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RTI संशोधन बिल 2019
RTI संशोधन बिल 2019|Google
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RTI संशोधन बिल पास होने के बाद आखिर क्यों हो रही है केंद्र सरकार की आलोचना ?

RTI में संशोधन के बाद विपक्ष के बाद सबसे ज्यादा चिंतित आम आदमी है क्योंकि इसमें कई ऐसे बदलाव हो गए हैं जिससे आम जनता को तमाम कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

जैसा कि आप भी जानते है की दोबारा से सत्ता में आये मोदी सरकार इस बार पहले से भी दोगुने जोश में है। तभी तो मोदी की सरकार बनते ही फटाफट सभी काम किये जाने लगे, सभी नेता मंत्री व अधिकारियों को उनके पद की शपथ दिलाने के अगले ही दिन उनकी जिम्मेदारियों का भी एहसास कराया गया। हालांकि दूसरी बार सत्ता में आने से पहले भी मोदी सरकार ने साफ तौर पर यह कह दिया था कि अगर वो फिर से सरकार बनाती है तो इस बार और भी ज्यादा जोश में काम करेगी, हुआ भी कुछ ऐसा ही इस बार संसद के सत्र की अवधि को 12 दिन के लिए बढ़ाया गया।

इसी बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया और वो था देश के संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी का, जिन्होंने सरकार से सत्र की अवधि को बढ़ाने का आग्रह किया ताकि सभी महत्वपूर्ण काम को खत्म किया जा सके। प्रहलाद जोशी का कहना था कि अभी तक कुल 17 महत्वपूर्ण बिल है जो लंबित है जिनमें से कुछ बिल ऐसे भी हैं जो सरकार के एजेंडे में सबसे टॉप पर हैं लेकिन अभी तक इनपर निर्णय नही लिया गया है। इन तमाम बिल में से एक बिल ऐसा था जिसके पास होते ही काफी हंगामा मच गया जिसका नाम है RTI Bill (सूचना का अधिकार विधेयक)

RTI संशोधन बिल 2019
RTI संशोधन बिल 2019
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लोकसभा से पास होकर जब ये बिल राज्यसभा में आया तो इसे सिलेक्शन कमिटी के पास भेजने की बात हुई पर ये प्रस्ताव पास नहीं हुआ और राज्यसभा में ये बिल ध्वनिमत के साथ पारित हो गया। राज्यसभा में इस बिल को पास कराने के लिए तेलंगाना व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी का साथ दिया। अब ये बिल राष्ट्रपति कोविंद के पास जाएगा जिनकी सहमति मिलते ही ये कानून लागू भी हो जाएगा।

RTI कानून में क्या आएगा बदलाव

अब जैसा कि हर कोई जान गया है कि ये बिल संसद के दोनों सदन में पास हो चुका है अब बस देर है तो इसके लागू होने में जो कि कभी भी हो सकता है। ऐसे में एक सवाल हर किसी के दिमाग मे आ रहा है कि आखिर इस बिल के पास होने के बाद RTI कानून में क्या बदलाव आएगा ? सबसे पहले जान लें कि इस संशोधन के जरिये 2005 वाले RTI बिल में 2 सेक्शन बदले जा रहे है जो है सेक्शन 13 और सेक्शन 16

RTI 2005 में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त का कार्यकाल नियुक्ति से 5 साल का होता था, या फिर इन आयुक्तों की उम्र 65 साल हो जाने के बाद ही इनका कार्यकाल समाप्त होगा। लेकिन 2019 में संशोधन के बाद यह कहा गया कि अब इनका कार्यकाल केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर होगा। इसके अलावा मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्त के वेतन केंद्र और राज्यों के मुख्य चुनाव आयुक्तों की तरह था। जबकि साल 2019 में हुए संशोधन में कहा गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का वेतन, भत्ते और सेवा से जुड़ी अन्य शर्तें भी केंद्र सरकार ही निर्धारित करेगी।

आम जनता पर क्या पड़ेगा असर

इस बिल में हुए संशोधनों से आप ये साफ तौर पर समझ गए होंगे कि पहले आप किसी भी सरकारी रिकॉर्ड को देख सकते थे, आपको इसका अधिकार प्राप्त था और अगर किसी वजह से आपको रिकॉर्ड दिखाने में विभाग देरी करता था तो उसपर सूचना विभाग जुर्माना भी लगाता था। क्योंकि उस दौरान सूचना विभाग सरकार के दबाव से बाहर हुआ करते थे और वो बिना किसी डर के काम किया करते थें।

RTI संशोधन बिल 2019
RTI संशोधन बिल 2019
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अब ऐसे में विपक्ष व आम जनता दोनों को इसी बात का डर सता रहा है कि स्वत्रंत सूचना आयुक्तों को अब सरकार के प्रति जवाबदेही होना पड़ेगा। जाहिर सी बात है इस संशोधन के बाद कहीं ना कहीं वेतन और कार्यकाल को लेकर बंधा सूचना आयुक्त विभाग सरकार के खिलाफ फैसले लेने से डरेगा। इतना ही नहीं अगर आम जनता सरकार से जुड़े कोई रिकॉर्ड मांगती है जिससे सरकार को किसी तरह का नुकसान होने वाला है तो वो जानकारी भी जनता को हासिल नहीं होगी।

सरकार का कहना है कि इस संशोधन से लोगों को जानकारी लेना और भी ज्यादा आसान हो जाएगा। मैनेजमेंट भी सही रहेगा जिसकी वजह से सबकुछ और भी पारदर्शी हो जाएगा। इतना ही नहीं सरकार इस संशोधन को सही ठहराते हुए ये भी कह रही है कि 2005 वाला RTI क़ानून हड़बड़ी में लाया गया था जिसकी वजह से सही नियम नहीं बन पाए थे इसलिए इन नियमों को और भी मजबूत करने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया।