली है। आतंक के खिलाफ सख्ती को लेकर मोदी सरकार का यह बड़ा कदम बेहद ही सराहनीय है। हालांकि यह बिल लोकसभा में कब का पास हो चुका था, बस इंतजार था तो सिर्फ राज्यसभा में पास होने का जो कि कल यानि 2 अगस्त को पूरा भी हो गया।

इस बिल के पास होने से आतंकवादियों की परिभाषा ही बदल जाएगी, इतना ही नहीं इसके जरिए NIA का भी दायरा पहले से काफी ज्यादा बढ़ जाएगा। ऐसे में अब NIA (National Investigation Agency) का आतंकी गतिविधियों में जांच करने का काम और भी ज्यादा आसान हो जाएगा। इस बिल को अब राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया है और उनकी स्वीकृति से यह कानून भी बन जाएगा। खास बात तो यह है कि कानून बनने के बाद NIA किसी भी तरह की आतंकी घटनाओं पर लगाम लगा सकेगा।

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आखिर इस बिल पर क्यों हो रहा इतना बवाल

सबसे पहले बता दें कि जब 2 अगस्त को यह बिल राज्यसभा में पारित हुआ उस दौरान इसके पक्ष में 287 वोट पड़ें और विरोध में केवल 8 वोट। लेकिन फिर भी इसपर विपक्ष पार्टी बवाल किए हुए है। आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या है इस बिल में जो इतना बवाल मचा हुआ है ? आखिर सरकार ने इस बिल में ऐसा क्या बदलाव कर दिया है ?

सरल शब्दों में समझें तो UAPA bill 1967 के जरिए अगर किसी जुर्म में संलिप्त होने पर जांच एजेंसी को शक होता था तो वो उसे 3 श्रेणीयों में रखती थी, जैसे शक हुआ तो संदिग्ध, आरोप लगा तो आरोपी और आरोप साबित होने पर दोषी। नए संशोधन बिल यानि की UAPA bill 2019 में इस कानून को और भी कड़ा कर दिया गया है, जिसमें अब आतंकवाद से जुड़े किसी भी मामले में जांच एजेंसियां संदिग्ध को अब सीधे शक के बिनाह पर सीधे आतंकवादी ठहरा सकती है। जबकि पहले के कानून के अनुसार ये नियम सिर्फ आतंकवादी संगठनों पर ही लागू होता था, जिसमें जांच के जरिए अगर कोई संगठन आतंवादी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता था तो उसे सीधे बैन कर दिया जाता था।

विपक्ष का कहना है कि आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर संगठनों के बैन करने का कानून पहले से ही है फिर इस नए प्रावधान का क्या मतलब है ? जिसपर सरकार कहती है कि संगठनों के बैन करने पर उसमें संलिप्त व्यक्ति अन्य नए संगठन का निर्माण कर लेते हैं तो ऐसे में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगा पाना बेहद ही मुश्किल हो जाता है।

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कानून बनने के बाद आएगा बड़ा बदलाव

ध्यान रहे इस नए कानून के बनने के बाद जो भी व्यक्ति किसी भी तरह की आतंकी घटनाओं व गतिविधियों को अंजाम देते हैं, आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, आतंकवाद की तैयारी करते हैं या फिर आतंकवाद से किसी न किसी तरह जुड़े होते हैं उसे तुरंत आतंकवादी घोषित कर दिया जाएगा।

वहीं इसके अलावा जब किसी व्यक्ति को सरकार आतंकी घोषित कर देगी तो उसके बाद इस टैग को हटाने के लिए व्यक्ति को किसी कोर्ट में नहीं बल्कि सरकार की बनाई गई रिव्यू कमेटी के पास जाना होगा।

NIA अब साइबर क्राइम व मानव तस्करी जैसे मामलों में भी हस्तक्षेप कर पाएगा, अब से पहले ये एजेंसी सिर्फ आतंक से जुड़े मामलों की ही जांच करता था।

इसके अलावा NIA अब भारत से बाहर भी जांच कर सकता है अगर उस मामले में कोई भारतीय संलिप्त हो तो।

नए कानून के लागू होते ही NIA के डीजी आतंकी घोषित हुए व्यक्ति या फिर संगठनों की संपत्ति जब्त करने का आदेश देंगे। इससे पहले के प्रावधान में जिस राज्य में संपत्ति होती थी वहां के डीजीपी की स्वीकृति से ही उसे जब्त किया जा सकता था।

इसके अलावा नए कानून के लागे होने के बाद अब NIA का इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी भी आतंकवादी मामलों की जांच कर सकेगा।