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जज साहब ने कोर्ट में उतरवाई सिपाही की वर्दी
जज साहब ने कोर्ट में उतरवाई सिपाही की वर्दी|Social Media
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जज साहब का कहर, वाहन को साइड न देने पर कोर्ट में बुलवाकर सिपाही की वर्दी उतराई

जज साहब ने कोर्ट में उतरवाई सिपाही की वर्दी

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

कहते हैं राजा अगर न्यायप्रिय है तो प्रजा सदैव संतुष्टि का जीवन जियेगी, वर्तमान में राजा और दंड अलग-अलग लोग धारण किये हैं। शासन भले ही मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नामक पद के पास हो लेकिन न्याय व्यवस्था आज के परिदृश्य को देखते हुए न्यायाधीशों के आधीन कर रखी है जिसका यदा कदा दुरुपयोग नजर आ ही जाता है। कभी वो किसी धर्म के विरोध पर सजा न देकर क़ुरान बंटवाते है तो कभी वाहन को साइड न मिलने पर पुलिस वाहन के चालक को भरी कोर्ट में कपड़े उतरवा कर बेइज्जत करता है।

मामला आगरा शहर का है, शुक्रवार की दोपहर पुलिस के वज्र वाहन में किशोर कैदियों को सिरौली रोड स्थित किशोर न्यायालय बोर्ड ले जाया जा रहा था। उस वज्र वाहन को पुलिस ड्राइवर घूरेलाल चला रहे थे। तभी पीछे से किशोर न्यायालय बोर्ड के जज संतोष कुमार यादव उसी न्यायालय में जा रहे थे, साइड लेने के लिए जज साहब की कार का हॉर्न बजाया गया , हॉर्न के साथ हूटर भी बजाया गया लेकिन जगह न होने के कारण घूरेलाल जज साहब को साइड नहीं दे पाए, और उसी समय जज साहब का माथा घूम गया।

फिर क्या था, जज साहब ने पेंडिंग मुकदमे न सुनने की बजाय घूरेलाल को कोर्ट में बुला कर शाब्दिक बेइज्जती की गई और जब जज साहब का उस पर भी मन नहीं भरा तो सिपाही को वर्दी उतार का खड़े रहने का हुक्म दिया। इस बाबत जब किसी अन्य व्यक्ति ने सूचना जिले के पुलिस अधीक्षक को दी। तो बखेड़ा खड़ा होने लगा, अधिकारी ने मौके पर पहुंच कर सिपाही को वर्दी पहनने को कहा। जज साहब तब भी अपनी अकड़ पर कायम रहे।

मामले की संगीनता को देखते हुए विभाग ने जिला जज और प्रशासनिक जज को इस बाबत रिपोर्ट भी भेज दी, रिपोर्ट के मद्देनजर है कोर्ट ने माननीय को आगरा से ट्रांसफर बुंदेलखंड में महोबा के डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी में कर दिया है, जहां जज साहब अपनी सेवाएं देंगे।

सवाल जज साहब के ट्रांसफर या सस्पेंशन का नहीं है, न ही ट्रांसफर कोई कारगर इलाज है, जब आम व्यक्ति को अपराधी मानकर भविष्य में कोई अपराध करने से पहले कड़ी सजाए सुनाई जाती है तो जिम्म्मेदार लोगों के लिए सिर्फ ट्रांसफर ?

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